{"_id":"eb5d8955c9db89c0e19cc52afde0116b","slug":"becoming-empowered-woman-writing-prof-ashok-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सशक्त होता जा रहा स्त्री लेखन : प्रो. अशोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सशक्त होता जा रहा स्त्री लेखन : प्रो. अशोक
kushinagar beauro
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लक्ष्मीगंज। रामकोला स्थित शिव दुलारी देवी दलपट शाही महिला महाविद्यालय में तीन दिवसीय हिंदी कार्यशाला मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे की गई। प्रख्यात साहित्यकार व ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त केदारनाथ सिंह ने सरस्वती प्रतिमा पर ज्योति जलाकर कार्यशाला का उद्घाटन किया।
इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गान किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने स्त्री विमर्श विषय पर कहा कि अब स्त्री लेखन सशक्त होता जा रहा हैं। स्त्रियों की अभिव्यक्ति धीरे-धीरे समाज में उभर रही हैं। भाषा और संस्कृति को स्त्री शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि हम अपनी भाषा व संस्कृति भूलते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति की ओर उन्मुख हो रहे हैं।
जिससे हमारा विकास प्रभावित हो रहा है। इसके बाद ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त केदारनाथ सिंह ने कहा कि स्त्री लेखन सभी भारतीय भाषाओं में हो रहा हैं और स्त्रियां पूरी ताकत से बोल रही हैं। स्त्री उत्कर्ष पूरे विश्व में हो रहा हैं। पुरुष प्रधान समाज ने हमें अशांति दी हैं। अब महिला प्रधान समाज की कल्पना में पूरे विश्व में शांति होगी। इसके बाद कार्यकारी अध्यक्ष उ.प्र. हिंदी संस्थान लखनऊ उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नारी शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय हैं।
विज्ञापन
आज केरल राज्य में स्त्रियों की साक्षरता 100 फीसदी हैं। केरल की नर्सें पूरे भारत में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि स्त्रियां अपनी कमजोरी का कारण जानें और अभिव्यक्ति करना सीखें, यही कार्यशाला का उद्देश्य हैं। अन्त में कुलपति अशोक कुमार व साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने महाविद्यालय के परास्नातक भवन की आधारशिला रखी और महाविद्यालय के बरामदे में लगाई गई ‘कला विथिका’ का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम का संचालन बीएचयू हिंदी के प्रो. सदानंद शाही व अध्यक्षता केदारनाथ सिंह ने किया। अमिता दूबे ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। यह कार्यशाला उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ व महाविद्यालय की ओर से आयोजित की गई है। इस दौरान मनीष शुक्ल, विभा सिंह चौहान, डॉ. जाह्नवी सिंह, डॉ. मनीषा सिंह, राजकुमार सिंह, सपना सिंह, मधुसूदन पांडेय, राधेगोविन्द शाही सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गान किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने स्त्री विमर्श विषय पर कहा कि अब स्त्री लेखन सशक्त होता जा रहा हैं। स्त्रियों की अभिव्यक्ति धीरे-धीरे समाज में उभर रही हैं। भाषा और संस्कृति को स्त्री शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि हम अपनी भाषा व संस्कृति भूलते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति की ओर उन्मुख हो रहे हैं।
विज्ञापन
जिससे हमारा विकास प्रभावित हो रहा है। इसके बाद ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त केदारनाथ सिंह ने कहा कि स्त्री लेखन सभी भारतीय भाषाओं में हो रहा हैं और स्त्रियां पूरी ताकत से बोल रही हैं। स्त्री उत्कर्ष पूरे विश्व में हो रहा हैं। पुरुष प्रधान समाज ने हमें अशांति दी हैं। अब महिला प्रधान समाज की कल्पना में पूरे विश्व में शांति होगी। इसके बाद कार्यकारी अध्यक्ष उ.प्र. हिंदी संस्थान लखनऊ उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नारी शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय हैं।
विज्ञापन
आज केरल राज्य में स्त्रियों की साक्षरता 100 फीसदी हैं। केरल की नर्सें पूरे भारत में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि स्त्रियां अपनी कमजोरी का कारण जानें और अभिव्यक्ति करना सीखें, यही कार्यशाला का उद्देश्य हैं। अन्त में कुलपति अशोक कुमार व साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने महाविद्यालय के परास्नातक भवन की आधारशिला रखी और महाविद्यालय के बरामदे में लगाई गई ‘कला विथिका’ का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम का संचालन बीएचयू हिंदी के प्रो. सदानंद शाही व अध्यक्षता केदारनाथ सिंह ने किया। अमिता दूबे ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। यह कार्यशाला उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ व महाविद्यालय की ओर से आयोजित की गई है। इस दौरान मनीष शुक्ल, विभा सिंह चौहान, डॉ. जाह्नवी सिंह, डॉ. मनीषा सिंह, राजकुमार सिंह, सपना सिंह, मधुसूदन पांडेय, राधेगोविन्द शाही सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।