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Kushinagar News: विलुप्त होतीं लोककलाओं पर आधारित पुस्तक 'कठघोड़वा' प्रकाशित
Thu, 09 May 2024 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 09 May 2024 01:42 AM IST
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हाटा। भारतीय संस्कृति को पहचान दिलाने वाली लोककलाओं की याद दिलाती मोहन पांडेय की पुस्तक 'कठघोड़वा' प्रकाशित हुई है। इसके प्रकाशन पर क्षेत्र के साहित्य जगत से जुडे़े लोगों ने खुशी जताई है।
बुधवार को हाटा नगर के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय पर क्षेत्र के साहित्यकारों की बैठक हुई। इसमें मोहन पांडेय भ्रमर की नई पुस्तक प्रकाशित होने पर उन्हें साहित्यकारों ने सम्मानित किया। कवि सच्चिदानंद पांडेय ने कहा कि इस क्षेत्र के रचनाकारों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इस क्षेत्र के कई रचनाकारों ने अपने आप को साबित किया है। इसी में एक नाम है मोहन पांडेय भ्रमर का। उन्होंने कि एक-एक कर इनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इनकी हाल में प्रकाशित पुस्तक कठघोड़वा में जिस तरह से उन्होंने विलुप्त हो रही लोककलाओं को शब्दों में तराशा है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हम लोगों की माटी भी साहित्य के लिए कम उर्वर नहीं है।
इस दौरान हमीद आरजू, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, शैलेंद्र पांडेय असीम, अक्षय गिरि, सूरज राम आदित्य, चंद्रहास वर्मा, डॉ. रामानुज द्विवेदी, डॉ. संदीप कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को हाटा नगर के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय पर क्षेत्र के साहित्यकारों की बैठक हुई। इसमें मोहन पांडेय भ्रमर की नई पुस्तक प्रकाशित होने पर उन्हें साहित्यकारों ने सम्मानित किया। कवि सच्चिदानंद पांडेय ने कहा कि इस क्षेत्र के रचनाकारों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इस क्षेत्र के कई रचनाकारों ने अपने आप को साबित किया है। इसी में एक नाम है मोहन पांडेय भ्रमर का। उन्होंने कि एक-एक कर इनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इनकी हाल में प्रकाशित पुस्तक कठघोड़वा में जिस तरह से उन्होंने विलुप्त हो रही लोककलाओं को शब्दों में तराशा है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हम लोगों की माटी भी साहित्य के लिए कम उर्वर नहीं है।
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इस दौरान हमीद आरजू, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, शैलेंद्र पांडेय असीम, अक्षय गिरि, सूरज राम आदित्य, चंद्रहास वर्मा, डॉ. रामानुज द्विवेदी, डॉ. संदीप कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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