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बैंकों में कैश की किल्लत बरकरार
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:55 PM IST
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एटीएम पर लाइन लगी
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद से बैंकों में न केवल कैश की समस्या उत्पन्न हो गई है, बल्कि चेक, ड्रॉफ्ट और बैंकिंग से जुड़े अन्य कार्यों के लिए भी लोगों को कई दिनों तक बैंकों का चक्कर काटना पड़ रहा है। बैंक के अधिकारी कर्मचारियों की कमी बताकर ग्राहकों को लौटा दे रहे हैं। इक्का-दुक्का खुल रहे एटीएम पर भी रुपये के लिए लाइन लगी रह रही है।
नोटबंदी के बाद से शुरू हुई रुपये की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी और कैशियर भीड़ का हवाला देकर खाताधारकों की मामूली समस्याओं को भी कई दिनों तक टरका रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक के पडरौना मुख्य शाखा को ही लें, चेक जमा करने के लिए कोई कर्मचारी इन दिनों काउंटर पर नहीं रहता। चेक ले जाने वाले खाताधारकों को सीधे बक्से की राह दिखा दी जाती है, लेकिन उन बक्सों में पड़े चेक की इंट्री करने की जहमत नहीं उठाई जाती। 16 जनवरी को ही इस शाखा में पड़े चेकों का भुगतान अब तक खाताधारकों के खाते में नहीं हुआ है। बैंक में कर्मचारियों की कमी बताकर बैंककर्मी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। ऐसे ही ड्रॉफ्ट बनवाने या बैंकिंग से जुड़े अन्य कार्यों में भी हीलाहवाली देखने को मिल रही है।
कमोबेश यही हाल पीएनबी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक सहित अन्य बैंकों में भी देखा जा रहा है, जहां बैंक से जुड़े छोटे कार्यों के लिए भी खाताधारक कई दिन भटक रहेे हैं। रुपये की कमी के कारण कई एटीएम भी नहीं खुल रहे हैं। इक्का-दुक्का खुलने वाले एटीएम पर भीड़ इतनी हो जा रही है कि ग्राहकों को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है। शुक्रवार को पडरौना नगर के तीस एटीएम में से आईसीसीआई और एचडीएफसी बैंक के ही एटीएम खुले थे।
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कसया प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को कस्बे के कई बैंकों में कैश की समस्या रही। गोरखपुर मार्ग पर स्थित दोनों एटीएम पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। यूनियन बैंक और पीएनबी की शाखा पर ग्राहकों को रकम दिए जा रहे थे, जिसमें पीएनबी की तरफ से खाताधारकों को 10 हजार रुपये दिया जा रहा था। वहीं इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पूर्वांचल बैंक सहित अन्य बैंकों में दो से चार हजार रुपये ही दिए जा रहे थे।
कुबेरस्थान प्रतिनिधि के अनुसार एसबीआई की शाखा में ढाई महीने से कैश की किल्लत बरकरार है। ग्राहक अपना हर काम छोड़कर बैंक से रुपये लेने के लिए आ रहे हैं, लेकिन रुपये नहीं मिल रहे। इस शाखा में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को कैश न मिलने से निराश ग्राहकों को वापस लौटना पड़ा।
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नोटबंदी के बाद से शुरू हुई रुपये की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी और कैशियर भीड़ का हवाला देकर खाताधारकों की मामूली समस्याओं को भी कई दिनों तक टरका रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक के पडरौना मुख्य शाखा को ही लें, चेक जमा करने के लिए कोई कर्मचारी इन दिनों काउंटर पर नहीं रहता। चेक ले जाने वाले खाताधारकों को सीधे बक्से की राह दिखा दी जाती है, लेकिन उन बक्सों में पड़े चेक की इंट्री करने की जहमत नहीं उठाई जाती। 16 जनवरी को ही इस शाखा में पड़े चेकों का भुगतान अब तक खाताधारकों के खाते में नहीं हुआ है। बैंक में कर्मचारियों की कमी बताकर बैंककर्मी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। ऐसे ही ड्रॉफ्ट बनवाने या बैंकिंग से जुड़े अन्य कार्यों में भी हीलाहवाली देखने को मिल रही है।
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कमोबेश यही हाल पीएनबी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक सहित अन्य बैंकों में भी देखा जा रहा है, जहां बैंक से जुड़े छोटे कार्यों के लिए भी खाताधारक कई दिन भटक रहेे हैं। रुपये की कमी के कारण कई एटीएम भी नहीं खुल रहे हैं। इक्का-दुक्का खुलने वाले एटीएम पर भीड़ इतनी हो जा रही है कि ग्राहकों को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है। शुक्रवार को पडरौना नगर के तीस एटीएम में से आईसीसीआई और एचडीएफसी बैंक के ही एटीएम खुले थे।
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कसया प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को कस्बे के कई बैंकों में कैश की समस्या रही। गोरखपुर मार्ग पर स्थित दोनों एटीएम पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। यूनियन बैंक और पीएनबी की शाखा पर ग्राहकों को रकम दिए जा रहे थे, जिसमें पीएनबी की तरफ से खाताधारकों को 10 हजार रुपये दिया जा रहा था। वहीं इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पूर्वांचल बैंक सहित अन्य बैंकों में दो से चार हजार रुपये ही दिए जा रहे थे।
कुबेरस्थान प्रतिनिधि के अनुसार एसबीआई की शाखा में ढाई महीने से कैश की किल्लत बरकरार है। ग्राहक अपना हर काम छोड़कर बैंक से रुपये लेने के लिए आ रहे हैं, लेकिन रुपये नहीं मिल रहे। इस शाखा में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को कैश न मिलने से निराश ग्राहकों को वापस लौटना पड़ा।