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Kushinagar News: स्व-गणना में गूगल मैप पर लोकेशन चयन में आ रही कठिनाई
Tue, 12 May 2026 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 12 May 2026 02:35 AM IST
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विकास भवन स्थित सीडीओ कार्यालय में स्व गणना के लिए गूगल मैप पर लोकेशन तलाशते कर्मचारी।संवाद
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पडरौना। जिले में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) में कई तरह की तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पोर्टल पर 34 बिंदुओं की मांगी गई जानकारी में कुछ को समझने में लोगों को परेशानी हो रही है। इसके बावजूद अब तक पोर्टल पर बिंदुओं को समझने और सही तरीके से भरने के लिए कोई डेमो आदि के माध्यम से मार्गदर्शन नहीं जारी किया गया है।
लोगों का कहना है कि पोर्टल पर कई बिंदु ऐसे हैं, जिनकी स्थिति को समझने में उन्हें कठिनाई हो रही है। परिवार की परिभाषा, संपत्ति का विवरण सहित कुछ बिंदुओं को भरने में असमंजस की स्थिति हो रही है। पोर्टल पर इन सूचनाओं को ग्रामीणों की ओर से भरना काफी मुश्किल भरा काम है, इसकी वजह गांवों में इंटरनेट की कमजोर उपलब्धता व डिजिटल जानकारी की कमी भी सामने आ रही है।
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से विभागों के माध्यम से स्व-गणना का काम कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों व पहुंचने वाले लोगों की जा रही है। वही,इसको लेकर लोगों में काफी जागरूकता की कमी भी देखने में सामने आ रही है। हालात यह है कि शहर से लेकर देहात तक लोगों को इसके बारे में कुछ पता तक नहीं है।
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स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा घर की लोकेशन टैगिंग की अनिवार्यता है। बिना लोकेशन टैगिंग के आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ रही है। यह 34 बिंदुओं की दी जाने वाले जानकारी में तीसरे नंबर पर है। इसमें नाम, पता, जिला व पिन कोड के साथ लोकेशन की टैगिंग करनी है, लेकिन तमाम ऐसा डाटा मिल रह है, जिनकी गूगल मैप में लोकेशन नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में काफी कठिनाई हो रही है। कई इलाकों में मैप अपडेट नहीं होने के कारण मकान नंबर तो दूर, पूरी गली ही नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में उनके स्व-गणना में परेशानी हो रही है।
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प्रगणक के पास पहुंचेगा ब्योरा, होगा भौतिक सत्यापन
ऑनलाइन स्व-गणना पोर्टल पर 21 मई तक किया जाएगा। इसके बाद प्रगणक स्वगणना के दौरान पोर्टल पर दी गई जानकारी की भौतिक सत्यापन घर-घर पहुंचकर करेंगे। इसके पहले लोगों को स्व-गणना कर पोर्टल पर करना है। सिर्फ प्रगणक के घर पहुंचने पर उसे एसई आईडी देना होगा,जिसके आधार पर उसका सत्यापन करेगा,कोई कमी या सुधार करने का भी काम करेगा।
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ये हैं स्व-गणना के कुछ प्रमुख बिंदु
स्व-गणना के लिए पोर्टल पर कुछ प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी जानी हैं। उनमें भवन विवरण देना है। जिसमें फर्श,दीवार और छत की सामग्री, मकान का उपयोग,मकान की स्थिति,आवास दशा आदि को भरा जाना है। वहीं,परिवार के विवरण में परिवार की संख्या, कुल सदस्य, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली,शौचालय, स्नान सुविधा, रसोई, गैस कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन आदि शामिल हैं। अन्य विवरण में घर में मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारी साझा की जानी है।
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नेटवर्क, इनबॉक्स फुल व बार-बार कोशिश किया तो नहीं आएगा ओटीपी
जिला मुख्यालय सीडीओ कार्यालय में स्व-गणना करने वाले मेगा सर्विस इंचार्ज कमलेश यादव ने बताया कि लोगों की तरफ से बार-बार पोर्टल पर स्व-गणना की कोशिश किए जाने के बाद ओटीपी नहीं आने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा इंटरनेट की स्पीड व मोबाइल में इनबॉक्स का फुल होना भी कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि कार्यालय के 24 कर्मचारियों सहित पहुंचने वाले 16 लोगों का स्व-गणना कर चुके हैं। स्व-गणना के लिए सिर्फ पिन कोड व मुखिया के आधार कार्ड की जरूरत है। कार्यालय में वरिष्ठ सहायक राघवेंद्र राय भी मोबाइल से स्व-गणना करते हुए देखे गए।
