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कप्तानगंज एसओ को अभिरक्षा में लिया
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Wed, 10 Feb 2016 11:25 PM IST
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कसया। कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद भी काफी समय से अनुपस्थित चल रहे एसओ कप्तानगंज जैसराज यादव को कोर्ट के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में लेकर खड़ा करा दिया गया। करीब चार बजे बेल होने और 20 हजार रुपये की जमानत दाखिल करने पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा से छोड़ा गया।
वादी चंद्रशेखर के अधिवक्ता शेषनाथ द्विवेदी और राजेश तिवारी ने बताया कि करीब चार साल पहले एसीजेएम न्यायालय कसया में वाद दाखिल हुआ था। आशीष चौरसिया की कोर्ट में दाखिल परिवाद चंद्रशेखर शुक्ल बनाम जैसराज और राजेश बनाम जैसराज के मामले में एसओ को कोर्ट ने हाजिर होने के लिए कहा था, लेकिन उपस्थित नहीं होने पर एसओ जैसराज के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर दिया था।
इसके बाद भी काफी समय तक उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए एसओ के खिलाफ 82 और 83 की कार्रवाई की। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए बुधवार को जैसराज कोर्ट में हाजिर हुए तो वह वर्दी में थे। कोर्ट के आदेश पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया। वर्दी सहित कोर्ट में पेश होने पर वकीलों ने विरोध जताया तो न्यायालय ने एसओ को स्टार, बेल्ट और कैप उतारने का निर्देश दिया।
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एसओ करीब चार घंटे तक कोर्ट की कस्टडी में रहे। करीब चार बजे 20 हजार की जमानत दाखिल करने के बाद हिरासत से छोड़ा गया। प्रकरण न्यायालय में अब भी विचाराधीन है।
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वादी चंद्रशेखर के अधिवक्ता शेषनाथ द्विवेदी और राजेश तिवारी ने बताया कि करीब चार साल पहले एसीजेएम न्यायालय कसया में वाद दाखिल हुआ था। आशीष चौरसिया की कोर्ट में दाखिल परिवाद चंद्रशेखर शुक्ल बनाम जैसराज और राजेश बनाम जैसराज के मामले में एसओ को कोर्ट ने हाजिर होने के लिए कहा था, लेकिन उपस्थित नहीं होने पर एसओ जैसराज के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर दिया था।
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इसके बाद भी काफी समय तक उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए एसओ के खिलाफ 82 और 83 की कार्रवाई की। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए बुधवार को जैसराज कोर्ट में हाजिर हुए तो वह वर्दी में थे। कोर्ट के आदेश पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया। वर्दी सहित कोर्ट में पेश होने पर वकीलों ने विरोध जताया तो न्यायालय ने एसओ को स्टार, बेल्ट और कैप उतारने का निर्देश दिया।
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एसओ करीब चार घंटे तक कोर्ट की कस्टडी में रहे। करीब चार बजे 20 हजार की जमानत दाखिल करने के बाद हिरासत से छोड़ा गया। प्रकरण न्यायालय में अब भी विचाराधीन है।