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Kushinagar News: सावधान! कहीं आपकी जमीन पर भू-माफियाओं ने तो नहीं दर्ज करा लिया है नाम
Tue, 11 Feb 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 11 Feb 2025 12:09 AM IST
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खड्डा। नदी उस पार की जमीनों पर भू-माफियाओं की नजर है। गोरखपुर सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) कोर्ट से फर्जी आदेश का परवाना तहसील प्रशासन को रजिस्टर्ड डाक से भेजकर दूसरे की जमीन पर अपना या चहेतों को नाम दर्ज करा ले रहे हैं। यह खेल भू-माफिया तहसील प्रशासन की मिलीभगत से कर रहे हैं। ऐसी शिकायत पहुंचने के बाद तहसील ने प्रशासन ने जांच बैठा दी है। इसको लेकर तहसील में तैनात कर्मचारियों और भू-माफियाओं में खलबली मची है।
खड्डा तहसील क्षेत्र के नदी उस पार के गांव शिवपुर, बसंतपुर और हरिहरपुर गांव की जमीनों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर भू-माफिया अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। तहसील में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल किया जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं और उच्चाधिकारियों तक इसकी शिकायत भी पहुंच चुकी है। सूत्रों की मानें तो करीब 100 एकड़ जमीन पर अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर मूल काश्तकार का नाम खारिज कराकर भू-माफियाओं ने अपना नाम दर्ज करा लिया है। इसकी जानकारी होने के बाद तहसील प्रशासन की बेचैनी बढ़ गई और तहसीलदार महेश कुमार ने जांच शुरू कर दी है।
गोरखपुर एआरओ कोर्ट में तैनात कर्मचारियों और खड्डा तहसील के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। शिवपुर ग्राम निवासी पवन पांडेय ने एसडीएम व तहसीलदार को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि शिवपुर निवासी सुखदेव, श्याम किशोर, कौशल्या और महराजगंज के साेहगीबरवा गांव निवासी शर्बा सिंह आदि ने गलत तरीके से राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने के लिए एआरओ कोर्ट गोरखपुर से फर्जी आदेश का परवाना तहसील प्रशासन को भिजवाया था। मूल काश्तकारों का नाम खारिज कराकर अपना नाम खतौनी में दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। तहसीलदार खड्डा महेश कुमार ने परवाना में दर्ज मुकदमा नंबर की ऑनलाइन जांच कराई तो उस नंबर का कोई मुकदमा नहीं पाया गया। तहसील ने वेरिफिकेशन के लिए एआरओ कोर्ट गोरखपुर यह मामला भेजा गया तो फर्जी निकला, लेकिन भू-माफिया मानने को तैयार नहीं थे। इस पर तहसीलदार खड्डा ने गोरखपुर एआरओ कोर्ट के पेशकार से दूरभाष पर संपर्क किया तो पेशकार ने बताया कि जितना भी आदेश व परवाना गया है वे सब फर्जी है। यह सुनकर तहसील भी चौक गए। इस खेल के पीछे गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर के सिंडिकेट काम कर रहा है।
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ऐसे हो रहा खेल
-नदी उस पार बसंतपुर, शिवपुर और हरिहरपुर आदि गांव हैं। वर्ष 1989 में डाकुओं ने 14 लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद तत्कालीन सीएम नारायण दत्त तिवारी पहुंचे और वहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नदी के दोनों तरफ सटे गांव की जमीनों को रिकाॅर्ड ऑपरेशन कराने के निर्देश दिए। उनके आदेश पर उक्त गांवों के रिकॉर्ड सर्वे का कार्य एआरओ गोरखपुर की देखरेख में चला। सर्वे के बाद अभिलेखों को पूर्ण करने के बाद खड्डा तहसील से मंगाया गया रिकाॅर्ड करीब छह साल पूर्व वापस कर दिया गया। वर्तमान में इन जमीनों का सभी रिकाॅर्ड तहसील में मौजूद है। गोरखपुर एआरओ कोर्ट से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन भू-माफिया तहसील और एआरओ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व के तारीखों में फर्जी आदेश तैयार कर खड्डा तहसील को आदेश की कापी का परवाना भेजकर जमीनों पर मूल काश्तकारों का नाम कटवाकर अपना दर्ज करा ले रहे हैं।
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उच्चाधिकारियों से शिकायत कर बनाते हैं दबाव
-गोरखपुर से एआरओ कार्यालय से जो परवाना रजिस्टर्ड डाक से आ रहा है। उसका कोई रिकाॅर्ड एआरओ कार्यालय में नहीं है। तहसीलदार की जांच में इसकी पुष्टि भी हो गई है। भू माफिया जालसाजों की मदद से अफसरों का फर्जी तरीके से पूर्व की तारीखों का आदेश बनाकर तहसील में भेजा जा रहा है। बिना जांच किए तहसील में तैनात कर्मचारी अफसरों को गुमराह कर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करा दे रहे हैं। इसमें क्षेत्र के राजस्वकर्मियों की भूमिका अहम है।
