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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Six tigers raids in search of Slayer

छह बाघों के कातिलों की तलाश में छापे

Wed, 20 Jan 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला/कुशीनगर
अमर उजाला/कुशीनगर Updated Wed, 20 Jan 2016 11:22 PM IST
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खड्डा (कुशीनगर)। मंगलवार को वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल के पास बाघ के दो खालों के साथ पकड़े गए दो तस्करों की निशानदेही पर वन विभाग की टीम ने कई जगह छापामारी की।
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टीम को वन्य जीवों के अंगों की तस्करी में कुछ और लोगों की तलाश है। पकड़े गए तस्करों की निशानदेही पर ही गैंडे का शिकार करने के एक आरोपी को भी पकड़ा गया है।
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इधर पता चला है कि तंत्र-मंत्र और यौन क्षमता बढ़ाने के अंधविश्वास के चलते बाघों का शिकार किया जाता है। जिले की सीमा से सटे बिहार के लौकरिया थानाक्षेत्र के एक गांव से बाघ के दो खालों के साथ पकड़े गए दो लोगों की निशानदेही पर बीटीआर के डीएफओ अमित कुमार की अगुवाई में छापामारी जारी है।
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कुछ संदिग्ध लोगों की धरपकड़ भी हुई है। गैंडे के शिकार मामले में वांछित नरसिंह गुरु को इन्हीं दोनों तस्करों की निशानदेही पर गोनौली गांव में छापा मारकर गिरफ्तार किया गया है।

इसकी निशानदेही पर इस गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश जारी है। डीएफओ अमित कुमार का कहना है कि पकड़े गए लोगों से मिल रही जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

यूपी के सोहगीबरवा वन्य अभ्यारण्य, बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान के जंगल की सीमा आपस में मिली हैं। जंगल की सीमाएं खुली हैं।

वन्यप्राणी एक-दूसरे क्षेत्र में आते-जाते रहते हैं। वन विभाग की ओर से काफी प्रयास के बावजूद बाघ शिकारियों के निशाने पर रहते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वनक्षेत्र के नौरंगिया में सन 2008 में शिकारियों के फंदे में फंसकर बाघ की मौत हो गई थी। इसी वनक्षेत्र के कांटी जंगल में बाघ का शव मिला था।


इसके अलावा हरनाटाड़ के पास बाघ को मारा गया था। वाल्मीकिनगर के पास रमपुरवा गांव के समीप बाघ को गोली मारी गई थी। अब मंगलवार को दो बाघों के खालों के साथ दो तस्कर पकड़े गए हैं।

इस मामले की जांच करने वाले एक पुलिस अफसर ने बताया कि बाघों के खालों और उनकी हड्डियों को तंत्र साधना के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए लोग मुंहमांगी कीमत देते हैं।

इसके अलावा लोगों में बाघों के अंगों से यौन क्षमता और रुतबा बढ़ाने का अंधविश्वास रहता है। ताबीज में बाघों के बाल, नाखून आदि का इस्तेमाल किया जाता है। देश-विदेश में लोग बाघों के अंगों की ऊंची कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं।



इसके चलते शिकारी बाघों को मारने में नहीं हिचकते। खड्डा के रेंजर दिलीप श्रीवास्तव बताते हैं कि अंधविश्वासों के चलते बाघों सहित कई वन्य जीवों पर खतरा मंडराता रहता है। बाघ इस धरती के अनमोल जानवर हैं। इन्हें जब लगता है कि सामने वाला छेड़ेगा, तभी ये उस पर आक्रामक होते हैं।
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