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Kushinagar News: गंडक नदी के डिस्चार्ज में उतार-चढ़ाव से ठोकरों पर खतरा
Thu, 22 Aug 2024 06:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 22 Aug 2024 06:02 AM IST
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तमकुहीरोड। गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार उतार-चढ़ाव से विरवट कोन्हवलिया में कट एंड टू बांध के पास के ठोकर निशाने पर हैं। नरवाजोत सहित अन्य ठोकरों एवं तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। नदी के रुख ने बाढ़ खंड के अभियंताओं को भी सतर्क कर दिया है। बुधवार को तीन बजे बाढ़ खंड के एक्सईएन व एसडीओ ने अन्य अभियंताओं के साथ तटबंधों का जायजा लिया और विशेष सतर्कता बरतने के साथ जरूरी इंतजाम करने का निर्देश दिया।
गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार उतार-चढ़ाव बने रहने से नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक के अधिकांश ठोकरों व तटबंधों पर कटान का खतरा बना हुआ है। सबसे ज्यादा विकट स्थिति विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार (कट एंड टू बांध) की है, जहां विगत दिनों में नदी तांडव मचा चुकी है। इसके बाद कटान के जद में आए ठोकरों व तटबंधों पर विभाग द्वारा बोल्डर की डंपिंग करानी पड़ी थी। यहां डिस्चार्ज बढ़ने से फिर ठोकर निशाने पर आ गए हैं। यही हाल नरवाजोत में किमी 1.700 पर निर्मित ठोकर और उसके अप एंड डाउन स्ट्रीम का है। नदी ठोकर से टकराने लगी है। यही नहीं, एपी बांध के किमी 1.400, किमी 2.800, किमी 3.050, किमी 3.500, किमी 4.500, किमी 7.000, किमी 10.518 और किमी 14.500 पर स्थित ठोकरों व तटबंधों पर भी दबाव बना हुआ और नदी की धारा ठोकरों व तटबंधों से टकरा कर बह रही है, जो उनकी सुरक्षा के लिए कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है।
नदी के इस रुख ने तटबंधों के किनारे बसे नरवाजोत, घघवा जगदीश, जवही दयाल, मुसहर टोली, विरवट कोंन्हवलिया, बाक खाश, बाघा चौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में ठोकरों को नुकसान पहुंचता है तो तटबंधों पर कटान का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इस खतरे से बाढ़ खंड के अभियंता भी सतर्क है। इसी क्रम में बुधवार को तीन बजे बाढ़ खंड के एक्सईएन एमके सिंह व एसडीओ रमेश यादव ने अन्य अभियंताओं के साथ विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार के साथ अन्य सभी संवेदनशील जगहों का जायजा लिया और संभावित खतरे के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जर्जर स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने के साथ जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए। इस दौरान उनके साथ जेई चंदप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव, जेई विनोद कुमार शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद और अनेक ग्रामीण भी मौजूद रहे।
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गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार उतार-चढ़ाव बने रहने से नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक के अधिकांश ठोकरों व तटबंधों पर कटान का खतरा बना हुआ है। सबसे ज्यादा विकट स्थिति विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार (कट एंड टू बांध) की है, जहां विगत दिनों में नदी तांडव मचा चुकी है। इसके बाद कटान के जद में आए ठोकरों व तटबंधों पर विभाग द्वारा बोल्डर की डंपिंग करानी पड़ी थी। यहां डिस्चार्ज बढ़ने से फिर ठोकर निशाने पर आ गए हैं। यही हाल नरवाजोत में किमी 1.700 पर निर्मित ठोकर और उसके अप एंड डाउन स्ट्रीम का है। नदी ठोकर से टकराने लगी है। यही नहीं, एपी बांध के किमी 1.400, किमी 2.800, किमी 3.050, किमी 3.500, किमी 4.500, किमी 7.000, किमी 10.518 और किमी 14.500 पर स्थित ठोकरों व तटबंधों पर भी दबाव बना हुआ और नदी की धारा ठोकरों व तटबंधों से टकरा कर बह रही है, जो उनकी सुरक्षा के लिए कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है।
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नदी के इस रुख ने तटबंधों के किनारे बसे नरवाजोत, घघवा जगदीश, जवही दयाल, मुसहर टोली, विरवट कोंन्हवलिया, बाक खाश, बाघा चौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में ठोकरों को नुकसान पहुंचता है तो तटबंधों पर कटान का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इस खतरे से बाढ़ खंड के अभियंता भी सतर्क है। इसी क्रम में बुधवार को तीन बजे बाढ़ खंड के एक्सईएन एमके सिंह व एसडीओ रमेश यादव ने अन्य अभियंताओं के साथ विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार के साथ अन्य सभी संवेदनशील जगहों का जायजा लिया और संभावित खतरे के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जर्जर स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने के साथ जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए। इस दौरान उनके साथ जेई चंदप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव, जेई विनोद कुमार शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद और अनेक ग्रामीण भी मौजूद रहे।