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Kushinagar News: तत्काल टिकट में दलालों की सेंधमारी, आम लोग परेशान

Wed, 01 Nov 2023 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 01 Nov 2023 12:31 AM IST
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Brokers break into Tatkal tickets, common people upset
पडरौना रेलवे स्टेशन के टिकट खिड़की पर रिजर्वेशन के लिए सुबह से खड़े यात्री। संवाद
-त्योहारों से पहले टिकट की कमी ने दलालों की बढ़ाई सक्रियता
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- अवैध रेल टिकट को झटपट बनाकर अधिक दाम में बेच रहे
-टिकट काउंटर से लोगों को नहीं मिल रहा तत्काल टिकट
-रेलवे के जिम्मेदारों की अवैध टिकट के कारोबारियों पर नहीं पड़ रही नजर
-शहर से लेकर गांव तक ट्रेवल एजेंसी का बोर्ड लगाकर बेखौफ बना रहे टिकट

पडरौना। दशहरा के बाद अब दीपावली, छठ पर्व को लेकर महानगरों में रहने वाले लोगों का घर आना मुश्किल हो गया है। ट्रेनों में सीटें फुल हो गई हैं। सफर के लिए ट्रेनों में मारामारी है। लेकिन दलालों की चांदी हैं। टिकट बुक करने के लिए रेलवे की अधिकृत एप आईआरसीटीसी पर सामान्य व्यक्ति के लिए टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लेकिन टिकट के धंधेबाज सॉफ्टवेयर की मदद से एप को हैक कर तय सीमा से कम में ही कई टिकट बुक कर दे रहे हैं।
रेलवे प्रशासन के तमाम कोशिशों के बावजूद तत्काल कोटे के टिकट में दलालों की सेंधमारी रुक नहीं रही है और टिकट काउंटर से लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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कप्तानगंज रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर कतार में लोगों की भीड़ तत्काल टिकट बुक करने के लिए लग रही है। मंगलवार को आधी रात से ही लोग कतार में लगे थे। लेकिन सिर्फ चार लोगों को तत्काल टिकट मिल सका। इसके बाद सर्वर डाउन होने की बात कह कर टिकट काउंटर से बुकिंग क्लर्क ने लोगों को लौटा दिया। वहीं पडरौना रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से सिर्फ दो लोगों को तत्काल टिकट मिला। बाकी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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नाराज लोगों ने टिकट काउंटर पर मौजूद बुकिंग क्लर्क पर दलालोंं से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए खरी-खोटी भी सुनाई। तमकुहीरोड रेलवे स्टेशन पर एक भी लोगों को तत्काल टिकट नहीं मिला। वहीं रेलवे काउंटर पर मौजूद क्लर्कों का कहना है कि एसी तत्काल टिकट के लिए दिन में 10 बजे वेबसाइट खुलता है। एक से दो टिकट बनाने के बाद सर्वर डाउन हो जाता है। जबकि बाजार में खोले गए ट्रेवल्स वालों के यहां दोगुने, तीन गुने रेट पर आसानी से रेलवे का तत्काल टिकट उपलब्ध हो जा रहा है।
रेलकर्मियों की मिलीभगत से बाजार में अवैध तरीके से ट्रेवल्स एजेंसी खोलकर तत्काल टिकट के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। रेलवे काउंटर से टिकट नहीं मिलने और जरूरी कार्यों से जाने के चक्कर में दलालों से तत्काल टिकट के लिए संपर्क करना मजबूरी बन गया है।

साइबर कैफे की आड़ में अवैध ई-टिकट का कारोबार

दिल्ली से गोरखपुर तक तत्काल में स्लीपर का साधारण किराया 500 से 600 तक है। जबकि दलाल इसी टिकट के 1300 रुपये लेते हैं। एसी-थर्ड टियर का किराया अधिकांश 1300 तक है लेकिन 2200-2300 में इसका टिकट दलाल बेच रहे हैं। साइबर कैफे की आड़ में अवैध टिकट का कारोबार फलफूल रहा है। रेलवे स्टेशन से जुड़े क्षेत्र के अतिरिक्त ग्रामीण चौराहों पर भी दलाल तो अपनी जेब भर रहे हैं लेकिन रेलवे सहित मजदूरों और विद्यार्थियों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।

ऐसे होता है तत्काल टिकट का अवैध खेल
पिछले एक साल में हुई गिरफ्तारी के बाद हुए खुलासे में देखे तो यह बात सामने आई है कि टिकट धंधेबाज कई ऐसे अवैध सॉफ्टवेयर की मदद लेते हैं, जिसमें वह आईआरसीटीसी की वेबसाइट को हैक कर लेते हैं। तेज रफ्तार सॉफ्टवेयर से अधिकतम 10 सेकेंड में ही टिकट बुक हो जाते हैं, जबकि आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर से टिकट बुक कराने में कम से कम दो से तीन मिनट का समय लग जाता है। रेलवे में एसी कैटेगरी की ट्रेनों के लिए तत्काल बुकिंग सुबह 10 बजे से शुरू होती है, वहीं स्लीपर क्लास के लिए तत्काल ट्रेन बुकिंग सुबह 11 बजे से शुरू होती है। शातिर दलाल कंप्यूटर पर पहले से ही यात्री विवरण फीड कर लेते हैं और जैसे ही विंडो खुलती है, वह इंटर मारकर तत्काल कोटे की टिकट पर कब्जा कर लेते हैं और सामान्य लोग टिकट से वंचित रह जाते हैं।



