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सीबीआई की जांच अंतिम चरण में पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो/कुशीनगर
Updated Tue, 27 Oct 2015 11:46 PM IST
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खड्डा। सीबीआई टीम की ओर से की जा रही मनरेगा घोटाले के दूसरे केस की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। ग्राम पंचायतों में बिना नियम के करोड़ों रुपये के घोटाले में सीबीआई ने कई तत्कालीन जिला स्तरीय अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, कर्मचारी, ग्राम प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक सहित जिला पंचायत के रसूखदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
हाईकोर्ट की देखरेख में चल रही जांच में सातवीं प्रगति रिपोर्ट नवंबर माह में कोर्ट में जांच एजेंसी को दाखिल करना है। सूत्रों के मुताबिक शीघ्र ही सीबीआई टीम जिले में आने वाली है।
कुशीनगर जिले के खड्डा तहसील के 25 से अधिक ग्राम पंचायतों के बैंक एकाउंट से बेयरर चेक और कूटरचित तरीके से तत्कालीन ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी के साथ सांठगांठ कर मनरेगा योजना की रकम निकाल कर हड़प लिया गया था। आरोप है कि मनरेगा के धन के बंदरबांट में जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी शामिल थे।
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सूत्रों का कहना है कि मनरेगा योजना में धन का बंदरबांट करने वालों की हैसियत अचानक बढ़ गई तो इसकी शिकायत हुई।
हालांकि उस समय मामले को दबाने का काफी प्रयास हुआ, लेकिन जब जांच मनरेगा के क्वालिटी मॉनिटर और पूर्व आईएएस विनोद शंकर चौबे के हाथ में पहुंची तो वह स्थलीय निरीक्षण करने कुशीनगर आए।
उन्होंने योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गाइड लाइन का उल्लंघन होने की तस्दीक कर शासन को सक्षम एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
तत्कालीन सरकार में तो मामला दब गया, लेकिन सूबे की वर्तमान सरकार के आदेश पर 17 जून 2012 को खड्डा थाने में कई ग्राम प्रधान और अन्य पर धोखाधड़ी, साजिश, गबन, कूटरचना आदि आरोपों में केस दर्ज हुआ।
जनहित याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने प्रकरण की सीबीआई जांच का आदेश दिया। खड्डा विकास खंड के रोहुआ पुल के दरकने के मामले की जांच कर सीबीआई ने आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। इसमें सात आरोपी जमानत पर बाहर हैं। हर तीन महीने पर केस की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करनी पड़ती है।
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हाईकोर्ट की देखरेख में चल रही जांच में सातवीं प्रगति रिपोर्ट नवंबर माह में कोर्ट में जांच एजेंसी को दाखिल करना है। सूत्रों के मुताबिक शीघ्र ही सीबीआई टीम जिले में आने वाली है।
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कुशीनगर जिले के खड्डा तहसील के 25 से अधिक ग्राम पंचायतों के बैंक एकाउंट से बेयरर चेक और कूटरचित तरीके से तत्कालीन ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी के साथ सांठगांठ कर मनरेगा योजना की रकम निकाल कर हड़प लिया गया था। आरोप है कि मनरेगा के धन के बंदरबांट में जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी शामिल थे।
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सूत्रों का कहना है कि मनरेगा योजना में धन का बंदरबांट करने वालों की हैसियत अचानक बढ़ गई तो इसकी शिकायत हुई।
हालांकि उस समय मामले को दबाने का काफी प्रयास हुआ, लेकिन जब जांच मनरेगा के क्वालिटी मॉनिटर और पूर्व आईएएस विनोद शंकर चौबे के हाथ में पहुंची तो वह स्थलीय निरीक्षण करने कुशीनगर आए।
उन्होंने योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गाइड लाइन का उल्लंघन होने की तस्दीक कर शासन को सक्षम एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
तत्कालीन सरकार में तो मामला दब गया, लेकिन सूबे की वर्तमान सरकार के आदेश पर 17 जून 2012 को खड्डा थाने में कई ग्राम प्रधान और अन्य पर धोखाधड़ी, साजिश, गबन, कूटरचना आदि आरोपों में केस दर्ज हुआ।
जनहित याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने प्रकरण की सीबीआई जांच का आदेश दिया। खड्डा विकास खंड के रोहुआ पुल के दरकने के मामले की जांच कर सीबीआई ने आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। इसमें सात आरोपी जमानत पर बाहर हैं। हर तीन महीने पर केस की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करनी पड़ती है।