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Kushinagar News: भाई के लिए कुछ नहीं कर पाया...16 लाख के बाद मांगे गए थे और चार लाख
Mon, 23 Feb 2026 02:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:49 AM IST
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हरैया बुजुर्ग गांव में दरवाजे पर खेलता मृतक कृष्ण मोहन सिंह के छोटा बेटा आदित्य सिंह। संवाद
सिस्टम की बेरुखी से मौत को गले लगाने वाले शिक्षक के बड़े भाई अवधेश सिंह ने लगाया आरोप
पडरौना। पिता का साया उसके बच्चों के लिए पूरी दुनिया होती है, लेकिन जब वही साया सिस्टम की बेरुखी और मानसिक प्रताड़ना के चलते उठ जाए, तो पीछे सिर्फ अंधेरा रह जाता है। यह बात कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के गांव हरैया बुजुर्ग से जुड़ी है। हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या ने न केवल एक जीवन का अंत किया है, बल्कि उनके मासूम बच्चों के भविष्य को भी मझधार में छोड़ दिया है। आज उन बच्चों की पथराई आंखें घर की दहलीज पर अपने पिता का इंतजार तो कर रही हैं, पर शायद उन्हें यह नहीं पता कि जिस कंधे पर बैठकर उन्होंने दुनिया देखी थी, वह अब कभी नहीं लौटेगा। सिस्टम की बेरुखी से मौत को गले लगाने वाले शिक्षक के बड़े भाई अवधेश सिंह को मलाल है कि वह कृष्ण मोहन के लिए कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 लाख लेने के बाद चार लाख और मांगे गए थे।
मृतक के बड़े भाई अवधेश सिंह ने बताया कि उनका मझला भाई कृष्ण मोहन सिंह पिछले काफी समय से देवरिया जिले के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में सहायक अध्यापक की नौकरी को लेकर आर्थिक शोषण से जूझ रहे थे। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में बीएसए दफ्तर में कृष्ण मोहन सिंह के साथ ओंकार सिंह और अर्पणा तिवारी भी विद्यालय में सहायक अध्यापक की नौकरी के लिए पहुंचे थे। जहां पूर्व में नौकरी के लिए ली गई रकम के अलावा चार लाख रुपये और डिमांड की गई। इस पर कृष्ण मोहन सिंह ने नौकरी नहीं चाहिए, कहते हुए रकम लौटाने की बात कही तो मामला तूल पकड़ लिया और उनके खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी गई।
नौकरी के नाम पर उन्हें सिर्फ प्रताड़ना मिली, जब संघर्ष की शक्ति जवाब दे गई तो कृष्ण मोहन ने मौत को गले लगाना ही अंतिम विकल्प समझा। मृतक कृष्ण मोहन के पीछे उनकी पत्नी गुड़िया सिंह और 10 वर्षीय बेटी आस्था सिंह व पांच वर्षीय बेटा आदित्य सिंह और परिवार के लोग हैं। जिनके पास अब सिवाय आंसुओं के कुछ नहीं है। घर में आंगन में गूंजने वाली हंसी अब सन्नाटे में बदल गई है। इन मासूमों को शायद मौत का मतलब भी नहीं पता,वे बस अपनी मां को रोता देख सहम गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि इन मासूमों की पढ़ाई, इनका पालन-पोषण और इनके टूटे हुए सपनों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
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गोरखपुर में कृष्ण मोहन सिंह ने की आत्महत्या
कृष्ण मोहन सिंह गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज मोहल्ले में रहते थे। शुक्रवार को देवरिया बीएसए दफ्तर में हुई वार्ता के बाद वह गोरखपुर पहुंचे ,जहां रात में मौत हो गले लगा लिया। मामले में मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह ने पुलिस को तीन पेज में तहरीर सौंपकर बीएसए देवरिया व दफ्तर के बाबू सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
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दुबई से पहुंचे बड़े भाई अवधेश
मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बड़े भाई अवधेश सिंह दुबई में इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी शनिवार की सुबह ही हो गई थी। रात में करीब 12:45 बजे फ्लाइट पकड़ी और रविवार सुबह 6:05 बजे लखनऊ पहुंचे। वहां से निजी कार से 12:20 बजे घर आए।
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मुख्यमंत्री को संबोधित चार पेज का लिखा है सुसाइड नोट