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स्व-गणना को लेकर लोगों में रुचि नहीं
जनगणना के तहत 21 मई तक स्व-गणना अभियान के प्रति लोगों में रुचि नहीं दिखाई दे रहा है। जिसके चलते जिले में स्व-गणना की रफ्तार काफी सुस्त पड़ी हुई है। सिर्फ विभागों के कर्मचारी व कार्यालयों तक पहुंचने वाले कुछ लोगों का स्व-गणना हो रहा है।
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स्व-गणना के लिए पोर्टल पर मकान नहीं प्रदर्शित हो रहा था। इसलिए स्व-गणना नहीं पाया है। मंगलवार को फिर से स्व-गणना के लिए कोशिश करेंगे। सहज जन सेवा केंद्र वाले ने बताया कि बिना लोकेशन टैगिंग के स्व-गणना की प्रकिया आगे ही नहीं बढ़ेगी,ताकि पूरा किया जा सके और एसई आईडी दी जा सके। भगवंत कुमार सिंह, कुशीनगर
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स्व-गणना की पूरी जानकरी पोर्टल पर भरने के बाद सबमिट हो गया है। नेटवर्क की वजह से लोकेशन चयन के दौरान कुछ समय के लिए परेशानी हुई, लेकिन गूगल मैप पर लोकेशन चयन के बाद आगे की सारी जानकारी करीब दो से तीन मिनट में ही पूरी हो गई। -कृष्ण कुमार, डीएचओ
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स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोर्टल पर मांगी गई सूचनाएं सबमिट कर दिया गया है। पोर्टल पर घर के गूगल मैप पर चयन में परेशानी आई थी,लेकिन कुछ समय बाद मैप पर दिखने लगे,जिसे टैग कर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। -विपिन उपाध्याय, वरिष्ठ सहायक
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पोर्टल पर प्रकिया में आ रही दिक्कत के चलते स्व-गणना नहीं हो पाया है, पोर्टल पर मांगी जा रही जानकारी को देने में कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी हैं। इसके लिए प्रचार-प्रसार कराए जाने की जरूरत है,अभी हर लोगों को यह जानकारी नहीं है। धीरेंद्र पांडेय, बुद्ध नगरी, कुशीनगर
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पांच दिनों में सिर्फ 2,837 की स्व-गणना हुई
जिले में स्व-गणना की रफ्तार काफी सुस्त है। जिसके चलते अभियान के शुरू होने के पांचवें दिन सोमवार तक सिर्फ 2,837 लोगों की ही स्व-गणना हो सकी है। फिलहाल स्व-गणना 21 मई तक किया जाएगा। लेकिन मौजूदा रफ्तार से स्व-गणना हुई तो शेष 10 दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 10 हजार तक ही पहुंच पाएगा। ऐसे में जब 22 मई से स्व-गणना का सत्यापन प्रशिक्षित प्रगणक व सुपरवाइजरों की तरफ से किया जाएगा,तो उन्हें सत्यापन ही नहीं जानकारी को पोर्टल पर भरकर स्व-गणना भी करना होगा। सिर्फ सत्यापन से ही काम नहीं चलेगा।
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लोगों का कहना है कि पोर्टल पर कई बिंदु ऐसे हैं, जिनकी स्थिति को समझने में उन्हें कठिनाई हो रही है। परिवार की परिभाषा, संपत्ति का विवरण सहित कुछ बिंदुओं को भरने में असमंजस की स्थिति हो रही है। पोर्टल पर इन सूचनाओं को ग्रामीणों की ओर से भरना काफी मुश्किल भरा काम है, इसकी वजह गांवों में इंटरनेट की कमजोर उपलब्धता व डिजिटल जानकारी की कमी भी सामने आ रही है।
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हालांकि जिला प्रशासन की ओर से विभागों के माध्यम से स्व-गणना का काम कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों व पहुंचने वाले लोगों की जा रही है। वही,इसको लेकर लोगों में काफी जागरूकता की कमी भी देखने में सामने आ रही है। हालात यह है कि शहर से लेकर देहात तक लोगों को इसके बारे में कुछ पता तक नहीं है।
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स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा घर की लोकेशन टैगिंग की अनिवार्यता है। बिना लोकेशन टैगिंग के आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ रही है। यह 34 बिंदुओं की दी जाने वाले जानकारी में तीसरे नंबर पर है। इसमें नाम, पता, जिला व पिन कोड के साथ लोकेशन की टैगिंग करनी है, लेकिन तमाम ऐसा डाटा मिल रह है, जिनकी गूगल मैप में लोकेशन नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में काफी कठिनाई हो रही है। कई इलाकों में मैप अपडेट नहीं होने के कारण मकान नंबर तो दूर, पूरी गली ही नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में उनके स्व-गणना में परेशानी हो रही है।
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प्रगणक के पास पहुंचेगा ब्योरा, होगा भौतिक सत्यापन
