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Kushinagar News: बौद्ध भिक्षुओं ने किया महापरित्राण सुत्त का पाठ
Sat, 22 Jun 2024 04:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:51 AM IST
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कुशीनगर। महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर में शुक्रवार की शाम ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भिक्षुओं ने महात्मा बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर चीवर चढ़ाया। महापरित्राण सुत्त का पाठ किया।
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर की अगुवाई में बौद्ध भिक्षुओं ने महापरित्राण सुत्त कर इसके महात्म्य के बारे में जानकारी दी। भंते उपालि ने कहा कि बौद्ध धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं पूर्णिमा को ही घटित हुई थीं। महात्मा बुद्ध का जन्म बैसाख पूर्णिमा को लुम्बिनी में हुआ था। उन्हें बोधगया में ज्ञान प्राप्त और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ था। बौद्ध साहित्य के अनुसार बुद्ध ने कपिलवस्तु में 15 वां वर्षावास करते हुए महासमय सुत्त का उपदेश किया था। आज के ही दिन सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा ने बोधगया से बोधिवृक्ष की शाखा ले जाकर श्रीलंका के अनुराधापुरम में रोपण किया था। इसी दिन भगवान बुद्ध ने तपस्सु व भल्लिक को दीक्षा दी थी। इस दौरान भंते नन्दका, भंते सत्यशील, भंते सुमना, भंते आलोक, टीके रॉय आदि मौजूद रहे।
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कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर की अगुवाई में बौद्ध भिक्षुओं ने महापरित्राण सुत्त कर इसके महात्म्य के बारे में जानकारी दी। भंते उपालि ने कहा कि बौद्ध धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं पूर्णिमा को ही घटित हुई थीं। महात्मा बुद्ध का जन्म बैसाख पूर्णिमा को लुम्बिनी में हुआ था। उन्हें बोधगया में ज्ञान प्राप्त और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ था। बौद्ध साहित्य के अनुसार बुद्ध ने कपिलवस्तु में 15 वां वर्षावास करते हुए महासमय सुत्त का उपदेश किया था। आज के ही दिन सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा ने बोधगया से बोधिवृक्ष की शाखा ले जाकर श्रीलंका के अनुराधापुरम में रोपण किया था। इसी दिन भगवान बुद्ध ने तपस्सु व भल्लिक को दीक्षा दी थी। इस दौरान भंते नन्दका, भंते सत्यशील, भंते सुमना, भंते आलोक, टीके रॉय आदि मौजूद रहे।
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