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अहिरौलीदान का डीह टोला फिर कटान की जद में, पलायन की तैयारी में जुटे तटवर्ती गांवों के लोग

Fri, 31 Jul 2020 05:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2020 05:42 PM IST
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danger on ahiraulidan dihtola due to flood of gandak
अहिरौलीदान के डीह टोला में मकान तोड़ रहे लोग। - फोटो : KUSHINAGAR
अहिरौलीदान का डीह टोला फिर कटान की जद में, पलायन की तैयारी में जुटे तटवर्ती गांवों के लोग
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नरवाजोत-पिपराघाट बांध पर बढ़ा गंडक नदी का दबाव
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान का डीह टोला फिर गंडक नदी की कटान की जद में आ गया है। भयभीत ग्रामीण पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। कटान की जद में आ चुके कई लोगों ने अपने घर को तोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना शुरू कर दिया है।
बिहार बार्डर पर स्थित अहिरौलीदान गांव का डीह टोला लगभग 600 आबादी वाला एक भरा पूरा पुरवा है, जो इस साल गंडक नदी के निशाने पर आ चुका है। कुछ दिन पहले जब वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में 436500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। तब यह पुरवा सीधा नदी के निशाने पर आ गया था। इस कारण गांव में अफरा तफरी मच गई थी और राजपत यादव, नथुनी यादव, दीनानाथ और प्रहलाद को अपना पक्का मकान तोड़कर तो कई अन्य लोगों को जरूरी सामान के साथ पलायन के लिए विवश होना पड़ा था। अब जब गंडक नदी में डिस्चार्ज के घटने-बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया है तो फिर इस गांव में कटान की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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इसके भय से जवाहर यादव, विश्वनाथ और नंदकिशोर ने भी अब अपना पक्का मकान तोड़ना शुरू कर दिया है। ताकि समय रहते मकान के मलबे व अन्य सामग्री को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। यही नहीं, गांव में भारी जल जमाव व कटान के खतरे को देखते हुए कई अन्य लोगों ने पलायन करने की तैयारी शुरू कर दी है। सुजीत यादव, सुरेंद्र, सुबाष, हरिलाल, लालू, सुरेश, पप्पू सिंह, संजय सिंह, बबलू प्रसाद, धुरंधर, श्रीकिशुन आदि का कहना है कि एपी बांध को बचाने के लिए भले ही शासन ने करोड़ों की परियोजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन 600 की आबादी वाले डीह टोला को बाढ़ व कटान से बचाने को लेकर बाढ़खंड विभाग और प्रशासन दोनों गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
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दूसरी ओर, नरवाजोत-पिपराघाट बांध पर गंडक नदी का सीधा दबाव बढ़ जाने से गांव के लोग सहमे हुए हैं। नदी लगभग 100 मीटर की लंबाई में बांध के स्लोप में घुसकर कटान कर रही है। हालांकि बाढ़खंड कटान को रोकने के प्रयास में लगा है।

नरवाजोत-पिपराघाट बांध पर दहारी टोला के सामने गंडक नदी पिछले पांच वर्षों से शांत पड़ी थी, लेकिन अब वहां भी कटान शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार से तो गंडक का कटान इतना तेज हो गया है कि बांध के स्लोप में लगभग 100 मीटर तक घुसकर कटान करने लगी है। इससे बांध के साथ कई गांवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंता कटान को रोकने की कोशिश में लगे है। बावजूद इसके बांध पर दबाव बना हुआ है और लोग सहमे हुए है। ग्राम प्रधान विद्यासागर सिंह, जनार्दन चौहान, ब्रह्मा साह, प्रभुनाथ यादव, पुजारी सिंह, चंद्रमा चौहान, दूधनाथ शर्मा, सकलदेव सिंह, महादेव चौहान, सुरेंद्र सिंह, संजय सिंह, कैलाश सिंह आदि का कहना है कि नदी के रुख से यही लगता है कि वह एक बार फिर पांच साल पहले का इतिहास दोहराना चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो बांध के साथ कई गांवों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। बाढ़ खंड के एक्सईएन भरत राम का कहना है कि बचाव कार्य जारी है। स्थिति नियंत्रण में है।
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