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मां की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार
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पडरौना नगर के आवास विकास कॉलोनी में मूर्ति सजाता मूर्तिकार। संवाद
- फोटो : KUSHINAGAR
मां की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार
सप्तमी के पूर्व आर्डर पूरा करने के लिए दिनरात कर रहे मेहनत
पडरौना। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कलाकार अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रामकोला रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी, बावली चौक सहित अन्य जगहों पर प्रतिमाओं को बनाने का काम चल रहा है।
कोविड के बाद मूर्तिकार अपने कारोबार को लेकर उत्साहित हैं। मूर्ति कलाकारों का कहना है कि इस बार कारोबार में तेजी आई है। पहले से अधिक प्रतिमाएं बनाने का आर्डर मिला है। बिहार, बंगाल और विभिन्न जिलों से आए मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इनमें मां दुर्गा का राक्षसों का वध करते हुए तो शेर पर सवार मां दुर्गा की अलग-अलग आकृतियां, गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को आकार दिया जा रहा है।
मूर्तिकार सतीश कुशवाहा का कहना है कि कोरोना काल में हमने 50 प्रमिताएं बनाई थीं। इस बार करीब 100 प्रतिमाओं का आर्डर है। प्रहलाद ने बताया कि पिछली बार 20 प्रतिमाएं बनाई थीं। इस बार 25 प्रतिमाओं का ऑर्डर है। बाहर से आए कलाकारों को ज्यादा ग्राहक मिलते हैं। स्थानीय कलाकारों को काम कम मिलते हैं।
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पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार राजकुमान ने बताया कि वह लोग कोरोना काल में बेरोजगार हो गए थे। इस बार लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। मूर्तिकार मिट्ठू ने बताया कि पिछली बार पंडाल कम सजाए गए थे। इस वजह से प्रतिमाएं नहीं बनाई गई थी। इस साल अधिक प्रतिमाएं बना रहे हैं।
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सप्तमी के पूर्व आर्डर पूरा करने के लिए दिनरात कर रहे मेहनत
पडरौना। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कलाकार अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रामकोला रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी, बावली चौक सहित अन्य जगहों पर प्रतिमाओं को बनाने का काम चल रहा है।
कोविड के बाद मूर्तिकार अपने कारोबार को लेकर उत्साहित हैं। मूर्ति कलाकारों का कहना है कि इस बार कारोबार में तेजी आई है। पहले से अधिक प्रतिमाएं बनाने का आर्डर मिला है। बिहार, बंगाल और विभिन्न जिलों से आए मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इनमें मां दुर्गा का राक्षसों का वध करते हुए तो शेर पर सवार मां दुर्गा की अलग-अलग आकृतियां, गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को आकार दिया जा रहा है।
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मूर्तिकार सतीश कुशवाहा का कहना है कि कोरोना काल में हमने 50 प्रमिताएं बनाई थीं। इस बार करीब 100 प्रतिमाओं का आर्डर है। प्रहलाद ने बताया कि पिछली बार 20 प्रतिमाएं बनाई थीं। इस बार 25 प्रतिमाओं का ऑर्डर है। बाहर से आए कलाकारों को ज्यादा ग्राहक मिलते हैं। स्थानीय कलाकारों को काम कम मिलते हैं।
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पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार राजकुमान ने बताया कि वह लोग कोरोना काल में बेरोजगार हो गए थे। इस बार लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। मूर्तिकार मिट्ठू ने बताया कि पिछली बार पंडाल कम सजाए गए थे। इस वजह से प्रतिमाएं नहीं बनाई गई थी। इस साल अधिक प्रतिमाएं बना रहे हैं।