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डकैतों से मुठभेड़ में एसओ सहित छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:28 PM IST
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तमकुहीरोड , कुशीनगर। सेवरही सहित जनपद के अन्य हिस्सों में भी पिछले 24 वर्षों से पुलिस विभाग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाता है। इस दिन को शहीद दिवस में रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है, क्योंकि 24 वर्ष पहले इसी दिन पचरुखिया में डकैतों से मुठभेड़ में तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय सहित पुलिस के छह जवान शहीद हो गए थे।
30 अगस्त, 1994 से पहले जनपद के सेवरही, तरयासुजान, विशुनपुरा, पटहेरवा, बरवापट्टी, कसया, तुर्कपटटी, हाटा, अहिरौली, कप्तानगंज, रामकोला, नेबुआ नौरंगिया, जटहां बाजार और खड्डा थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती थी। 30 अगस्त, 1994 को जब यह त्योहार मनाया जा रहा था, उसी दिन पुलिस को खबर मिली कि डकैत किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए योजना बना रहे हैं। उसके बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया और तत्कालीन एसपी के निर्देश पर तरयासुजान थाने के एसओ अनिल पांडेय की अगुवाई में पुलिस को भेज दिया गया।
पुलिस के जवानों का दल बिहार बार्डर पर पचरुखिया गांव के निकट बांसी नदी के किनारे बरवां गांव जा रहा था। उसी समय डकैतों को नाव से आ रही पुलिस के बारे में भनक लग गई और पुलिस टीम पर हमला करने लगे। जवाब में पुलिसवालों ने भी फायरिंग की, लेकिन इस मुठभेड़ में तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव, आरक्षी नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव और परशुराम गुप्ता को गोली लगी, जिससे उन पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। इसी वजह से यहां का पुलिस महकमा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाता है। पुलिसकर्मी इस दिन को शहादत दिवस के रूप में मनाते हैं।
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इस संबंध में तमकुहीराज के सीओ जनार्दन तिवारी और सेवरही थाने के एसओ श्रीप्रकाश यादव का कहना है कि कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी पूर्वक फर्ज का निर्वहन करते हुए पुलिस के जवान शहीद हुए थे। उन पर पुलिस महकमा को नाज है।
30 अगस्त, 1994 से पहले जनपद के सेवरही, तरयासुजान, विशुनपुरा, पटहेरवा, बरवापट्टी, कसया, तुर्कपटटी, हाटा, अहिरौली, कप्तानगंज, रामकोला, नेबुआ नौरंगिया, जटहां बाजार और खड्डा थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती थी। 30 अगस्त, 1994 को जब यह त्योहार मनाया जा रहा था, उसी दिन पुलिस को खबर मिली कि डकैत किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए योजना बना रहे हैं। उसके बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया और तत्कालीन एसपी के निर्देश पर तरयासुजान थाने के एसओ अनिल पांडेय की अगुवाई में पुलिस को भेज दिया गया।
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पुलिस के जवानों का दल बिहार बार्डर पर पचरुखिया गांव के निकट बांसी नदी के किनारे बरवां गांव जा रहा था। उसी समय डकैतों को नाव से आ रही पुलिस के बारे में भनक लग गई और पुलिस टीम पर हमला करने लगे। जवाब में पुलिसवालों ने भी फायरिंग की, लेकिन इस मुठभेड़ में तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव, आरक्षी नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव और परशुराम गुप्ता को गोली लगी, जिससे उन पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। इसी वजह से यहां का पुलिस महकमा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाता है। पुलिसकर्मी इस दिन को शहादत दिवस के रूप में मनाते हैं।
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इस संबंध में तमकुहीराज के सीओ जनार्दन तिवारी और सेवरही थाने के एसओ श्रीप्रकाश यादव का कहना है कि कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी पूर्वक फर्ज का निर्वहन करते हुए पुलिस के जवान शहीद हुए थे। उन पर पुलिस महकमा को नाज है।