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अधिकार क्षेत्र को लेकर दो विभाग आमने-सामने
कुशीनगर
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:29 PM IST
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कलेक्ट्रेट में डीएम को ज्ञापन देने जाते ग्राम विकास अधिकारी और कर्मचारी ।
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। अधिकार क्षेत्र को लेकर ग्राम्य विकास विभाग और पंचायतीराज विभाग आमने-सामने हो गया है। बृहस्पतिवार को डीडीओ की अगुवाई में ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। पंचायतीराज विभाग पहले ही इस मामले को लेकर बैठक कर आंदोलन की घोषणा कर चुका है।
शासन स्तर पर पंचायतीराज विभाग को ग्राम्य विकास विभाग के अधीन लाए जाने की चर्चा है। इसके बाद से ही दोनों विभागाें के अफसर और कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास महापरिषद के संरक्षक और डीडीओ बीके पाठक की अगुवाई में संगठन से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इनका कहना था कि कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी, निर्धनता उन्मूलन और ग्रामीण सुविधाओं के विकास को में ध्यान में रखकर वर्ष 1952 में विकास खंडों की स्थापना की गई थी।
कृषि, कृषि रक्षा, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, पंचायतीराज, युवा कल्याण, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, अर्थ एवं संख्या, चिकित्सा आदि विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी खंड विकास अधिकारी के नियंत्रण में किए गए। बीडीओ ब्लाक स्तर पर 36 विभागों के बीच समन्वयक अधिकारी है। ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों ने पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों पर निहित स्वार्थों के लिए शासन की मंशा के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाया।
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इस दौरान ग्राम्य विकास महापरिषद के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार महेंद्र प्रताप चौबे, पीडी राजेंद्र प्रसाद, बीडीओ सतीश सिंह, कार्तिकेय मिश्र, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र मल्ल, विनोद दूबे, केके मिश्र, वीरेश्वर सिंह, अमित शुक्ला, प्रत्यूष शुक्ला, जय सिंह, राघवेंद्र राव, अशोक यादव, भगवंत प्रसाद आदि मौजूद थे।
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शासन स्तर पर पंचायतीराज विभाग को ग्राम्य विकास विभाग के अधीन लाए जाने की चर्चा है। इसके बाद से ही दोनों विभागाें के अफसर और कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास महापरिषद के संरक्षक और डीडीओ बीके पाठक की अगुवाई में संगठन से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इनका कहना था कि कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी, निर्धनता उन्मूलन और ग्रामीण सुविधाओं के विकास को में ध्यान में रखकर वर्ष 1952 में विकास खंडों की स्थापना की गई थी।
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कृषि, कृषि रक्षा, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, पंचायतीराज, युवा कल्याण, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, अर्थ एवं संख्या, चिकित्सा आदि विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी खंड विकास अधिकारी के नियंत्रण में किए गए। बीडीओ ब्लाक स्तर पर 36 विभागों के बीच समन्वयक अधिकारी है। ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों ने पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों पर निहित स्वार्थों के लिए शासन की मंशा के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाया।
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इस दौरान ग्राम्य विकास महापरिषद के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार महेंद्र प्रताप चौबे, पीडी राजेंद्र प्रसाद, बीडीओ सतीश सिंह, कार्तिकेय मिश्र, ग्राम विकास अधिकारी शैलेंद्र मल्ल, विनोद दूबे, केके मिश्र, वीरेश्वर सिंह, अमित शुक्ला, प्रत्यूष शुक्ला, जय सिंह, राघवेंद्र राव, अशोक यादव, भगवंत प्रसाद आदि मौजूद थे।