ऑनलाइन स्व-गणना पोर्टल पर 21 मई तक किया जाएगा। इसके बाद प्रगणक स्वगणना के दौरान पोर्टल पर दी गई जानकारी की भौतिक सत्यापन घर-घर पहुंचकर करेंगे। इसके पहले लोगों को स्व-गणना कर पोर्टल पर करना है। सिर्फ प्रगणक के घर पहुंचने पर उसे एसई आईडी देना होगा,जिसके आधार पर उसका सत्यापन करेगा,कोई कमी या सुधार करने का भी काम करेगा।
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ये हैं स्व-गणना के कुछ प्रमुख बिंदु
स्व-गणना के लिए पोर्टल पर कुछ प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी जानी हैं। उनमें भवन विवरण देना है। जिसमें फर्श,दीवार और छत की सामग्री, मकान का उपयोग,मकान की स्थिति,आवास दशा आदि को भरा जाना है। वहीं,परिवार के विवरण में परिवार की संख्या, कुल सदस्य, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली,शौचालय, स्नान सुविधा, रसोई, गैस कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन आदि शामिल हैं। अन्य विवरण में घर में मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारी साझा की जानी है।
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नेटवर्क, इनबॉक्स फुल व बार-बार कोशिश किया तो नहीं आएगा ओटीपी
जिला मुख्यालय सीडीओ कार्यालय में स्व-गणना करने वाले मेगा सर्विस इंचार्ज कमलेश यादव ने बताया कि लोगों की तरफ से बार-बार पोर्टल पर स्व-गणना की कोशिश किए जाने के बाद ओटीपी नहीं आने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा इंटरनेट की स्पीड व मोबाइल में इनबॉक्स का फुल होना भी कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि कार्यालय के 24 कर्मचारियों सहित पहुंचने वाले 16 लोगों का स्व-गणना कर चुके हैं। स्व-गणना के लिए सिर्फ पिन कोड व मुखिया के आधार कार्ड की जरूरत है। कार्यालय में वरिष्ठ सहायक राघवेंद्र राय भी मोबाइल से स्व-गणना करते हुए देखे गए।
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स्व-गणना को लेकर लोगों में रुचि नहीं
जनगणना के तहत 21 मई तक स्व-गणना अभियान के प्रति लोगों में रुचि नहीं दिखाई दे रहा है। जिसके चलते जिले में स्व-गणना की रफ्तार काफी सुस्त पड़ी हुई है। सिर्फ विभागों के कर्मचारी व कार्यालयों तक पहुंचने वाले कुछ लोगों का स्व-गणना हो रहा है।
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स्व-गणना के लिए पोर्टल पर मकान नहीं प्रदर्शित हो रहा था। इसलिए स्व-गणना नहीं पाया है। मंगलवार को फिर से स्व-गणना के लिए कोशिश करेंगे। सहज जन सेवा केंद्र वाले ने बताया कि बिना लोकेशन टैगिंग के स्व-गणना की प्रकिया आगे ही नहीं बढ़ेगी,ताकि पूरा किया जा सके और एसई आईडी दी जा सके। भगवंत कुमार सिंह, कुशीनगर
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स्व-गणना की पूरी जानकरी पोर्टल पर भरने के बाद सबमिट हो गया है। नेटवर्क की वजह से लोकेशन चयन के दौरान कुछ समय के लिए परेशानी हुई, लेकिन गूगल मैप पर लोकेशन चयन के बाद आगे की सारी जानकारी करीब दो से तीन मिनट में ही पूरी हो गई। -कृष्ण कुमार, डीएचओ
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स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोर्टल पर मांगी गई सूचनाएं सबमिट कर दिया गया है। पोर्टल पर घर के गूगल मैप पर चयन में परेशानी आई थी,लेकिन कुछ समय बाद मैप पर दिखने लगे,जिसे टैग कर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। -विपिन उपाध्याय, वरिष्ठ सहायक
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पोर्टल पर प्रकिया में आ रही दिक्कत के चलते स्व-गणना नहीं हो पाया है, पोर्टल पर मांगी जा रही जानकारी को देने में कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी हैं। इसके लिए प्रचार-प्रसार कराए जाने की जरूरत है,अभी हर लोगों को यह जानकारी नहीं है। धीरेंद्र पांडेय, बुद्ध नगरी, कुशीनगर
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पांच दिनों में सिर्फ 2,837 की स्व-गणना हुई
जिले में स्व-गणना की रफ्तार काफी सुस्त है। जिसके चलते अभियान के शुरू होने के पांचवें दिन सोमवार तक सिर्फ 2,837 लोगों की ही स्व-गणना हो सकी है। फिलहाल स्व-गणना 21 मई तक किया जाएगा। लेकिन मौजूदा रफ्तार से स्व-गणना हुई तो शेष 10 दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 10 हजार तक ही पहुंच पाएगा। ऐसे में जब 22 मई से स्व-गणना का सत्यापन प्रशिक्षित प्रगणक व सुपरवाइजरों की तरफ से किया जाएगा,तो उन्हें सत्यापन ही नहीं जानकारी को पोर्टल पर भरकर स्व-गणना भी करना होगा। सिर्फ सत्यापन से ही काम नहीं चलेगा।