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कुशीनगर में तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कांक्लेव-2021 का समापन
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कुशीनगर में तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कांक्लेव-2021 का समापन
कसया। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में चल रहे तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कान्क्लेव-2021 का शुक्रवार को समापन हुआ। कान्क्लेव का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्तूबर को देश-विदेश के 17 बौद्ध भिक्षुओं को चीवर दान व श्रीलंका से आए भगवान बुद्ध के धातु अवशेष की विशेष-पूजा अर्चना से की थी।
शुक्रवार को कान्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ के अध्यक्ष शांतिमित्र ने कहा कि शांति, करुणा और मैत्री ही मानव कल्याण का मार्ग है। हम सबको मिलकर भगवान बुद्ध के संदेशों को फिर भारत की धरती से पूरी दुनिया में पहुंचाने का कार्य करना होगा। भगवान बुद्ध के मूल उपदेश मानव कल्याण सिद्धांत पर आधारित हैं। सभी धर्मों का लक्ष्य अच्छे शासन व समाज का निर्माण है। हमारे संस्थान का भी यही उद्देश्य है।
डीएम एस. राजलिंगम ने कहा इस बुद्धिस्ट कान्क्लेव से कुशीनगर की वैश्विक पहचान और बढ़ी है। कुशीनगर के बौद्धकालीन अन्य जुड़े स्थलों का विकास कराकर पर्यटन व संस्कृति को बढ़ाया जाएगा।
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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान त्रिपुरा की ओर से आए डॉ. अवधेश कुमार चौबे ने कहा कि बौद्ध दर्शन सभी धर्मों का समुच्चय है। भगवान बुद्ध की करुणा समस्त प्राणियों के लिए है। सरदार मंजीत सिंह ने कहा कि गुरुनानक देव ने भी नेपाल में रहकर बुद्ध के उपदेशों को दिया था। यदि हम एकजुट नहीं हुए तो देश कमजोर हो जाएगा। इसके अलावा भंते शीलरतन, कुप्पू स्वामी आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन प्राचार्य डॉ. अमृतांशु शुक्ल व भदंत आर्यवंश ने किया। अंत में आगंतुकों के प्रति डॉ. अंबिका प्रसाद त्रिपाठी ने आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर देवानंदवर्द्धन, तरुणेश बौद्ध, डॉ. राकेश सिंह, विजय विक्रम सिंह, यमुना प्रसाद, संत कुमार पाल, अनिल कुमार, पवन पांडेय, संजीव कुमार उपाध्याय, डॉ. कल्याण सिंह, अमरेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद थे।
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कसया। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में चल रहे तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कान्क्लेव-2021 का शुक्रवार को समापन हुआ। कान्क्लेव का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्तूबर को देश-विदेश के 17 बौद्ध भिक्षुओं को चीवर दान व श्रीलंका से आए भगवान बुद्ध के धातु अवशेष की विशेष-पूजा अर्चना से की थी।
शुक्रवार को कान्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ के अध्यक्ष शांतिमित्र ने कहा कि शांति, करुणा और मैत्री ही मानव कल्याण का मार्ग है। हम सबको मिलकर भगवान बुद्ध के संदेशों को फिर भारत की धरती से पूरी दुनिया में पहुंचाने का कार्य करना होगा। भगवान बुद्ध के मूल उपदेश मानव कल्याण सिद्धांत पर आधारित हैं। सभी धर्मों का लक्ष्य अच्छे शासन व समाज का निर्माण है। हमारे संस्थान का भी यही उद्देश्य है।
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डीएम एस. राजलिंगम ने कहा इस बुद्धिस्ट कान्क्लेव से कुशीनगर की वैश्विक पहचान और बढ़ी है। कुशीनगर के बौद्धकालीन अन्य जुड़े स्थलों का विकास कराकर पर्यटन व संस्कृति को बढ़ाया जाएगा।
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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान त्रिपुरा की ओर से आए डॉ. अवधेश कुमार चौबे ने कहा कि बौद्ध दर्शन सभी धर्मों का समुच्चय है। भगवान बुद्ध की करुणा समस्त प्राणियों के लिए है। सरदार मंजीत सिंह ने कहा कि गुरुनानक देव ने भी नेपाल में रहकर बुद्ध के उपदेशों को दिया था। यदि हम एकजुट नहीं हुए तो देश कमजोर हो जाएगा। इसके अलावा भंते शीलरतन, कुप्पू स्वामी आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन प्राचार्य डॉ. अमृतांशु शुक्ल व भदंत आर्यवंश ने किया। अंत में आगंतुकों के प्रति डॉ. अंबिका प्रसाद त्रिपाठी ने आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर देवानंदवर्द्धन, तरुणेश बौद्ध, डॉ. राकेश सिंह, विजय विक्रम सिंह, यमुना प्रसाद, संत कुमार पाल, अनिल कुमार, पवन पांडेय, संजीव कुमार उपाध्याय, डॉ. कल्याण सिंह, अमरेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद थे।