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मामला गंभीर है। प्रारंभिक जांच एआरओ न्यायालय गोरखपुर के नाम से फर्जी परवाना व आदेश भेजकर राजस्व रिकाॅर्ड में हेराफेरी का मामला सामने आया है। ऐसा फर्जी आदेश रजिस्टर्ड डाक से आया है जो जांच में फर्जी पाया गया है। इसकी जांच मैं स्वयं कर रहा हूं। एआरओ कार्यालय से भी जांच में मदद ली जाएगी। जांच पूरा होने के बाद इसमें शामिल भू-माफिया और जालसाजों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
- महेश कुमार, तहसीलदार, खड्डा
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खड्डा तहसील क्षेत्र के नदी उस पार के गांव शिवपुर, बसंतपुर और हरिहरपुर गांव की जमीनों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर भू-माफिया अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। तहसील में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल किया जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं और उच्चाधिकारियों तक इसकी शिकायत भी पहुंच चुकी है। सूत्रों की मानें तो करीब 100 एकड़ जमीन पर अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर मूल काश्तकार का नाम खारिज कराकर भू-माफियाओं ने अपना नाम दर्ज करा लिया है। इसकी जानकारी होने के बाद तहसील प्रशासन की बेचैनी बढ़ गई और तहसीलदार महेश कुमार ने जांच शुरू कर दी है।
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गोरखपुर एआरओ कोर्ट में तैनात कर्मचारियों और खड्डा तहसील के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। शिवपुर ग्राम निवासी पवन पांडेय ने एसडीएम व तहसीलदार को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि शिवपुर निवासी सुखदेव, श्याम किशोर, कौशल्या और महराजगंज के साेहगीबरवा गांव निवासी शर्बा सिंह आदि ने गलत तरीके से राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने के लिए एआरओ कोर्ट गोरखपुर से फर्जी आदेश का परवाना तहसील प्रशासन को भिजवाया था। मूल काश्तकारों का नाम खारिज कराकर अपना नाम खतौनी में दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। तहसीलदार खड्डा महेश कुमार ने परवाना में दर्ज मुकदमा नंबर की ऑनलाइन जांच कराई तो उस नंबर का कोई मुकदमा नहीं पाया गया। तहसील ने वेरिफिकेशन के लिए एआरओ कोर्ट गोरखपुर यह मामला भेजा गया तो फर्जी निकला, लेकिन भू-माफिया मानने को तैयार नहीं थे। इस पर तहसीलदार खड्डा ने गोरखपुर एआरओ कोर्ट के पेशकार से दूरभाष पर संपर्क किया तो पेशकार ने बताया कि जितना भी आदेश व परवाना गया है वे सब फर्जी है। यह सुनकर तहसील भी चौक गए। इस खेल के पीछे गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर के सिंडिकेट काम कर रहा है।
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ऐसे हो रहा खेल
-नदी उस पार बसंतपुर, शिवपुर और हरिहरपुर आदि गांव हैं। वर्ष 1989 में डाकुओं ने 14 लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद तत्कालीन सीएम नारायण दत्त तिवारी पहुंचे और वहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नदी के दोनों तरफ सटे गांव की जमीनों को रिकाॅर्ड ऑपरेशन कराने के निर्देश दिए। उनके आदेश पर उक्त गांवों के रिकॉर्ड सर्वे का कार्य एआरओ गोरखपुर की देखरेख में चला। सर्वे के बाद अभिलेखों को पूर्ण करने के बाद खड्डा तहसील से मंगाया गया रिकाॅर्ड करीब छह साल पूर्व वापस कर दिया गया। वर्तमान में इन जमीनों का सभी रिकाॅर्ड तहसील में मौजूद है। गोरखपुर एआरओ कोर्ट से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन भू-माफिया तहसील और एआरओ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व के तारीखों में फर्जी आदेश तैयार कर खड्डा तहसील को आदेश की कापी का परवाना भेजकर जमीनों पर मूल काश्तकारों का नाम कटवाकर अपना दर्ज करा ले रहे हैं।
उच्चाधिकारियों से शिकायत कर बनाते हैं दबाव
-गोरखपुर से एआरओ कार्यालय से जो परवाना रजिस्टर्ड डाक से आ रहा है। उसका कोई रिकाॅर्ड एआरओ कार्यालय में नहीं है। तहसीलदार की जांच में इसकी पुष्टि भी हो गई है। भू माफिया जालसाजों की मदद से अफसरों का फर्जी तरीके से पूर्व की तारीखों का आदेश बनाकर तहसील में भेजा जा रहा है। बिना जांच किए तहसील में तैनात कर्मचारी अफसरों को गुमराह कर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करा दे रहे हैं। इसमें क्षेत्र के राजस्वकर्मियों की भूमिका अहम है।
मामला गंभीर है। प्रारंभिक जांच एआरओ न्यायालय गोरखपुर के नाम से फर्जी परवाना व आदेश भेजकर राजस्व रिकाॅर्ड में हेराफेरी का मामला सामने आया है। ऐसा फर्जी आदेश रजिस्टर्ड डाक से आया है जो जांच में फर्जी पाया गया है। इसकी जांच मैं स्वयं कर रहा हूं। एआरओ कार्यालय से भी जांच में मदद ली जाएगी। जांच पूरा होने के बाद इसमें शामिल भू-माफिया और जालसाजों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
- महेश कुमार, तहसीलदार, खड्डा