कृष्ण मोहन सिंह ने मौत को गले लगाने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से चार पेज का सुसाइड नोट भी लिखा है। उसमें देवरिया जिले के बीएसए के बाबू पर अर्पणा तिवारी, ओंकार सिंह और कृष्ण मोहन सिंह से 16-16 लाख रुपये नौकरी के लिए घूस लेने का जिक्र किया गया है। सुसाइड नोट में मौत का जिम्मेदार बीएसए दफ्तर के बाबू को बताया है। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय को विवादित बताते हुए मोबाइल में वीडियो होने का भी जिक्र किया है। चार पेज में लिखे सुसाइड नोट में पूरा घटनाक्रम दर्ज है।
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मेरे सिंदूर की कीमत...कुछ नहीं उन लोगों के लिए
मेरे सिंदूर की कीमत तो उन लोगों के लिए कुछ नहीं होगी, लेकिन मेरे बच्चों ने अपना पूरा संसार खो दिया है। मुझे इंसाफ चाहिए, ताकि किसी और कृष्ण मोहन को ऐसे न मरना पड़े। दिल को झकझोर देने वाली यह बात मासूम बच्चे को गले से चिपकाए मृतक की पत्नी गुड़िया ने कही। अब इन बच्चों का क्या होगा। इन्होंने तो अभी दुनिया भी देखी नहीं थी। इनके पिता का साया छीनने वालों को क्या कभी चैन की नींद आएगी। प्रशासन तो फाइलें बंद कर देगा,पर मेरा घर तो हमेशा के लिए उजड़ गया। अब मैं इन बच्चों की रोटी कहां से खिलाऊंगी और इनकी पढ़ाई कैसे कराऊंगी।
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मेरा सहारा छीन लिया
बुढ़ापे में लाठी बनता है बेटा, पर मेरी लाठी ही तोड़ दी गई। ये दर्द भरे जुबान कृष्ण मोहन सिंह के बुजुर्ग पिता रामदरश सिंह के थे। रविवार को अंतिम संस्कार के जब घर पर कुछ नाते रिश्तेदार के साथ बैठे थे,उस पल की है। कहा कि जिसे पाल पोसकर बड़ा किया था कि वह एक दिन मेरा सहारा बनेगा। लेकिन मुझे क्या पता था कि मुझे ही अपने जवान बेटे की अर्थी उठानी पड़ेगी। उसे इतना डराया सताया गया कि उसके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। कहा कि जिले बेटे को कल तक खुश देख रहा था,आज उसकी तस्वीर देखनी पड़ रही है। क्या यही इंसाफ है। उन लोगों ने मेरे बेटे को नहीं,मेरे पूरे खानदान को जिंदा मार दिया है।
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पडरौना। पिता का साया उसके बच्चों के लिए पूरी दुनिया होती है, लेकिन जब वही साया सिस्टम की बेरुखी और मानसिक प्रताड़ना के चलते उठ जाए, तो पीछे सिर्फ अंधेरा रह जाता है। यह बात कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के गांव हरैया बुजुर्ग से जुड़ी है। हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या ने न केवल एक जीवन का अंत किया है, बल्कि उनके मासूम बच्चों के भविष्य को भी मझधार में छोड़ दिया है। आज उन बच्चों की पथराई आंखें घर की दहलीज पर अपने पिता का इंतजार तो कर रही हैं, पर शायद उन्हें यह नहीं पता कि जिस कंधे पर बैठकर उन्होंने दुनिया देखी थी, वह अब कभी नहीं लौटेगा। सिस्टम की बेरुखी से मौत को गले लगाने वाले शिक्षक के बड़े भाई अवधेश सिंह को मलाल है कि वह कृष्ण मोहन के लिए कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 लाख लेने के बाद चार लाख और मांगे गए थे।
मृतक के बड़े भाई अवधेश सिंह ने बताया कि उनका मझला भाई कृष्ण मोहन सिंह पिछले काफी समय से देवरिया जिले के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में सहायक अध्यापक की नौकरी को लेकर आर्थिक शोषण से जूझ रहे थे। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में बीएसए दफ्तर में कृष्ण मोहन सिंह के साथ ओंकार सिंह और अर्पणा तिवारी भी विद्यालय में सहायक अध्यापक की नौकरी के लिए पहुंचे थे। जहां पूर्व में नौकरी के लिए ली गई रकम के अलावा चार लाख रुपये और डिमांड की गई। इस पर कृष्ण मोहन सिंह ने नौकरी नहीं चाहिए, कहते हुए रकम लौटाने की बात कही तो मामला तूल पकड़ लिया और उनके खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी गई।
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नौकरी के नाम पर उन्हें सिर्फ प्रताड़ना मिली, जब संघर्ष की शक्ति जवाब दे गई तो कृष्ण मोहन ने मौत को गले लगाना ही अंतिम विकल्प समझा। मृतक कृष्ण मोहन के पीछे उनकी पत्नी गुड़िया सिंह और 10 वर्षीय बेटी आस्था सिंह व पांच वर्षीय बेटा आदित्य सिंह और परिवार के लोग हैं। जिनके पास अब सिवाय आंसुओं के कुछ नहीं है। घर में आंगन में गूंजने वाली हंसी अब सन्नाटे में बदल गई है। इन मासूमों को शायद मौत का मतलब भी नहीं पता,वे बस अपनी मां को रोता देख सहम गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि इन मासूमों की पढ़ाई, इनका पालन-पोषण और इनके टूटे हुए सपनों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
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गोरखपुर में कृष्ण मोहन सिंह ने की आत्महत्या
कृष्ण मोहन सिंह गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज मोहल्ले में रहते थे। शुक्रवार को देवरिया बीएसए दफ्तर में हुई वार्ता के बाद वह गोरखपुर पहुंचे ,जहां रात में मौत हो गले लगा लिया। मामले में मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह ने पुलिस को तीन पेज में तहरीर सौंपकर बीएसए देवरिया व दफ्तर के बाबू सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
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दुबई से पहुंचे बड़े भाई अवधेश
मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बड़े भाई अवधेश सिंह दुबई में इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी शनिवार की सुबह ही हो गई थी। रात में करीब 12:45 बजे फ्लाइट पकड़ी और रविवार सुबह 6:05 बजे लखनऊ पहुंचे। वहां से निजी कार से 12:20 बजे घर आए।
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मुख्यमंत्री को संबोधित चार पेज का लिखा है सुसाइड नोट
कृष्ण मोहन सिंह ने मौत को गले लगाने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से चार पेज का सुसाइड नोट भी लिखा है। उसमें देवरिया जिले के बीएसए के बाबू पर अर्पणा तिवारी, ओंकार सिंह और कृष्ण मोहन सिंह से 16-16 लाख रुपये नौकरी के लिए घूस लेने का जिक्र किया गया है। सुसाइड नोट में मौत का जिम्मेदार बीएसए दफ्तर के बाबू को बताया है। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय को विवादित बताते हुए मोबाइल में वीडियो होने का भी जिक्र किया है। चार पेज में लिखे सुसाइड नोट में पूरा घटनाक्रम दर्ज है।
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मेरे सिंदूर की कीमत...कुछ नहीं उन लोगों के लिए
मेरे सिंदूर की कीमत तो उन लोगों के लिए कुछ नहीं होगी, लेकिन मेरे बच्चों ने अपना पूरा संसार खो दिया है। मुझे इंसाफ चाहिए, ताकि किसी और कृष्ण मोहन को ऐसे न मरना पड़े। दिल को झकझोर देने वाली यह बात मासूम बच्चे को गले से चिपकाए मृतक की पत्नी गुड़िया ने कही। अब इन बच्चों का क्या होगा। इन्होंने तो अभी दुनिया भी देखी नहीं थी। इनके पिता का साया छीनने वालों को क्या कभी चैन की नींद आएगी। प्रशासन तो फाइलें बंद कर देगा,पर मेरा घर तो हमेशा के लिए उजड़ गया। अब मैं इन बच्चों की रोटी कहां से खिलाऊंगी और इनकी पढ़ाई कैसे कराऊंगी।
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मेरा सहारा छीन लिया
बुढ़ापे में लाठी बनता है बेटा, पर मेरी लाठी ही तोड़ दी गई। ये दर्द भरे जुबान कृष्ण मोहन सिंह के बुजुर्ग पिता रामदरश सिंह के थे। रविवार को अंतिम संस्कार के जब घर पर कुछ नाते रिश्तेदार के साथ बैठे थे,उस पल की है। कहा कि जिसे पाल पोसकर बड़ा किया था कि वह एक दिन मेरा सहारा बनेगा। लेकिन मुझे क्या पता था कि मुझे ही अपने जवान बेटे की अर्थी उठानी पड़ेगी। उसे इतना डराया सताया गया कि उसके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। कहा कि जिले बेटे को कल तक खुश देख रहा था,आज उसकी तस्वीर देखनी पड़ रही है। क्या यही इंसाफ है। उन लोगों ने मेरे बेटे को नहीं,मेरे पूरे खानदान को जिंदा मार दिया है।

हरैया बुजुर्ग गांव में दरवाजे पर खेलता मृतक कृष्ण मोहन सिंह के छोटा बेटा आदित्य सिंह। संवाद

हरैया बुजुर्ग गांव में दरवाजे पर खेलता मृतक कृष्ण मोहन सिंह के छोटा बेटा आदित्य सिंह। संवाद

हरैया बुजुर्ग गांव में दरवाजे पर खेलता मृतक कृष्ण मोहन सिंह के छोटा बेटा आदित्य सिंह। संवाद

हरैया बुजुर्ग गांव में दरवाजे पर खेलता मृतक कृष्ण मोहन सिंह के छोटा बेटा आदित्य सिंह। संवाद