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जलसे की अनुमति नहीं मिलने पर प्रदर्शन किया
कुशीनगर
Updated Tue, 17 May 2016 11:24 PM IST
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नाराज शिक्षकों और छात्रों ने मंगलवार को काली पट्टी बांधकर मदरसा के बाहर काफी देर तक प्रदर्शन किया।
- फोटो : अमर उजाला
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फाजिलनगर। विकास खंड के पिपरा रज्जब में स्थित मदरसा मिस्बाहुल उलूम में आयोजित होने वाले जलसा दस्तार बंदी को प्रशासन की तरफ से अनुमति नहीं दिए जाने से नाराज शिक्षकों और छात्रों ने मंगलवार को काली पट्टी बांधकर मदरसा के बाहर काफी देर तक प्रदर्शन किया। प्
रदर्शन में शामिल शिक्षकों और छात्रों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार विरोधी नारे भी लगाए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन से जलसा के आयोजन की अनुमति देने की मांग की और चेतावनी दी कि अनुमति नहीं मिलने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। शिक्षकों का कहना था कि मदरसा में पिछले 20 साल से जलसा दस्तार बंदी आयोजित कर छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरित दिया जाता है।
इस वर्ष यह आयोजन मंगलवार को आयोजित करने की तिथि निर्धारित की गई थी। शिक्षकों का आरोप था कि प्रशासन ने ऐन मौके पर जलसे के आयोजन की अनुमति नहीं दी। जिससे प्रबंध समिति के सदस्यों, शिक्षकों और छात्रों में नाराजगी पैदा हो गई। जलसे में पहुंचे शिक्षकों और छात्रों ने काली पट्टी बांधकर मदरसा परिसर के समक्ष ही प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार विरोधी नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मदरसा में जलसे के आयोजन के लिए अनुमति दिए जाने की मांग भी की। उधर, मदरसा के प्रबंधक सिराजुद्दीन अंसारी ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के हक की बात करती है लेकिन अधिकारी उनका हक छीनने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से जलसा के आयोजन के लिए अनुमति देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अनुमति नहीं मिलने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान प्रधानाचार्य वलीउल्लाह कादरी, जावेद अंसारी, अब्दुल मोनाफ, अशफाक अंसारी, कारी अख्तर रजा, एहसानुल्लाह, गुलाम अली, आसिफ अली, मुजाहिद हुसैन, अफजल आदि शामिल रहे। इस संबंध में एसडीएम कसया श्रीप्रकाश शुक्ल का कहना था कि विवाद की आशंका को देखते हुए जलसा के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई।
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रदर्शन में शामिल शिक्षकों और छात्रों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार विरोधी नारे भी लगाए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन से जलसा के आयोजन की अनुमति देने की मांग की और चेतावनी दी कि अनुमति नहीं मिलने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। शिक्षकों का कहना था कि मदरसा में पिछले 20 साल से जलसा दस्तार बंदी आयोजित कर छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र वितरित दिया जाता है।
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इस वर्ष यह आयोजन मंगलवार को आयोजित करने की तिथि निर्धारित की गई थी। शिक्षकों का आरोप था कि प्रशासन ने ऐन मौके पर जलसे के आयोजन की अनुमति नहीं दी। जिससे प्रबंध समिति के सदस्यों, शिक्षकों और छात्रों में नाराजगी पैदा हो गई। जलसे में पहुंचे शिक्षकों और छात्रों ने काली पट्टी बांधकर मदरसा परिसर के समक्ष ही प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार विरोधी नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मदरसा में जलसे के आयोजन के लिए अनुमति दिए जाने की मांग भी की। उधर, मदरसा के प्रबंधक सिराजुद्दीन अंसारी ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के हक की बात करती है लेकिन अधिकारी उनका हक छीनने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से जलसा के आयोजन के लिए अनुमति देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अनुमति नहीं मिलने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान प्रधानाचार्य वलीउल्लाह कादरी, जावेद अंसारी, अब्दुल मोनाफ, अशफाक अंसारी, कारी अख्तर रजा, एहसानुल्लाह, गुलाम अली, आसिफ अली, मुजाहिद हुसैन, अफजल आदि शामिल रहे। इस संबंध में एसडीएम कसया श्रीप्रकाश शुक्ल का कहना था कि विवाद की आशंका को देखते हुए जलसा के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई।