{"_id":"588256a94f1c1b417fefecf6","slug":"many-school-children-are-put-in-danger-the-vehicle","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों की जान खतरे में डाल रहे कई स्कूल वाहन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बच्चों की जान खतरे में डाल रहे कई स्कूल वाहन
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:57 PM IST
विज्ञापन
बच्चों की जान खतरे में डाल चल रहे स्कूल वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल वाहन से पढ़ने के लिए विद्यालय भले ही उनकी सुरक्षा को सोचकर भेज रहे हैं, लेकिन कुछ स्कूल वाहनों के चालक इसमें भरपूर लापरवाही बरत रहे हैं। डीजल और समय की बचत में वे बच्चों को स्कूल वाहनों में क्षमता अधिक बैठा रहे हैं, जिससे उनके जीवन को कभी भी खतरा हो सकता है। अफसोस कि ऐसे वाहन चालकों को देखकर न तो अभिभावक कुछ बोल रहे न ही परिवहन विभाग अथवा पुलिस।
स्कूल वाहनों के चालकों का चयन करने से पहले विद्यालय संचालक इस बात पर कत्तई ध्यान देते नहीं दिख रहे हैं कि चालक की योग्यता क्या है। वह कुशल चालक है कि नहीं, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है अथवा नहीं। ऐसे वाहनों की जांच करते हुए कभी परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी नजर नहीं आते। यही वजह है कि स्कूल वाहनों के चालक मनमाने तरीके से बच्चों को बैठाकर ड्राइविंग कर रहे हैं। कई बार इस तरह के हादसों के बावजूद न तो स्कूल संचालक सबक ले रहे हैं और नही अभिभावक या अन्य लोग। इसके अलावा परिवहन विभाग स्कूल वाहनों के फिटनेस आदि की जांच भी नहीं करता। हाटा इलाके में तो ऐसे भी वाहनचालक हैं जो अपने वाहन के बोनट पर बच्चाें के स्कूल बैग रखकर चल रहे हैं। आगे के वाहन ठीक से दिखाई न देने के बाद भी ड्राइविंग करते रहते हैं। अधिक कमाई के चक्कर में वाहन में स्कूली बच्चों को भूसे की तरह भरा जाता है। कई बच्चे तो कंधे पर बस्ते का बोझे होने के बाद भी वाहन की राड पकड़कर लटकते दिखाई देते हैं।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के ढाढ़ा, सुकरौली, महुआरी, बंचरा,अजीजनगर, मथौली सहित अन्य इलाकों में 50 से अधिक छोटे-बडे़ पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूल हैं। इनमें कई ऐसे हैं, जहां अधिक कमाई के चक्कर में अपनी वैन तो एक होती है, लेकिन दिन भर सवारियां ढोने वाले वाहन स्कूल में लगे होते हैं। इसके चलते स्कूल संचालकों को कभी कभी ही अपनी एक वैन की फि टनेस, वह भी कागजों में ही करानी पड़ती है। इसके अलावा अन्य वाहनों से उनका कमीशन तय हो जाता है। अपने कमीशन की भरपाई करने के लिए वाहन चालक भी क्षमता से अधिक बच्चे ढोने से इंकार नहीं करते।
विज्ञापन
यही वजह है कि अक्सर ओवरलोड स्कूली वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं और मासूम बच्चों की जान पर बन आती है। इसी तरह स्कूल वैन अथवा वाहन का चालक कौन है और उसका पता क्या है, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है भी कि नहीं इस तरह जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं देते।
सुकरौली क्षेत्र के पैकौली गांव के निवासी सूर्यभान मिश्र कहते हैं हम बच्चों को स्कूल की जिम्मेदारी पर भेजते है। इसलिए प्रबंधन को चाहिए कि वह बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान दे। सुकरौली क्षेत्र के गांव परसिया निवासी विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन यदि बच्चों की सुरक्षा में अनदेखी करते हैं तो कम से कम एआरटीओ और पुलिस को स्कूल में लगे वाहनों की सुरक्षा को लेकर अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक होना चाहिए।
