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सर्द हवाओं से बढ़ती जा रही है ठंड
kushinagar
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:36 PM IST
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अलाव तापते लोग।
- फोटो : amar ujala
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पडरौना।
सर्द हवाओं के साथ ठंड बढ़ती जा रही है। शनिवार को दूसरे दिन भी सुबह से ही शीतलहर शुरू हो गई। ठंड बढ़ने के कारण लोग जगह-जगह दुबके नजर आए। ठंड से बचने के लिए लोगों ने अलाव भी जलाया। ऊनी कपड़ों की दुकानों पर भीड़ लग गई। बच्चे और वृद्धजनों की इस ठंड से मुश्किलें बढ़ गई हैं। अस्पतालों में मरीज भी बढ़ने लगे हैं। जिले में शुक्रवार से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ है। शुक्रवार को तो दोपहर तक धूप हो जाने के बाद लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की थी लेकिन शनिवार को पूरे दिन धूप नहीं हुई। लोग जहां-तहां ठंड से बचने के लिए आग के पास बैठे दिखे। शीतलहर शुुरू होने के साथ ही बच्चों की परेशानी भी बढ़ गई है। वे विद्यालय जाते समय ठिठुरे हुए थे। सड़कों पर भीड़ जरूर रही पर सभी ठंड से परेशान दिख रहे थे। शनिवार को गर्म कपड़ों की दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई थी। ग्राहक ठेले-खोमचे से लगायत बड़े शोरूमों में भी अपने परिवार के सदस्यों के लिए स्वेटर, जैकेट सहित अन्य गर्म कपड़े खरीदते दिखे।
ठंड से बचने के लिए खुद ही किया अलाव का प्रबंध
दिसंबर का आधा महीना बीत चुका है लेकिन नगरपालिका प्रशासन की तरफ से अभी तक कहीं भी सार्वजनिक स्थल पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसी दशा में सार्वजनिक स्थलों या अन्य जगह लोग ठंड से बचने के लिए खुद ही रद्दी, लकड़ियां आदि रखकर आग जला रखे थे। कई जगह तो राहगीर और अन्य लोग चाय की दुकानों और होटलों में भट्ठियां पर हाथ गरम करते नजर आए।
अस्पतालों में लगने लगी भीड़
ठंड बढ़ते ही लोग कोल्ड डायरिया, खांसी सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ऐसे मरीजों की ज्यादा संख्या छोटे बच्चों की है। निजी अस्पताल हों या सरकारी, वहां ऐसे मरीज जाने लगे हैं।
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क्या कहते हैं डॉक्टर
संयुक्त जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार कहते हैं कि शीतलहर या ऐसे ठंड में अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से फालिज का अटैक भी हो सकता है। ऐसे लोग ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से लें। हर्ट स्ट्रोक का खतरा भी होता है। इसके अलावा कोल्ड डायरिया, सर्दी जुकाम, खांसी हो सकती है। ज्यादा देर तक ठंड में रहने से हाइपोथर्मिया नाम की बीमारी होने से जान भी जा सकती है। क्योंकि इस स्थिति में शरीर का तापमान काफी नीचे चला जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश वर्मा कहते हैं कि ठंड से बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होती है। उन्हें कोल्ड डायरिया, सर्दी-जुकाम और बुखार भी हो सकता है। ऐसी दशा में बच्चों को कुशल डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाना चाहिए।
दो जगह रैन बसेरा और 45 जगहों पर जलेगा अलाव
प्रति तहसील स्तर पर पांच लाख रुपये आवंटित
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना।
शुक्रवार से जिले में शीतलहर को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। राहगीरों, असुरक्षित व्यक्तियों और गरीब तबके के लोगों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने शनिवार को जिले में तहसीलवार पांच-पांच लाख रुपये आवंटित कर कंबल और अलाव जलाने के निर्देश दिए। इसके अलावा पडरौना और कसया में एक-एक रैन बसेरा बनाया जाएगा।
