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Kushinagar News: तिरंगे में लिपटा आया सीआईएसएफ जवान का शव, मचा कोहराम
Mon, 16 Feb 2026 02:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 16 Feb 2026 02:14 AM IST
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सीआईएसएफ जवान मुकेश कुमार सिंह का फाइल फोटो और रोते बिलखते उनके परिजन।
- फोटो : संवाद
हाटा। हाटा कोतवाली क्षेत्र के सिंहपुर गांव में रविवार को सीआईएसएफ के जवान मुकेश कुमार सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर शव जैसे ही पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। ग्रामीणों की आंखें नम थीं और हर कोई इस असमय निधन से स्तब्ध नजर आया।
30 वर्षीय मुकेश कुमार सिंह दो भाइयों में छोटे थे। अभी उनका विवाह नहीं हुआ था। वर्ष 2016 में वह सीआईएसएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ के भिलाई में थी। परिजनों के अनुसार, वह करीब एक साल से पेट संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इलाज के बावजूद वह कर्तव्यनिष्ठा के साथ ड्यूटी निभा रहे थे।
करीब दस दिन पहले वह इलाज के लिए अपने गांव आए थे। स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर शुक्रवार को दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने भिलाई लौट गए। बताया जा रहा है कि जिस रात उन्होंने ड्यूटी संभाली, उसी रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने चिकित्सकीय सहायता दिलाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। देर रात उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
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रविवार दोपहर करीब तीन बजे उनका पार्थिव शरीर सिंहपुर गांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ शव को हेतिमपुर मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों की भारी भीड़ शामिल रही और नम आंखों से जवान को विदाई दी गई।
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30 वर्षीय मुकेश कुमार सिंह दो भाइयों में छोटे थे। अभी उनका विवाह नहीं हुआ था। वर्ष 2016 में वह सीआईएसएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ के भिलाई में थी। परिजनों के अनुसार, वह करीब एक साल से पेट संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इलाज के बावजूद वह कर्तव्यनिष्ठा के साथ ड्यूटी निभा रहे थे।
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करीब दस दिन पहले वह इलाज के लिए अपने गांव आए थे। स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर शुक्रवार को दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने भिलाई लौट गए। बताया जा रहा है कि जिस रात उन्होंने ड्यूटी संभाली, उसी रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने चिकित्सकीय सहायता दिलाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। देर रात उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
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रविवार दोपहर करीब तीन बजे उनका पार्थिव शरीर सिंहपुर गांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ शव को हेतिमपुर मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों की भारी भीड़ शामिल रही और नम आंखों से जवान को विदाई दी गई।