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Kushinagar News: बुद्ध पीजी कॉलेज में बनेगा चंद्रमणि पालि भवन, आज कुलपति रखेंगी आधारशिला

Sun, 16 Jun 2024 03:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 16 Jun 2024 03:04 AM IST
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Chandramani Pali Bhavan will be built in Buddha PG College, Vice Chancellor will lay the foundation stone today
पकवा इनार। केवल साहित्य और भदंत, भिक्षुओं तक सीमित रह गई पालि भाषा को अब बुद्ध पीजी कॉलेज में अध्ययन का जरिया बनाने का प्रयास हो रहा है। प्राचीन पालि भाषा में पढ़ाई के लिए कालेज प्रबंध समिति ने चंद्रमणि पालि भवन बनवाने का निर्णय लियर है। रविवार की सुबह नौ बजे दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन और काॅलेज प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अग्ग महापंडित गुरु डाॅ. भदंत ज्ञानेश्वर पालि भवन की आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर कालेज प्रबंध समिति के सचिव वीरेंद्र सिंह अहलूवालिया व प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र आदि मौजूद रहेंगे।
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प्रबंध समिति सचिव ने बताया कि पालि भवन निर्माण के बाद पालि भाषा की पढ़ाई के लिए मान्यता संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इससे बुद्ध संबंधी साहित्य को पढ़ने और समझने के साथ लोगों से द्विपक्षीय वार्ता में भी सहूलियत मिलेगी। इससे महापरिनिर्वाण स्थली की अलग पहचान बनेगी। कालेज प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष व कुशीनगर भिक्षु संघ अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ने पूर्व में प्रबंध समिति की बैठक में यह निर्णय लिया था। इसका प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ था। आधारशिला रखने का कार्यक्रम 13 जून को था, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं हो सका था। संस्कृत की तरह ही यहां पालि भाषा प्रचलन में नहीं है। केवल धार्मिक आयोजनों और खास लोग ही पालि में संवाद करते हैं। भगवान बुद्ध के संदेशों, पंचशील, अष्टांग मार्ग और त्रिशरण आदि को समझने के लिए पालि जरूरी है।
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पालि भाषा में है बौद्ध साहित्य
प्रबंध समिति बुद्ध पीजी कॉलेज को पालि भाषा व साहित्य से जोड़ना चाहती है। पालि में लिखे अभिलेख भी समाज के युवा समझ नहीं पाते। अशोक के अभिलेख ब्राह्मी लिपि और पालि भाषा में उकेरे गए हैं। पालि साहित्य तीन भागों में है, जिन्हें पिटक कहा गया है। विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक। भगवान बुद्ध के विचारों और उपदेशों को विशेष शैली में संकलित किया गया है। 12वीं से 16वीं शताब्दी तक पालि भाषा में कई काव्य ग्रंथ और रचनाएं रहीं। उन्हें पढ़ना और समझना बिना पालि भाषा की जानकारी के संभव नहीं है। पालि भाषा की पढ़ाई से बौद्ध धर्म, साहित्य व लेखों को समझने में मदद मिलेगी। उनका प्रचार-प्रसार भी होगा।
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