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डीआईओएस कार्यालय का लिपिक घूस लेते गिरफ्तार
Updated Wed, 14 Jun 2017 06:31 PM IST
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कुशीनगर। एंटी करप्शन गोरखपुर की टीम ने बुधवार को डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत लिपिक अबुल हसन अंसारी को 20 हजार रुपये घूस लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया। दोपहर में पडरौना कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने के बाद टीम ने लिपिक को कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई से सरकारी महकमों व शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है।
उदित नारायण इंटर कालेज में कामर्स विषय के अध्यापक रविंद्र मल्ल के विनियमितिकरण से संबंधित एक पत्रावली पिछले पांच साल से डीआईओएस कार्यालय में लंबित है। अगले वर्ष ही ये अध्यापक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। विनियमितिकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने पर इन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले तमाम लाभ से वंचित होना पड़ेगा। परेशान अध्यापक कई बार दफ्तर का चक्कर काट चुके थे, लेकिन रुपये नहीं देने की वजह से कार्य नहीं हो पा रहा था। रविंद्र मल्ल के भतीजे ने एंटी करप्शन टीम गोरखपुर से इसकी शिकायत की थी। टीम ने भ्रष्टाचार के आरोप से संबंधित सुबूत मांगा था। कहा जा रहा है कि कुछ दिन पहले शिकायतकर्ता ने 500 रुपये देकर एक वीडियो क्लीप बनाकर इस टीम को सौंपा था। इसके बाद बुधवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे यह टीम जिला मुख्यालय पहुंची और डीएम को मामले की जानकारी देते हुए सरकारी गवाह के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी मांगे गए। डीएम ने अर्थ एवं संख्या अधिकारी मुहम्मद नाजिर और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सुनहरी लाल यादव को टीम के साथ भेजा। डीआईओएस कार्यालय के बाहर सादी वर्दी में यह टीम खड़ी हो गई और अध्यापक के भतीजे के हाथों विशेष प्रकार के केमिकल लगे दो-दो हजार के 10 नोट (कुल 20 हजार रुपये) लिपिक को देने के लिए भेजा। लिपिक अबुल हसन अंसारी ने जैसे ही इन नोट को पकड़ा, बाहर खड़ी टीम ने उन्हें रुपयों के साथ पकड़ लिया और तत्काल वहां से लेकर पडरौना कोतवाली आ गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से दफ्तर में खलबली मच गई। जानकारी होते ही शिक्षा विभाग से जुड़े तमाम लोग पडरौना कोतवाली पहुंच गए।
एंटी करप्शन की टीम में इंस्पेक्टर बब्बन यादव के अलावा शेषनाथ सिंह, मुहम्मद रफीक, चंद्रभान मिश्र, शैलेंद्र सिंह व सत्येंद्र रायशामिल थे। इंस्पेक्टर बब्बन यादव के अनुसार शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। लिपिक पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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उदित नारायण इंटर कालेज में कामर्स विषय के अध्यापक रविंद्र मल्ल के विनियमितिकरण से संबंधित एक पत्रावली पिछले पांच साल से डीआईओएस कार्यालय में लंबित है। अगले वर्ष ही ये अध्यापक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। विनियमितिकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने पर इन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले तमाम लाभ से वंचित होना पड़ेगा। परेशान अध्यापक कई बार दफ्तर का चक्कर काट चुके थे, लेकिन रुपये नहीं देने की वजह से कार्य नहीं हो पा रहा था। रविंद्र मल्ल के भतीजे ने एंटी करप्शन टीम गोरखपुर से इसकी शिकायत की थी। टीम ने भ्रष्टाचार के आरोप से संबंधित सुबूत मांगा था। कहा जा रहा है कि कुछ दिन पहले शिकायतकर्ता ने 500 रुपये देकर एक वीडियो क्लीप बनाकर इस टीम को सौंपा था। इसके बाद बुधवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे यह टीम जिला मुख्यालय पहुंची और डीएम को मामले की जानकारी देते हुए सरकारी गवाह के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी मांगे गए। डीएम ने अर्थ एवं संख्या अधिकारी मुहम्मद नाजिर और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सुनहरी लाल यादव को टीम के साथ भेजा। डीआईओएस कार्यालय के बाहर सादी वर्दी में यह टीम खड़ी हो गई और अध्यापक के भतीजे के हाथों विशेष प्रकार के केमिकल लगे दो-दो हजार के 10 नोट (कुल 20 हजार रुपये) लिपिक को देने के लिए भेजा। लिपिक अबुल हसन अंसारी ने जैसे ही इन नोट को पकड़ा, बाहर खड़ी टीम ने उन्हें रुपयों के साथ पकड़ लिया और तत्काल वहां से लेकर पडरौना कोतवाली आ गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से दफ्तर में खलबली मच गई। जानकारी होते ही शिक्षा विभाग से जुड़े तमाम लोग पडरौना कोतवाली पहुंच गए।
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एंटी करप्शन की टीम में इंस्पेक्टर बब्बन यादव के अलावा शेषनाथ सिंह, मुहम्मद रफीक, चंद्रभान मिश्र, शैलेंद्र सिंह व सत्येंद्र रायशामिल थे। इंस्पेक्टर बब्बन यादव के अनुसार शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। लिपिक पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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