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Kushinagar News: बदलते मौसम का सेहत पर असर, इमरजेंसी वार्ड में बढ़े मरीज
Wed, 06 May 2026 02:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 06 May 2026 02:03 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में बेडों पर भर्ती मरीज।संवाद
पडरौना। मौसम के बदलते मिजाज से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। मंगलवार को कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है। वार्ड के करीब सभी बेडों पर मरीज भर्ती हैं। इनका उपचार किया जा रहा हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों में अधिकांश बेचैनी, घबराहट, सिरदर्द व उच्च रक्तचाप से संबंधित हैं।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में अचानक से बारिश के बाद फिर धूप निकलने के साथ उमस से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। इससे तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। डाक्टरों के अनुसार,बारिश व फिर धूप के साथ उमस के बढ़ने से लोगों के शरीर में पानी की कमी डिहाइड्रेशन के कारण अचानक से लोगों के रक्तचाप बढ़ जा रहे हैं। उन्हें चक्कर आना व घबराहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद वाली धूप और उमस अधिक नुकसानदेह होती है। इस समय खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए।
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ओपीडी में मरीजों के आंकड़े में वृद्धि दर्ज
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में भी मौसम बदलाव के चलते मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है। बीते 29 अप्रैल को हुई बारिश से पहले कॉलेज के ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 1000 से 1100 की थी। यह ग्राफ बारिश के बाद बढ़कर 1200 से 1300 पार तक पहुंच चुकी है। बीते सोमवार को 1350 मरीजों ने काउंटर पर पर्चा बनवाया था,वहीं मंगलवार को 1321 मरीजों ने काउंटर पर ओपीडी के लिए पर्चा बनवाया। इससे पहले यह आंकड़ा 1026 से 1115 व 1110 का रहा है।
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इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों की परेशानी
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती जंगल कुरमौल निवासी शिव कुमार को बैचेनी की समस्या थी। जिसे वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। चौपरिया निवासी साजिया खातून को सिरदर्द व घबराहट हो रही थी। माघी विशुनपुरा निवासी वकील को उच्च रक्तचाप की शिकायत थी। जंगल लाला छपरा दुबौली निवासी काबिर मुहम्मद को चक्करआ रहा था। ऐसे ही अन्य मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा था। वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि मौसम में बदलवा के बाद बेचैनी, घबराहट, सिरदर्द सहित अन्य दूसरी समस्याओं से जुड़े मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ओपीडी में भी मरीजों की भीड़ रही। मरीजों का उपचार कर दवाएं दी गई।
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बच्चा वार्ड की जगह इमरजेंसी में चल रहा था उपचार
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लापरवाही देखने को मिली। जहां बरवापट्टी क्षेत्र के एक सात माह के मासूम का उपचार बेहद लापरवाही के साथ किया जा रहा था। जबकि मासूम के मुंह से खून आ रहा था। ऐसा उपचार कर रही नर्स ने बताया। वह मासूम को सूई लगाने के लिए नस की तलाश कर रही थी,उसे काफी मशक्कत हो रही थी। जबकि कॉलेज में बच्चों के लिए बच्चा वार्ड, पीआईसीयू व एसएनसीयू बने हैं। इसके बावजूद मासूम को इन वार्डों भर्ती करने की जगह इमरजेंसी वार्ड में उपचार किया जा रहा था।
वर्जन
मौसम में बदलाव के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। सर्दी जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीजों को दवा के साथ-साथ बचाव के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं। -डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, सीएमएस,मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में अचानक से बारिश के बाद फिर धूप निकलने के साथ उमस से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। इससे तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। डाक्टरों के अनुसार,बारिश व फिर धूप के साथ उमस के बढ़ने से लोगों के शरीर में पानी की कमी डिहाइड्रेशन के कारण अचानक से लोगों के रक्तचाप बढ़ जा रहे हैं। उन्हें चक्कर आना व घबराहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद वाली धूप और उमस अधिक नुकसानदेह होती है। इस समय खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए।
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ओपीडी में मरीजों के आंकड़े में वृद्धि दर्ज
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में भी मौसम बदलाव के चलते मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है। बीते 29 अप्रैल को हुई बारिश से पहले कॉलेज के ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 1000 से 1100 की थी। यह ग्राफ बारिश के बाद बढ़कर 1200 से 1300 पार तक पहुंच चुकी है। बीते सोमवार को 1350 मरीजों ने काउंटर पर पर्चा बनवाया था,वहीं मंगलवार को 1321 मरीजों ने काउंटर पर ओपीडी के लिए पर्चा बनवाया। इससे पहले यह आंकड़ा 1026 से 1115 व 1110 का रहा है।
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इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों की परेशानी
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती जंगल कुरमौल निवासी शिव कुमार को बैचेनी की समस्या थी। जिसे वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। चौपरिया निवासी साजिया खातून को सिरदर्द व घबराहट हो रही थी। माघी विशुनपुरा निवासी वकील को उच्च रक्तचाप की शिकायत थी। जंगल लाला छपरा दुबौली निवासी काबिर मुहम्मद को चक्करआ रहा था। ऐसे ही अन्य मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा था। वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि मौसम में बदलवा के बाद बेचैनी, घबराहट, सिरदर्द सहित अन्य दूसरी समस्याओं से जुड़े मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ओपीडी में भी मरीजों की भीड़ रही। मरीजों का उपचार कर दवाएं दी गई।
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बच्चा वार्ड की जगह इमरजेंसी में चल रहा था उपचार
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लापरवाही देखने को मिली। जहां बरवापट्टी क्षेत्र के एक सात माह के मासूम का उपचार बेहद लापरवाही के साथ किया जा रहा था। जबकि मासूम के मुंह से खून आ रहा था। ऐसा उपचार कर रही नर्स ने बताया। वह मासूम को सूई लगाने के लिए नस की तलाश कर रही थी,उसे काफी मशक्कत हो रही थी। जबकि कॉलेज में बच्चों के लिए बच्चा वार्ड, पीआईसीयू व एसएनसीयू बने हैं। इसके बावजूद मासूम को इन वार्डों भर्ती करने की जगह इमरजेंसी वार्ड में उपचार किया जा रहा था।
वर्जन
मौसम में बदलाव के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। सर्दी जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीजों को दवा के साथ-साथ बचाव के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं। -डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, सीएमएस,मेडिकल कॉलेज कुशीनगर