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सांस रोककर मरचहवा और बसंतपुर के लोग करते हैं नाव की सवारी

Wed, 29 Jul 2020 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2020 11:00 PM IST
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boat is only medium of transportation of basantpur and marchahawa
खड्डा क्षेत्र के बसंतपुर,मरचहवा गांव में जान जोखिम में डालकर नाव से सफर करते बाढ पीड़ित। - फोटो : KUSHINAGAR
सांस रोककर मरचहवा और बसंतपुर के लोग करते हैं नाव की सवारी
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खड्डा। गंडक नदी की बाढ़ ने मरचहवा और बसंतपुर के ग्रामीणों का जीवन नारकीय बना दिया है। माचिस से दवाई तक के लिए महराजगंज जिले के सोहगीबरवा बाजार जाना पड़ता है। महज डेढ़ किलोमीटर दूर बसे इस बाजार तक भी जाने का कोई साधन नहीं है। दो छोटी नावें हैं, जो साढ़े चार हजार की आबादी के लिए आवागमन का साधन हैं।
बुधवार सुबह के आठ बजे थे, जब बसंतपुर गांव की नंदू की पत्नी गिरजा देवी व पुत्री प्रीती बुखार, पैर दर्द, पेट दर्द से पीड़ित थीं, इनको इलाज कराने सोहगीबरवा जाना था परंतु छोटी नाव कुछ लोगों के लेकर गई थी वह लौटी नहीं थी। मरचहवा गांव की सैरून नेशा, मैमुन खातून, शुभावती आदि की तबीयत भी खराब है। इनको भी दवा के लिए सोहगीबरवा जाना है। कुछ अन्य लोग भी हैं, जिन्हें घर के लिए जरूरी सामान लेने सोहगीबरवा जाना है। सभी नाव का इंतजार कर रहे हैं। परंतु मुश्किल यह है कि यहां केवल दो छोटी नावें ही हैं, जिसमें एक छोटी नाव मरचहवा दक्षिण टोला से बसंतपुर तक लोगों को लेकर आई थी। दूसरी नाव सोहगीबरवा लेकर गई है। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद एक नाव पहुंचती है तो बैठने की होड़ लग जाती है। जाने वालों की संख्या अधिक व नाव की क्षमता कम होने से नाविक चिंतित है। किसी तरह लोगों को शांत कराता है। मजबूरी में कुछ लोग इंतजार करने के लिए मान जाते हैं क्योंकि बीमारों को पहले जाना जरूरी है। इसमें नंदू के परिवार को जगह मिल जाती है। इसके अलावा अन्य लोगों को लेकर नाव सोहगीबरवा की ओर बढ़ती है। नाव की हालत यह है कि थोड़ा भी संतुलन बिगड़ा तो पलट जाने का भय है। नाविक बार-बार शांत रहने की चेतावनी दे रहा है। सभी लोग सांस रोके 40 मिनट का सफर तय कर गंतव्य तक पहुंचते हैं। इन लोगों को अब जल्दी से लौटने की चिंता है है। कोई सरकारी डाक्टर नहीं होने से नंदू की पत्नी व बच्ची का इलाज अप्रशिक्षित डाक्टर से कराया जाता है। नंदू व अन्य लोग फिर इस खतरनाक सफर को पूरा कर घर पहुंचते हैं। गांव में भी कीचड़ और गंदगी है।
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बरसात बाद बनाएंगे कार्ययोजना : विधायक
विधायक जटाशंकर त्रिपाठी कहते हैं कि गंडक की बाढ़ से प्रभावित इलाके में समस्याएं बेहद गंभीर हैं। सबसे जटिल समस्या रास्ते की है। गंडक नदी के सीधे प्रभाव वाले इस इलाके में रास्ता बनाना आसान काम नहीं है। बीते मार्च में भैसहां घाट पर पीपा पुल लगवाया गया था लेकिन पानी बढ़ने पर इसे खोलना पड़ा। अक्तूबर में फिर इसे लगाया जाएगा। इसके अलावा बाढ़ प्रभावितों की समस्या के स्थाई निदान का भी प्रबंध किया जाएगा।
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...तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था मरचहवा
गंडक नदी के दियारा में बसे खड्डा तहसील के मरचहवा में वर्ष 1989 में जंगल पार्टी के डकैतों ने 14 ग्रामीणों को लाइन में खड़ा कर गोली मार दी थी। इस घटना के बाद यह गांव राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने इस गांव में आकर इलाके में विकास की गंगा बहाने की घोषणा की थी। तीन दशक बाद यहां विकास की गंगा तो नहीं बही लेकिन गंडक नदी की विभीषिका झेलनी नीयति बन गई है।
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