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बहन की हल्दी के दौरान भाई की मौत, मचा कोहराम
kushinagar
Updated Sat, 23 Jun 2018 11:39 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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दुदही। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के बांसगांव टोला गिदाहवा में शुक्रवार को रात बहन की हल्दी के दौरान खुशी में डीजे पर डांस कर रहे छोटा भाई की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। इस घटना से गांव में कोहराम मच गया। शनिवार सुबह बेटी की डोली विदा करने के कुछ देर बाद बेटे की अर्थी को कंधा दिया गया।
बांसगांव गिदाहवा निवासी सुरेंद्र चौहान की बेटी सुनीता की शादी शनिवार को तय थी। 21 जून को तिलकोत्सव था और 22 को हल्दी। शनिवार को बारात आनी थी। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। शुक्रवार की शाम को हल्दी के अवसर पर मंगल गीत का कार्यक्रम चल रहा था। रात करीब बजे सुरेंद्र का 20 वर्षीय बेटा राहुल गांव के कुछ दोस्तों व हम उम्र रिश्तेदारों के साथ दरवाजे पर लगे डीजे पर डांस कर रहा था। इसी दौरान राहुल का पैर वहां बिछाए गए नंगे तार पर पड़ गया। राहुल ने चप्पल भी नहीं रखी थी। नंगे तार पर पैर पड़ते ही वह चिपक गया। जब तक लोग तार तोड़कर बिजली का प्रवाह बंद करते वह गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन सीएचसी ले गए जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। शादी वाले घर में बेटे की मौत से कोहराम मच गया। शनिवार सुबह बिना विवाह की रस्म पूरा हुए बेटी को ससुराल विदा किया गया। फिर दरवाजे से बेटे को भी अंतिम विदाई दी गई। बांसी नदी के खैरवा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। एक तरफ जहां लोग दहेज या कई अन्य कारणों के चलते बहुओं को जलाकर मार देते हैं वहीं समाज में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया तरयासुजान क्षेत्र के भटवलिया गांव निवासी रामायण चौहान ने। जिनके बेटे की शादी तो तय समय पर नहीं हुई, लेकिन बहू के घर हुए हादसे में खुद को शामिल करते हुए शुभ-अशुभ व रस्मों की परवाह किए बिना बहू को बेटी की तरह अपने घर ले गए।
विशुनपुरा थाने के गांव बांसगांवा टोला गिदहवा निवासी सुरेंद्र चौहान की बेटी सुनीता की शादी तरयासुजान थाना क्षेत्र के भटवलिया निवासी रामायण चौहान के बेटे मनोज कुमार से तय थी। शनिवार को विवाह की तारीख थी। इससे पहले शुक्रवार की रात ही सुनीता के भाई राहुल की मौत दरवाजे पर डांस करने के दौरान करंट की चपेट में आने से हो गई। इस हादसे की खबर जब सुनीता की होने वाली ससुराल भटवलिया पहुंची तो रामायण चौहान ने बिना देर किए नए रिश्तेदार की न केवल खोज-खबर ली, बल्कि भोर में ही वे गिदहवा पहुंच गए। बिना किसी शुभ-अशुभ के फेर में पड़े रामायण ने होने वाली बहू सुनीता को अपने घर पहुंचा दिया। रामायण चौहान का कहना था कि जब शादी तय हो गई है तो वह हमारे घर की बहू है। रस्में तो कभी भी पूरी जाएगी।
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बांसगांव गिदाहवा निवासी सुरेंद्र चौहान की बेटी सुनीता की शादी शनिवार को तय थी। 21 जून को तिलकोत्सव था और 22 को हल्दी। शनिवार को बारात आनी थी। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। शुक्रवार की शाम को हल्दी के अवसर पर मंगल गीत का कार्यक्रम चल रहा था। रात करीब बजे सुरेंद्र का 20 वर्षीय बेटा राहुल गांव के कुछ दोस्तों व हम उम्र रिश्तेदारों के साथ दरवाजे पर लगे डीजे पर डांस कर रहा था। इसी दौरान राहुल का पैर वहां बिछाए गए नंगे तार पर पड़ गया। राहुल ने चप्पल भी नहीं रखी थी। नंगे तार पर पैर पड़ते ही वह चिपक गया। जब तक लोग तार तोड़कर बिजली का प्रवाह बंद करते वह गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन सीएचसी ले गए जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। शादी वाले घर में बेटे की मौत से कोहराम मच गया। शनिवार सुबह बिना विवाह की रस्म पूरा हुए बेटी को ससुराल विदा किया गया। फिर दरवाजे से बेटे को भी अंतिम विदाई दी गई। बांसी नदी के खैरवा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। एक तरफ जहां लोग दहेज या कई अन्य कारणों के चलते बहुओं को जलाकर मार देते हैं वहीं समाज में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया तरयासुजान क्षेत्र के भटवलिया गांव निवासी रामायण चौहान ने। जिनके बेटे की शादी तो तय समय पर नहीं हुई, लेकिन बहू के घर हुए हादसे में खुद को शामिल करते हुए शुभ-अशुभ व रस्मों की परवाह किए बिना बहू को बेटी की तरह अपने घर ले गए।
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विशुनपुरा थाने के गांव बांसगांवा टोला गिदहवा निवासी सुरेंद्र चौहान की बेटी सुनीता की शादी तरयासुजान थाना क्षेत्र के भटवलिया निवासी रामायण चौहान के बेटे मनोज कुमार से तय थी। शनिवार को विवाह की तारीख थी। इससे पहले शुक्रवार की रात ही सुनीता के भाई राहुल की मौत दरवाजे पर डांस करने के दौरान करंट की चपेट में आने से हो गई। इस हादसे की खबर जब सुनीता की होने वाली ससुराल भटवलिया पहुंची तो रामायण चौहान ने बिना देर किए नए रिश्तेदार की न केवल खोज-खबर ली, बल्कि भोर में ही वे गिदहवा पहुंच गए। बिना किसी शुभ-अशुभ के फेर में पड़े रामायण ने होने वाली बहू सुनीता को अपने घर पहुंचा दिया। रामायण चौहान का कहना था कि जब शादी तय हो गई है तो वह हमारे घर की बहू है। रस्में तो कभी भी पूरी जाएगी।
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