इस संबंध में सीओ कसया राघवेंद्र चतुर्वेदी का कहना है कि सभी विद्यालयों को सूचना दे दी गई है कि वे अपने वाहन एवं चालक की जानकारी उपलब्ध कराएं। जल्द ही मुहिम चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
स्कूल वाहनों के चालकों का चयन करने से पहले विद्यालय संचालक इस बात पर कत्तई ध्यान देते नहीं दिख रहे हैं कि चालक की योग्यता क्या है। वह कुशल चालक है कि नहीं, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है अथवा नहीं। ऐसे वाहनों की जांच करते हुए कभी परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी नजर नहीं आते। यही वजह है कि स्कूल वाहनों के चालक मनमाने तरीके से बच्चों को बैठाकर ड्राइविंग कर रहे हैं। कई बार इस तरह के हादसों के बावजूद न तो स्कूल संचालक सबक ले रहे हैं और नही अभिभावक या अन्य लोग। इसके अलावा परिवहन विभाग स्कूल वाहनों के फिटनेस आदि की जांच भी नहीं करता। हाटा इलाके में तो ऐसे भी वाहनचालक हैं जो अपने वाहन के बोनट पर बच्चाें के स्कूल बैग रखकर चल रहे हैं। आगे के वाहन ठीक से दिखाई न देने के बाद भी ड्राइविंग करते रहते हैं। अधिक कमाई के चक्कर में वाहन में स्कूली बच्चों को भूसे की तरह भरा जाता है। कई बच्चे तो कंधे पर बस्ते का बोझे होने के बाद भी वाहन की राड पकड़कर लटकते दिखाई देते हैं।
विज्ञापन
हाटा कोतवाली क्षेत्र के ढाढ़ा, सुकरौली, महुआरी, बंचरा,अजीजनगर, मथौली सहित अन्य इलाकों में 50 से अधिक छोटे-बडे़ पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूल हैं। इनमें कई ऐसे हैं, जहां अधिक कमाई के चक्कर में अपनी वैन तो एक होती है, लेकिन दिन भर सवारियां ढोने वाले वाहन स्कूल में लगे होते हैं। इसके चलते स्कूल संचालकों को कभी कभी ही अपनी एक वैन की फि टनेस, वह भी कागजों में ही करानी पड़ती है। इसके अलावा अन्य वाहनों से उनका कमीशन तय हो जाता है। अपने कमीशन की भरपाई करने के लिए वाहन चालक भी क्षमता से अधिक बच्चे ढोने से इंकार नहीं करते।
विज्ञापन
यही वजह है कि अक्सर ओवरलोड स्कूली वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं और मासूम बच्चों की जान पर बन आती है। इसी तरह स्कूल वैन अथवा वाहन का चालक कौन है और उसका पता क्या है, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस है भी कि नहीं इस तरह जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं देते।
सुकरौली क्षेत्र के पैकौली गांव के निवासी सूर्यभान मिश्र कहते हैं हम बच्चों को स्कूल की जिम्मेदारी पर भेजते है। इसलिए प्रबंधन को चाहिए कि वह बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान दे। सुकरौली क्षेत्र के गांव परसिया निवासी विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन यदि बच्चों की सुरक्षा में अनदेखी करते हैं तो कम से कम एआरटीओ और पुलिस को स्कूल में लगे वाहनों की सुरक्षा को लेकर अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक होना चाहिए।
इस संबंध में सीओ कसया राघवेंद्र चतुर्वेदी का कहना है कि सभी विद्यालयों को सूचना दे दी गई है कि वे अपने वाहन एवं चालक की जानकारी उपलब्ध कराएं। जल्द ही मुहिम चलाकर कार्रवाई की जाएगी।