जिले के निराश्रित, असहाय और कमजोर वर्ग के असुरक्षित लोगों को इस कड़ाके की ठंड से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने जिले में कंबल खरीद के लिए सभी तहसीलों को पांच-पांच लाख रुपये आवंटित किए हैं। यह जानकारी प्रभारी डीएम कृष्ण लाल तिवारी ने दी। बताया कि खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान सपहां फाजिलनगर से 8220 कंबल खरीद कर प्रत्येक तहसीलों को 1370 कंबल गरीबों में बांटने के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा पडरौना बस स्टेशन और कसया बस स्टेशन के पास एक-एक रैन बसेेेरा बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
गरीब परिवारों पर भारी पड़ रही ठंड
कुबेरस्थान। क्षेत्र के गरीब परिवारों पर शीतलहर भारी पड़ने लगी है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के चौराहों पर भी अलाव का कोई प्रबंध नहीं है। क्षेत्र में ऐसे परिवारों की कमी नहीं है, जिनके घरों में आज भी चूल्हा उसी दिन जलता है, जिस दिन परिवार का कोई सदस्य मेहनत मजदूरी करके घर के लिए कुछ लाता है। ऐसे परिवारों पर ये ठंड भारी पड़ने लगी है। क्योंकि इस ठंड में उन्हें काम भी नहीं मिल रहा है। बतरौली, कल्यान छापर, सिंहनजोड़ी, सिंगहां, अमवा, फागूपर विशुनपुरा, गंगौली, भटवलिया, सखवनिया, धरनी छापर, शिवपुर, बढ़वलिया, बरहज आदि गांवों के गरीब परिवारों के सदस्य अपने दरवाजों पर घास-फूस का अलाव जलाकर ठिठुरते हुए अपनी रातें और दिन गुजारने को विवश हैं। इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी और दिनचर्या पर पड़ रहा है। उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि अगर लगातार कुछ दिनों तक ऐसी ही ठंडक पड़ती रही तो उन परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
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सर्द हवाओं के साथ ठंड बढ़ती जा रही है। शनिवार को दूसरे दिन भी सुबह से ही शीतलहर शुरू हो गई। ठंड बढ़ने के कारण लोग जगह-जगह दुबके नजर आए। ठंड से बचने के लिए लोगों ने अलाव भी जलाया। ऊनी कपड़ों की दुकानों पर भीड़ लग गई। बच्चे और वृद्धजनों की इस ठंड से मुश्किलें बढ़ गई हैं। अस्पतालों में मरीज भी बढ़ने लगे हैं। जिले में शुक्रवार से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ है। शुक्रवार को तो दोपहर तक धूप हो जाने के बाद लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की थी लेकिन शनिवार को पूरे दिन धूप नहीं हुई। लोग जहां-तहां ठंड से बचने के लिए आग के पास बैठे दिखे। शीतलहर शुुरू होने के साथ ही बच्चों की परेशानी भी बढ़ गई है। वे विद्यालय जाते समय ठिठुरे हुए थे। सड़कों पर भीड़ जरूर रही पर सभी ठंड से परेशान दिख रहे थे। शनिवार को गर्म कपड़ों की दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई थी। ग्राहक ठेले-खोमचे से लगायत बड़े शोरूमों में भी अपने परिवार के सदस्यों के लिए स्वेटर, जैकेट सहित अन्य गर्म कपड़े खरीदते दिखे।
ठंड से बचने के लिए खुद ही किया अलाव का प्रबंध
दिसंबर का आधा महीना बीत चुका है लेकिन नगरपालिका प्रशासन की तरफ से अभी तक कहीं भी सार्वजनिक स्थल पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसी दशा में सार्वजनिक स्थलों या अन्य जगह लोग ठंड से बचने के लिए खुद ही रद्दी, लकड़ियां आदि रखकर आग जला रखे थे। कई जगह तो राहगीर और अन्य लोग चाय की दुकानों और होटलों में भट्ठियां पर हाथ गरम करते नजर आए।
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अस्पतालों में लगने लगी भीड़
