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तुलसीदास हिंदी के सबसे बड़े कवि : अष्टभुजा शुक्ल

Mon, 27 Jul 2020 09:03 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2020 09:03 PM IST
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birth aniversary of goswami tulasidas celebrated
कवि अष्टभुजा शुक्ल। - फोटो : KUSHINAGAR
तुलसीदास हिंदी के सबसे बड़े कवि : अष्टभुजा शुक्ल
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गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर अज्ञेय सहचर की ओर से बतकही आयोजित
कसया। तुलसीदास हिंदी के सबसे बड़े कवि हैं। उनका जीवन अनुभव बहुत ही गहरा और विस्तृत है। उनका अध्ययन अत्यंत व्यापक है। वे अत्यधिक संवेदनशील हैं। लेकिन आज के समय में कवियों को उनकी रचनाओं के पहले उनकी जातिगत पहचान को आधार बनाकर मूल्यांकन का जो फैशन चला है उसने अनेक विवादों को अनावश्यक जन्म दिया है।

ये बातें वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल ने कहीं। वे श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर मनाए जाने वाली गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर अज्ञेय सहचर की ओर से आयोजित बतकही को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तुलसीदास के काव्य में लोकानुभव, जीवनानुभव, श्रम के सौंदर्य का अद्भुत रूप दिखाई पड़ता है। उनका राम राज्य ऐसा है, जहां बादल बिना मांगे पानी दे रहे हैं। अर्थात प्रकृति से मनुष्य की एकता का होना महत्वपूर्ण है। यह एकता सीता खोज में भी परिलक्षित है, जहां राम प्रकृति से सीता के विषय में पूछते हैं। तुलसीदास ने एक तरफ जहां ब्राह्मणों की प्रशंसा हैं वहीं अपने पाखंडी ब्राह्मणों, कथावाचकों की कड़ी भर्त्सना भी की है। वह अत्याचारी और अन्यायी राजा की कड़ी निंदा करते हुए कहते हैं ‘जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी’। उनकी ये पंक्तियां केवल हमारे समय ही नहीं बल्कि हर युग के अन्यायी राजसत्ता के लिए आईना है।
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