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जेल जाने के बाद भी नहीं हुई विभागीय कार्रवाई
kushinagar
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:02 PM IST
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पडरौना। एनआरएचएम घोटाले में आरोपी रहे सीएमओ कार्यालय के एक चर्चित फार्मासिस्ट के दो-दो बार गाजियाबाद की जेल में बंद होने के बावजूद विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। अलबत्ता सीएमओ ने मेहरबानी दिखाते हुए इस फार्मासिस्ट को अपने कार्यालय के सीएमएसडी स्टोर यानी दवा भंडार का अघोषित रूप से सर्वेसर्वा बना दिया है।
पडरौना क्षेत्र के भिस्वा सरकारी गांव के निवासी राणा प्रताप राय की तरफ से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के बाद आरोपी फार्मासिस्ट अशोक कुमार यादव के जेल में बंद होने की जानकारी मिली है। राणा प्रताप राय के मुताबिक गाजियाबाद के जिला कारागार के हवालात प्रभारी की तरफ से बताया गया है कि अभियुक्त अशोक कुमार यादव छह सितंबर 2016 को उनके कारागार में निरुद्ध हुआ। सीबीआई गाजियाबाद न्यायालय के विशेष न्यायाधीश से रिहाई का आदेश मिलने के बाद 17 सितंबर 2016 को कारागार से रिहा कर दिया गया। हवालात प्रभारी ने यह भी बताया है कि आरोपी इससे पूर्व 12 जुलाई 2013 को भी इस जेल में निरुद्ध हुआ था। उस समय भी सीबीआई गाजियाबाद न्यायालय के विशेष न्यायाधीश से मिले रिहाई आदेश के अनुपालन में 26 सितंबर 2013 को जेल से रिहा किया गया था। इस फार्मासिस्ट के दो-दो बार जेल में बंद रहने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा आरोपी पर पूरी तरह मेहरबान दिख रहा है। राणा प्रताप राय का आरोप है कि फार्मासिस्ट के विरुद्ध सीएमओ की तरफ से अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है, अलबत्ता दवा भंडार की पूरी जिम्मेदारी एक बार फिर अघोषित रूप से सौंप दी गई है।
कोट
आरोपी फार्मासिस्ट अशोक कुमार यादव के जेल जाते ही उसका निलंबन स्वत: हो गया था और जेल से छूटकर आने के बाद न्यायालय ने रिलीव भी कर दिया। इसलिए विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
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-डॉ. अखिलेश कुमार, सीएमओ।
कोट
सीएमओ ने बताया था कि आरोपी फार्मासिस्ट जमानत कराकर आया है। इस बारे में कोई भी कार्रवाई सीएमओ को करनी है। जेल से लौटने वाले किसी भी कर्मचारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। आरोपी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हुई या नहीं और दवा भंडार की जिम्मेदारी दिए जाने के संबंध में सीएमओ से पूछा जाएगा।
-शम्भु कुमार, डीएम ।
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पडरौना क्षेत्र के भिस्वा सरकारी गांव के निवासी राणा प्रताप राय की तरफ से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के बाद आरोपी फार्मासिस्ट अशोक कुमार यादव के जेल में बंद होने की जानकारी मिली है। राणा प्रताप राय के मुताबिक गाजियाबाद के जिला कारागार के हवालात प्रभारी की तरफ से बताया गया है कि अभियुक्त अशोक कुमार यादव छह सितंबर 2016 को उनके कारागार में निरुद्ध हुआ। सीबीआई गाजियाबाद न्यायालय के विशेष न्यायाधीश से रिहाई का आदेश मिलने के बाद 17 सितंबर 2016 को कारागार से रिहा कर दिया गया। हवालात प्रभारी ने यह भी बताया है कि आरोपी इससे पूर्व 12 जुलाई 2013 को भी इस जेल में निरुद्ध हुआ था। उस समय भी सीबीआई गाजियाबाद न्यायालय के विशेष न्यायाधीश से मिले रिहाई आदेश के अनुपालन में 26 सितंबर 2013 को जेल से रिहा किया गया था। इस फार्मासिस्ट के दो-दो बार जेल में बंद रहने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा आरोपी पर पूरी तरह मेहरबान दिख रहा है। राणा प्रताप राय का आरोप है कि फार्मासिस्ट के विरुद्ध सीएमओ की तरफ से अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है, अलबत्ता दवा भंडार की पूरी जिम्मेदारी एक बार फिर अघोषित रूप से सौंप दी गई है।
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आरोपी फार्मासिस्ट अशोक कुमार यादव के जेल जाते ही उसका निलंबन स्वत: हो गया था और जेल से छूटकर आने के बाद न्यायालय ने रिलीव भी कर दिया। इसलिए विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
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-डॉ. अखिलेश कुमार, सीएमओ।
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सीएमओ ने बताया था कि आरोपी फार्मासिस्ट जमानत कराकर आया है। इस बारे में कोई भी कार्रवाई सीएमओ को करनी है। जेल से लौटने वाले किसी भी कर्मचारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। आरोपी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हुई या नहीं और दवा भंडार की जिम्मेदारी दिए जाने के संबंध में सीएमओ से पूछा जाएगा।
-शम्भु कुमार, डीएम ।