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Kushinagar News: बाढ़ में बहता बजट, तटबंध फिर भी कमजोर, ग्रामीणों ने ‘फ्लड फाइटिंग’ व्यवस्था पर उठाए सवाल

Wed, 30 Sep 2026 02:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 02:27 AM IST
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Budget washed away by floods, yet embankments remain weak; villagers question flood-fighting measures.
दुदही। बाढ़ की विभीषिका के बीच तटबंधों की मजबूती और बाढ़ नियंत्रण कार्यों को लेकर ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि बाढ़ आने से पहले तटबंधों की मरम्मत और मजबूती के लिए बजट खर्च किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर बांध कमजोर रह जाते हैं। जैसे ही तटबंध कटता है, प्रशासन की ओर से ‘फ्लड फाइटिंग’ शुरू कर दी जाती है।
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ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद मिट्टी, बालू से भरी बोरियां, बांस-बल्लियां और जियो बैग आदि डालकर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास किया जाता है। आपात स्थिति में इन कार्यों पर तेजी से धन खर्च किया जाता है। ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इन आपातकालीन कार्यों की प्रक्रिया और खर्च की पारदर्शिता की जांच होनी चाहिए।
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तात्कालिक राहत पर जोर, स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि जब नदी में पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो बालू की बोरियां और अन्य अस्थायी उपाय ज्यादा देर तक टिक नहीं पाते। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी तटबंधों को स्थायी मजबूती नहीं मिलती और बाढ़ का पानी गांवों की ओर बढ़ जाता है।
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वर्तमान बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने कहा कि गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ने पर तटबंधों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे अस्थायी इंतजाम कई जगह चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाढ़ नियंत्रण के लिए केवल आपदा के समय किए जाने वाले कार्यों के बजाय बाढ़ से पहले तटबंधों की वैज्ञानिक जांच, मजबूती और स्थायी मरम्मत पर जोर दिया जाना चाहिए।

व्यवस्था की विफलता का आरोप

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मौजूदा स्थिति को लेकर इसे ‘पॉलिटिकल डिजास्टर’ तक बताया है। उनका आरोप है कि हर साल बाढ़ के दौरान फ्लड फाइटिंग के नाम पर बड़ी रकम खर्च होती है, लेकिन तटबंधों को समय रहते स्थायी रूप से मजबूत नहीं किया जाता।

बाढ़ के दौरान सबसे अधिक नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है। घरों में पानी घुसने के साथ फसलें बर्बाद होती हैं और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की चुनौती सामने आती है। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट जाने से ग्रामीणों को नाव, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद पर निर्भर रहना पड़ता है।


ग्रामीणों की मांग है कि बाढ़ उतरने के बाद केवल राहत और मरम्मत तक सीमित रहने के बजाय तटबंधों की तकनीकी जांच, स्थायी मजबूती, पूर्व-मानसून निरीक्षण और फ्लड फाइटिंग में खर्च होने वाली धनराशि का पारदर्शी ऑडिट कराया जाए, ताकि हर साल पैदा होने वाली इसी स्थिति का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
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