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आग में सब कुछ राख, अब भोजन के भी लाले

Thu, 14 Apr 2016 11:23 PM IST
कुशीनगर
कुशीनगर Updated Thu, 14 Apr 2016 11:23 PM IST
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Everything in the fire ashes, now too afraid of food
हिरनही गांव में जिन लोगों के घर जल गए, वो खुले आसमान में रहने को विवश हैं। आग के लपटों में जले अपने घर को चिंतित होकर देखते रघुनाध। - फोटो : अमर उजाला
जटहां बाजार। हिरनही गांव में बीते मंगलवार को लगी आग की घटना में जिन लोगों के घर जल गए, उनमें से कुछ लोगों के समक्ष भोजन का संकट पैदा हो गया है। वह खुले आसमान में रहने के लिए तो विवश हैं ही, उनको प्रशासन की तरफ से दी गई राहत चेक की धनराशि नाकाफी साबित हो रही है।
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विशुनपुरा ब्लॉक के हिरनही गांव में बीते मंगलवार की दोपहर में चूल्हे की चिंगारी से 52 लोगों के घर जल गए थे। महज 20 मिनट के पूरा गांव शोर और चीख पुकार से सिहर उठा। घटना के वक्त हवा इतनी तेज थी कि आग के लपटों के आगे कोई भी घर से सामान नहीं निकाल पाया था। इस घटना में प्रभावित लोगों को प्रशासन की ओर से राहत चेक का वितरण तो किया गया, लेकिन उनके दुखों पर मरहम लगाने के लिए राहत चेक नाकाफी हैं।
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इस गांव में कुछ लड़कियों की शादी तय है, लेकिन लोगों को अभी सिर्फ दो वक्त के भोजन और तन ढकने की ही चिंता सता रही है। आग में जिन लोगों के घर जल गए हैं, उन परिवारों के लोग चिलचिलाती धूप में कपड़े आदि का छाजन तानकर रहने को विवश हैं। आग से प्रभावित लोग पेट की भूख शांत करने के लिए ग्राम प्रधान अतहर हुसैन की ओर से बनवाए जा रहे भोजन पर ही निर्भर हैं।
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स्थिति यह है कि लोगों के पास शरीर पर पहने गए कपड़ों को छोड़कर कोई दूसरा कपड़ा तक नहीं है। अपने जले घरों को देख कर इन लोगों के आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बृहस्पतिवार की सुबह गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में आग से प्रभावित लोगों के लिए भोजन बनाया जा रहा था। लोग अपने जले हुए घरों के मलबों को साफ करने में जुटे हुए थे, लेकिन तेज हवा में उड़ रही राख इस काम में भी परेशानी खड़ी कर रही है।

गांव के खेदन गोंड़ की बेटी अंगीरा की शादी 28 अप्रैल को होनी है। इसके लिए खेदन ने पिछले कई महीनों से एक- एक रुपये जोड़कर रखे हुए थे कि बिटिया की शादी धूमधाम से करेंगे। लेकिन आग ने सब कुछ समाप्त कर दिया। अशक्त जगदीश प्रसाद का भी आग में सब कुछ जल गया। इनके बेटे मोहन की शादी जुलाई महीने में होनी है।

भैंस बेचकर घर में रखे 50 हजार रुपये भी आग के लपटों में जल गए। बंधू राम ने दो महीने पहले बैंक से 45 हजार कर्ज लेकर किराना की दुकान खोली थी। इनका भरोसा था कि दुकान से जो कमाई होगी, उससे धीरे-धीरे करके बैंक का कर्ज चुकता कर देंगे, लेकिन आग ने दुकान को जला दिया।


अब बैंक का कर्ज चुकना को लेकर चिंता में डूबे हुए हैं। रघुनाथ भी बैंक से 60 हजार रुपये कर्ज लेकर गांव-गांव घूमकर साइकिल से कपड़ा बेचते थे, लेकिन आग ने इनका सब कुछ छीन लिया। भोला प्रसाद की बेटी उर्मिला की शादी भी होने वाली है। इसके लिए ये लोग शादी की तैयारी करनी शुरू कर दिए थे, विदाई के लिए रखा फर्नीचर सहित कई कीमती गहने, कपड़े सब कुछ आग में जल गए। गांव के रामआशीष और तूफानी के घर भी लड़की की शादी होने वाली थी।
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