ऐसे बनते हैं वैध टिकट, लगता है समय
रेलवे टिकट आईआरसीटीसी की वेबसाइट या एप पर बुक किया जाता है
व्यक्ति को यूजर आईडी और पासवर्ड डालने के बाद लॉगिन कैप्चा और डिटेल भरनी होती है

एक यूजर अपनी आईडी से एक से लेकर छह यात्रियों की टिकट बुक कर सकता है।

अंत में भुगतान संबंधित ओटीपी रजिस्टर्ड मोबाइल फोन पर आता है, तब प्रक्रिया पूरी होती है

औसतन दो मिनट का समय एक सामान्य व्यक्ति को लग जाता है



ऐसे बनता है अवैध टिकट, नहीं लगता समय
दलाल रेलवे टिकट बुकिंग के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं
टेवल्स एजेंसी संचालित करने के लिए बहुत थोड़े पैसे देने पड़ते हैं

सॉफ्टवेयर की मदद से कैप्चा भरने की जरूरत नहीं पड़ती है, सॉफ्टवेयर इसे बायपास करा देता है

-पेमेंट के लिए भी ओटीपी की जरूरत नहीं होती है, सीधा भुगतान हो जाता है

-कुछ सेकेंड में दलाल कंफर्म टिकट बुक करा लेते हैं

-दलाल एक आईडी से 144 लोगों की टिकट बुक कर सकता है

ऑनलाइन टिकट के नाम पर अधिक रुपये लेने की जानकारी नहीं थी। इसकी जांच के लिए आरपीएएफ की स्पेशल टीम गठित की गई है। इसकी सूचना टीम को देकर शीघ्र ही जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई कराई जाएगी।

- अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी मंडल एनईएनआर



केस नंबर एक
10 अक्टूबर 2023 को पूर्वाेत्तर रेलवे की आरपीएफ टीम ने तमकुहीराज बाजार में छपा मारा था। जहां से 24 तत्काल एवं सामान्य टिकट मिले थे। टीम ने एक व्यक्ति को भी वहां से पकड़ा था। बरामद टिकटों की कीमत 36,559 रुपये थी।



केस नंबर दो
27 जुलाई 2023 को सुकरौली बाजार के एक कंप्यूटर के संचालक के पास से 20,229 रुपये का सामान्य टिकट और 42,018 रुपये कीमत का तत्काल रेलवे ई-टिकट बरामद किया गया था। कुल बरामद टिकटों की कीमत 62,247 रुपये थी।



केस नंबर तीन
-26 मई 2023 को सीआईबी, साइबर सेल और आरपीएफ कप्तानगंज की संयुक्त टीम ने छापा मारकर तमकुहीरोड में अवैध रेल आरक्षित तत्काल ई-टिकट बरामद किया था। जिसके बाद कुछ दिन तक वहां इस पर लगाम लगा रहा, लेकिन आरोपी ने छूटने के बाद दोबारा धंधा शुरू कर दिया।

केस नंबर चार
19 नवंबर 2022 को कप्तानगंज कस्बे के रेलवे स्टेशन से अवैध टिकट का धंधा करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उसके पास से 112 अवैध टिकट बरामद हुए थे। इसके पहले भी कप्तानगंज में गिरफ्तारी हुई थी।



...तो इसलिए बंद नहीं होता अवैध टिकट का कारोबार
क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच (सीआईबी) व रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा टिकट के धंधेबाजों पर शिकंजा कसने के लिए छापा मारकर गिरफ्तार किया जाता है। रेल अधिनियम की धारा 143 के कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है। लिहाजा इन पर आईपीसी की कोई धारा नहीं लगती है। ऐसे मामलों में दलालों को रेलवे कोर्ट में पेश किया जाता है, जहां जुर्माना देकर ये लोग आसानी से निकल जाते हैं। इनके पुराने साफ्टवेयर को ब्लाॅक कर दिया जाता है। हालांकि यह आसानी से छूटने के बाद दोबारा यह काम शुरू करते हैं। यही कारण है कि इस तरह के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे।

बेटे कोटा में पढ़ाई करते हैं। उधर से दिवाली और छठ में आने के लिए उसे टिकट नहीं मिल रहा है। इस लिए परिवार के लोग इस वर्ष मन बनाए हैं कि इस बार का त्योहार बेटों के पास जाकर मनाएंगे। जाने के लिए भी ट्रेनों का टिकट नहीं मिल रहा है। दो दिन से तत्काल टिकट के लिए काउंटर से प्रयास कर रहा हूं। अब अपनी निजी गाड़ी से ही कोटा बेटे के पास जाने का मन बनाया है। लेकिन तत्काल टिकट में सेंधमारी पर रोक लगानी चाहिए। - संजय गुप्ता, निवासी, कप्तानगंज


बेटा और बेटी कोटा में पढ़ाई करते हैं। बिना उनके घर आए त्योहार कैसे मनाया जाए। उनके पास जाने के लिए तत्काल टिकट कराने का प्रयास कर रहा था। लेकिन नहीं मिला। एक दलाल ने कोटा से आने के लिए टिकट किया है। लेकिन तीन स्टेशनों पर ट्रेन बदलनी पड़ेगी। रकम भी अधिक लगा है। लेकिन त्योहार पर बेटों के घर आने की व्यवस्था बन गई। दलालों से टिकट खरीदना सभी की बस की बात नहीं है।
- मुकुनदेव सिंह, निवासी, कप्तानगंज
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