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जान जोखिम में डालकर नाव से ढो रहे भूसा

Tue, 03 May 2022 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2022 11:24 PM IST
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Carrying straw from the boat risking life
गंडक नदी के उस पार से नाव से भूसा ढोते ग्रामीण। संवाद - फोटो : KUSHINAGAR
जान जोखिम में डालकर नाव से ढो रहे भूसा
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मौसम के बदलते रुख से गंडक नदी से प्रभावित किसान चिंतित
तमकुहीरोड(कुशीनगर)। मौसम के बदलते रुख से गंडक नदी के उस पार खेती करने वाले किसान गेहूं की मड़ाई तथा भूसे की ढुलाई के लिए चिंतित हैं। उन्हें आशंका है यदि तेज बारिश होती है तो भूसा बर्बाद हो जाएगा। इससे उनके पशुओं के लिए चारा का संकट उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में जान जोखिम में डालकर नावों से भूसा ढोने में जुट गए हैं।
सेवरही विकास खंड में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17 किमी की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इसके किनारे बसे मोतीराय, दहारी व तवकल टोला, परसा उर्फ सिरसिया, जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवहीदयाल, ततवा टोला, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, डीहटोला, अहिरौलीदान सहित अन्य कई गांवों के किसानों की खेती गंडक नदी के उस पार है। वे जान जोखिम में डालकर गंडक नदी के उस पर नावों से खेती करने जाते-आते हैं। कारण गंडक नदी पर पक्का पुल नहीं है।
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क्षेत्र के किसान आनंद सिंह, ब्यास कुशवाहा, मथुरा सिंह, शर्मा यादव, संजय सिंह, डॉ. आरएन यादव का कहना है कि गंडक नदी क्षेत्र में करीब चालीस हजार की आबादी रहती है। इनमें अधिकांश लोगों की खेती नदी के उस पार है। उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर नावों से खेती करना पड़ता है। जब तक नदी पर पुल नहीं बन जाता, तब तक समस्या दूर नहीं होगी।
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