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Kushinagar News: उधार के डॉक्टर से कुपोषित बच्चों को बना रहे सेहतमंद

Mon, 26 Jun 2023 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 26 Jun 2023 12:35 AM IST
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bad condition of poshan punrvas center
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चे।संवाद
फोटो समाचार
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जिला अस्पताल में बने 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र का बुरा हाल
नौ कुपोषित बच्चों का चल रहा इलाज, वार्ड में सुविधाओं की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंंद्र (एनआरसी) में आने वाले कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने में डायटीशियन और डॉक्टर आड़े आ रहे हैं। भर्ती करने से सेहतमंद बनाने तक की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स और रसोइया की है। वार्ड में भर्ती नौ बच्चों का इलाज अभी चल रहा है।
पोषण पुनर्वास केंद्र का बुरा हाल है। यहां भर्ती कुपोषित बच्चों को समय से आहार और इलाज तक नहीं मुहैया हो रहा है। इसकी वजह डायटीशियन का नहीं होना और अस्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती बताई जा रही है। वहीं, कुपोषित बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास उसके भोजन पर निर्भर है।
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इनकी सेहत के लिए भोजन में विटामिन, मिनरल, कैल्सियम, प्रोटीन, फाइबर आदि होना जरूरी है। इन सबकी कमी से बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। स्टाफ को यह भी बताने वाला कोई नहीं है कि कौन से खाद्य पदार्थ से बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व मिलेंगे।
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बच्चों को उनके उम्र के हिसाब से डायटीशियन ही आहार तय करता है। यहां जिला अस्पताल के डॉ. अनवर संबद्ध हैं। वे कभी=कभार ही वहां आते हैं। मोबाइल फोन पर डॉक्टर से सुझाव लेकर स्टाफ नर्स और रसोइया विजेता भारद्वाज भर्ती बच्चों को आहार देती हैं। इसका चार्ट भी कार्यालय में लगा है।
समय से नहीं आते हैं स्वास्थ्यकर्मी
जिला अस्पताल में 10 बेड के बने पोषण पुनर्वास केंंद्र में समय से स्वास्थ्यकर्मी नहीं पहुंचते हैं। जबकि चार स्टाफ नर्स, एक केयर टेकर, एक स्वीपर, एक इंचार्ज और एक रसोइया की तैनाती है। डॉक्टर और डायटीशियन का पद रिक्त है। वार्ड में जंगल अमवा गांव की तीन वर्षीय रानी, सिंघापट्टी गांव की 10 वर्षीय सिंघानी, भुआली पट्टी गांव की दो वर्षीय अंजली समेत नौ बच्चे भर्ती हैं। इनके अभिभावकों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी समय से नहीं आते हैं। रात को दिक्कत होने पर सिर्फ केयर टेकर मिलते हैं। इसकी वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भोजन और नाश्ते की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है।

गर्भावस्था से होनी चाहिए पोषण की शुरुआत
बाल रोग विशेषज्ञ सतीश रंजन ने बताया कि इसकी शुरुआत गर्भावस्था से होनी चाहिए। इसके लिए गर्भवती को आयरन, कैल्शियम व फॉलिक एसिड लेना चाहिए। खजूर, गुड़, चना, दूध व दूध से बनी चीजें, चिकन अंडा, अनार, सेब, चीकू, अमरूद, पनीर, दाल का सेवन करें। खूब पानी पीएं दो घंटे के अंतराल पर कुछ न कुछ अवश्य खाती रहें। इससे गर्भस्थ शिशु को पूरा पोषक तत्व मिलेंगे और वह स्वस्थ होगा। जन्म के छह माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं।

एक साल बाद बच्चों को क्या आहार दें
छह माह बाद बच्चे को दूध के अलावा पतले चावल, दाल का पानी, अंडे की सफेदी दें। मीठी व नमकीन चीजें खाने को दें। बोतल से दूध न पिलाएं। दो साल के बाद बच्चों को दूध के अतिरिक्त चावल की खीर, दूध में साबूदाना, पनीर पीसकर दलिया में मिलाकर खिलाएं। खजूर दें, इसमें मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस सहित अन्य पोषक तत्व होते हैं। रोटी व हरी सब्जियां दें।

आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों से आते हैं कुपोषित बच्चे
गांवों में कमजोर बच्चों को सेहत सुधारने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है। लेकिन अति कुपोषित जो बच्चे मिलेंगे उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र पर भेजा जाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन (आरबीएसके) टीम गांव के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती है। इस दौरान कुपोषित मिलने वालेे बच्चों को पोेषण पुनर्वास केंद्र में लाकर भर्ती कराया जाता है।

खराब पड़ा टीवी, खिलौनी भी नहीं
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किए गए बच्चों के साथ इनकी मां भी रहती हैं। कम सेे कम 14 दिन तक इन्हें यहां रहना पड़ता है। अगर उम्र के हिसाब से बच्चे का वजन नहीं बढ़ा तो और अधिक दिन रखा जाता है। जितने दिन बच्चे के साथ मां रहेगी । उसको प्रतिदिन के हिसाब से 150 रुपये नकद और दोनों समय का भोजन, नाश्ता दिया जाता है। डिस्चार्ज होने के बाद घर जाने के लिए किराया भी मिलता है। यह नकद नहीं, इनके बैंक अकाउंट में भेजी जाती है। वार्ड में लगा टीवी खराब पड़ा है। बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त मात्रा में खिलौने भी नहीं हैं। अप्रैल माह में 13 और मई में नौ कुपोषित बच्चों को स्वस्थ किया गया है।

कोट
डायटीशियन के लिए डिमांड भेजी गई है। जिला अस्पताल के एक डॉक्टर को संबद्ध किया गया है। डॉक्टर के अनुसार ही बच्चों को भोजन दिया जाता है। बाकी जो भी कमियां हैं। उसे ठीक कर लिया जाएगा। कर्मचारियों के विलंब से आने की मुझे जानकारी नहीं है।
-डॉ. एचएस राय, सीएमएस
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