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एक चिता पर पति-पत्नी को देख रो पड़े सब लोग
कुशीनगर
Updated Mon, 23 May 2016 11:16 PM IST
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शोक में बैठे परिवार के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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कुबेरस्थान। परिवार के साथ मध्य प्रदेश में शनिवार को सड़क हादसे के शिकार हुए शिवराजपुर के कृष्णमोहन सिंह और उनकी पत्नी का दाह संस्कार सोमवार को किया गया। दोनों शव एक ही चिता पर रखे गए थे।
कृष्णमोहन सिंह के परिवार में कोई नहीं होने के कारण उनके भतीजे ने मुखागिभन दी। उसके बाद शिवांश का शव दफनाया गया। इन दृश्यों को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक गईं। घायल नीतू और पलक का इलाज अब भी केजीएमसी में चल रहा है।
कृष्णमोहन सिंह अपने चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाइयों का देहांत पहले ही हो चुका है। कृष्णमोहन सिंह, उनकी पत्नी निर्मला देवी और पौत्र शिवांश का शव सोमवार की सुबह तकरीबन पांच बजे घर लाया गया, जबकि सड़क हादसे में ऋषि का शव पूरी तरह खराब हो जाने के कारण अंतिम संस्कार वहीं कर दिया गया था। शवों को देख कृष्णमोहन सिंह की 70 वर्षीय बहन माया सहित अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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उसके बाद शव बिना नीचे उतारे ही गांव के बाहर शमशान घाट पर ले जाया गया, जहां पहले से बनी एक ही चिता पर दोनों शवों को रखा गया और अंतिम संस्कार किया गया। दोनों शवों को उनके भतीजे परीक्षित सिंह ने मुखागिभन दी। उसके बाद पौत्र शिवांश के शव को दफनाया गया। इस हृदयविदारक दृश्यों को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
उनके पड़ोस के कई घरों में सोमवार को चूल्हा नहीं जला। उधर, स्व. कृष्णमोहन सिंह की पुत्रवधू नीतू और पौत्री पलक को केजीएमसी (लखनऊ) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत अब भी चिंताजनक बताई जा रही है।
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कृष्णमोहन सिंह के परिवार में कोई नहीं होने के कारण उनके भतीजे ने मुखागिभन दी। उसके बाद शिवांश का शव दफनाया गया। इन दृश्यों को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक गईं। घायल नीतू और पलक का इलाज अब भी केजीएमसी में चल रहा है।
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कृष्णमोहन सिंह अपने चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाइयों का देहांत पहले ही हो चुका है। कृष्णमोहन सिंह, उनकी पत्नी निर्मला देवी और पौत्र शिवांश का शव सोमवार की सुबह तकरीबन पांच बजे घर लाया गया, जबकि सड़क हादसे में ऋषि का शव पूरी तरह खराब हो जाने के कारण अंतिम संस्कार वहीं कर दिया गया था। शवों को देख कृष्णमोहन सिंह की 70 वर्षीय बहन माया सहित अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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उसके बाद शव बिना नीचे उतारे ही गांव के बाहर शमशान घाट पर ले जाया गया, जहां पहले से बनी एक ही चिता पर दोनों शवों को रखा गया और अंतिम संस्कार किया गया। दोनों शवों को उनके भतीजे परीक्षित सिंह ने मुखागिभन दी। उसके बाद पौत्र शिवांश के शव को दफनाया गया। इस हृदयविदारक दृश्यों को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
उनके पड़ोस के कई घरों में सोमवार को चूल्हा नहीं जला। उधर, स्व. कृष्णमोहन सिंह की पुत्रवधू नीतू और पौत्री पलक को केजीएमसी (लखनऊ) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत अब भी चिंताजनक बताई जा रही है।