ठंड बढ़ते ही लोग कोल्ड डायरिया, खांसी सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ऐसे मरीजों की ज्यादा संख्या छोटे बच्चों की है। निजी अस्पताल हों या सरकारी, वहां ऐसे मरीज जाने लगे हैं।
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क्या कहते हैं डॉक्टर
संयुक्त जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार कहते हैं कि शीतलहर या ऐसे ठंड में अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से फालिज का अटैक भी हो सकता है। ऐसे लोग ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से लें। हर्ट स्ट्रोक का खतरा भी होता है। इसके अलावा कोल्ड डायरिया, सर्दी जुकाम, खांसी हो सकती है। ज्यादा देर तक ठंड में रहने से हाइपोथर्मिया नाम की बीमारी होने से जान भी जा सकती है। क्योंकि इस स्थिति में शरीर का तापमान काफी नीचे चला जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश वर्मा कहते हैं कि ठंड से बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होती है। उन्हें कोल्ड डायरिया, सर्दी-जुकाम और बुखार भी हो सकता है। ऐसी दशा में बच्चों को कुशल डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाना चाहिए।
दो जगह रैन बसेरा और 45 जगहों पर जलेगा अलाव
प्रति तहसील स्तर पर पांच लाख रुपये आवंटित
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना।
शुक्रवार से जिले में शीतलहर को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। राहगीरों, असुरक्षित व्यक्तियों और गरीब तबके के लोगों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने शनिवार को जिले में तहसीलवार पांच-पांच लाख रुपये आवंटित कर कंबल और अलाव जलाने के निर्देश दिए। इसके अलावा पडरौना और कसया में एक-एक रैन बसेरा बनाया जाएगा।
जिले के निराश्रित, असहाय और कमजोर वर्ग के असुरक्षित लोगों को इस कड़ाके की ठंड से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने जिले में कंबल खरीद के लिए सभी तहसीलों को पांच-पांच लाख रुपये आवंटित किए हैं। यह जानकारी प्रभारी डीएम कृष्ण लाल तिवारी ने दी। बताया कि खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान सपहां फाजिलनगर से 8220 कंबल खरीद कर प्रत्येक तहसीलों को 1370 कंबल गरीबों में बांटने के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा पडरौना बस स्टेशन और कसया बस स्टेशन के पास एक-एक रैन बसेेेरा बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
गरीब परिवारों पर भारी पड़ रही ठंड
कुबेरस्थान। क्षेत्र के गरीब परिवारों पर शीतलहर भारी पड़ने लगी है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के चौराहों पर भी अलाव का कोई प्रबंध नहीं है। क्षेत्र में ऐसे परिवारों की कमी नहीं है, जिनके घरों में आज भी चूल्हा उसी दिन जलता है, जिस दिन परिवार का कोई सदस्य मेहनत मजदूरी करके घर के लिए कुछ लाता है। ऐसे परिवारों पर ये ठंड भारी पड़ने लगी है। क्योंकि इस ठंड में उन्हें काम भी नहीं मिल रहा है। बतरौली, कल्यान छापर, सिंहनजोड़ी, सिंगहां, अमवा, फागूपर विशुनपुरा, गंगौली, भटवलिया, सखवनिया, धरनी छापर, शिवपुर, बढ़वलिया, बरहज आदि गांवों के गरीब परिवारों के सदस्य अपने दरवाजों पर घास-फूस का अलाव जलाकर ठिठुरते हुए अपनी रातें और दिन गुजारने को विवश हैं। इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी और दिनचर्या पर पड़ रहा है। उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि अगर लगातार कुछ दिनों तक ऐसी ही ठंडक पड़ती रही तो उन परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।