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Kushinagar News: सजे पंडाल...लक्ष्मी पूजा आज
Thu, 31 Oct 2024 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 31 Oct 2024 02:43 AM IST
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पडरौना। दीपों का पर्व दीपावली को लेकर शहर से गांव तक उल्लास का माहौल बना हुआ है। घर-आंगन से लेकर व्यवसायियों ने दुकानों व प्रतिष्ठानों को सजाना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को विधि-विधान से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा होगी। बुधवार को लक्ष्मी पूजा समितियों ने पंडाल को आकर्षक ढंग से सजाए हैं।
शहर के भारतीय शिवाला मंदिर, कसेर टोली, तिलक चौक, गुदरी बाजार, साहबगंज समेत ग्रामीण क्षेत्र के कई स्थानों पर बने पांडालों में आकर्षक बल्बों और फूलों से सजाया गया है। लोग दीपावली पर्व मनाने और लक्ष्मी पूजा की तैयारी में जुट गए हैं। शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा होगी। आयोजकों की तरफ से इसकी तैयारी तेज कर दी गई है। घरों और मकानों को रंगीन झालरों से सजाया गया है।
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लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन प्रदोष काल, अमावस्या तिथि और स्थिर लग्न में करने की धार्मिक मान्यता है। पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि प्रदोष काल वह समय होता है, जब सूर्यास्त हो जाता है और यह लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार पर तय होता है, लेकिन दिवाली पर माता महालक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि की रात में होती है। 31 अक्तूबर को पूरी रात अमावस्या तिथि रहेगी। पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 31 अक्तबूर को 3 बजकर 52 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। इसका समापन एक नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा। 31 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी पूजा होगी। उन्होंने बताया कि शाम 05:36 बजे से 6:17 बजे तक लक्ष्मी पूजन का उत्तम मुहूर्त है।
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शहर के भारतीय शिवाला मंदिर, कसेर टोली, तिलक चौक, गुदरी बाजार, साहबगंज समेत ग्रामीण क्षेत्र के कई स्थानों पर बने पांडालों में आकर्षक बल्बों और फूलों से सजाया गया है। लोग दीपावली पर्व मनाने और लक्ष्मी पूजा की तैयारी में जुट गए हैं। शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा होगी। आयोजकों की तरफ से इसकी तैयारी तेज कर दी गई है। घरों और मकानों को रंगीन झालरों से सजाया गया है।
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लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन प्रदोष काल, अमावस्या तिथि और स्थिर लग्न में करने की धार्मिक मान्यता है। पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि प्रदोष काल वह समय होता है, जब सूर्यास्त हो जाता है और यह लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार पर तय होता है, लेकिन दिवाली पर माता महालक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि की रात में होती है। 31 अक्तूबर को पूरी रात अमावस्या तिथि रहेगी। पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 31 अक्तबूर को 3 बजकर 52 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। इसका समापन एक नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा। 31 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी पूजा होगी। उन्होंने बताया कि शाम 05:36 बजे से 6:17 बजे तक लक्ष्मी पूजन का उत्तम मुहूर्त है।
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