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Kushinagar News: चालान का भय दिखा हाईवे पर वसूली करने वाले सेठी ढाबा संचालक पर केस

Sat, 08 Nov 2025 01:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 08 Nov 2025 01:44 AM IST
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Case filed against Sethi Dhaba operator for extorting money on the highway by showing fear of challan
हाटा। कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा से लग्जरी बसों और लोडेड ट्रकों के चालान का भय दिखाकर वसूली होती थी। हाईवे पर सक्रिय गैंग का संचालन ढाबा मालिका सुनील कुमार सिंह करता था। राज्यकर विभाग के सचल दस्ते के प्रभारी की तहरीर पर पुलिस ने ढाबा संचालक, अज्ञात कर्मी और कुछ अन्य लोगों पर केस दर्ज किया है। अवैध परिवहन करने वालों को राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की लोकेशन की जानकारी देता था। इससे टैक्स चोरी करने वाले वाहन आसानी से निकल जाते थे।
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हाईवे पर अफसरों की सक्रियता के बाद भी लंबी दूरी की लग्जरी बसे और लोडेड ट्रक बेखौफ फर्राटा भरते हैं। हाईवे पर लगातार लग्जरी बसों से हादसा होने के बाद डीएम महेंद्र सिंह तंवर और एसपी केशव कुमार ने गंभीरता से लिया। हाटा कोतवाली के हेतिमपुर मुजहना के बाद संचालित सेठी ढाबा संचालक सुनील कुमार सिंह से पुलिसकर्मी बस मालिक बनकर बात किए और हाईवे पर सक्रिय इस गिरोह के बारे में जानकारी की। इसके बाद ढाबा पर छापेमारी कर ढाबा संचालक को गिरफ्तार कर लिया।
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ढाबा में रखी एक डायरी मिली, इसमें कई नामी गिरामी लोगों का नाम और परिवहन विभाग और कलक्ट्रेट के एक अधिकारी के स्टोनो का नाम दर्ज था। डायरी के आधार पर अगर पुलिस कार्रवाई की होती तो कई जिम्मेदारों की गर्दन फंसती, लेकिन विवेचना में इनका नाम शामिल पुलिस करेगी। सहायक आयुक्त राज्य कर अंबरीश कुमार सिंह की तहरीर पर हाटा कोतवाली में सेठी ढाबा के मालिक सुनील कुमार सिंह, ढाबा के अज्ञात वर्कर, कुछ अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। हाटा कोतवाल राम सहाय चौहान ने बताया कि राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त की तहरीर पर ढाबा मालिक सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है, जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार विवेचना में नाम शामिल किया जाएगा।
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ढाबे की आड़ में होता था खेल

जानकारी के मुताबिक, हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिम टोल प्लाजा के पास कुछ माह से सेठी ढाबा संचालित है। बताया जा रहा है कि इस ढाबे की आड़ में अवैध रूप से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की एंट्री कराई जाती थी। इन वाहनों से राज्य कर विभाग की कार्रवाई से बचाने के लिए उन्हें सचल दल की लोकेशन की जानकारी दी जाती थी। इस खेल के बदले ढाबा स्वामी हर माह मोटी रकम वसूलता था। सूत्रों के अनुसार, यह अवैध गतिविधि लंबे समय से संचालित थी, जिसकी जानकारी विभाग को गुप्त सूत्रों के माध्यम से मिली। इसके बाद राज्य कर विभाग की टीम ने सतर्कता बरतते हुए साक्ष्य एकत्र किए और प्रकरण का खुलासा किया।
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अफसरों के मूवमेंट की लीक करते थे सूचनाएं

राज्य कर विभाग की टीम ने प्राथमिक जांच के दौरान पाया कि सेठी ढाबा पर अवैध रूप से ट्रक चालकों और टैक्स चोरी करने वाले परिवहनकर्ताओं का जमावड़ा रहता था। यहां से उन्हें राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की मूवमेंट की सूचना मिलती थी। बताया गया कि जैसे ही सचल दस्ता किसी इलाके में चेकिंग के लिए निकलता था, वैसे ही ढाबा से जुड़े लोग यह सूचना अवैध परिवहन करने वालों तक पहुंचा देते थे। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था।



विभागीय स्तर पर भी मचा हड़कंप
राज्य कर विभाग की इस कार्रवाई से विभाग के भीतर भी हलचल मच गई है। सूत्रों का कहना है कि विभाग अब यह जांच कर रहा है कि कहीं और भी इसी तरह के ढाबे या प्रतिष्ठान तो इस प्रकार की सूचना लीक करने के खेल में शामिल नहीं हैं। विभाग के जुड़े भी कुछ लोगों के इस खेल से जुड़े होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।



इलाके में चर्चा तेज

हाटा क्षेत्र में इस कार्रवाई की खबर फैलते ही लोगों में चर्चा शुरू हो गई है। आम लोगों का कहना है कि सेठी ढाबा क्षेत्र में काफी चर्चित था और दिन-रात यहां ट्रकों की आवाजाही बनी रहती थी। हालांकि स्थानीय स्तर पर कोई यह नहीं जानता था कि यहां इस तरह का अवैध काम भी चल रहा है। वहीं कर मामलों के जानकारों का कहना है कि सचल दल की लोकेशन साझा करना या सरकारी कार्रवाई की गोपनीय जानकारी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके तहत आरोपियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।





आरोपियों से पूछताछ करेगी पुलिस

पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों से जल्द ही पूछताछ की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए, तो गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, राज्य कर विभाग ने भी इस प्रकरण की आंतरिक जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सूचना लीक करने की फेहरिस्त कितनी लंबी है। इस प्रकरण ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध परिवहन और टैक्स चोरी के इस खेल में विभागीय की भूमिका भी काफी संबंधित है।
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