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Kushinagar News: शहर में दौड़ रहे करीब 400 ई-रिक्शा, स्टैंड की व्यवस्था नहीं
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सड़क पर खड़ी करने से लगता है जाम, ऑटो स्टैंड के ठेकेदार चालकों से करा रहे वसूली
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। शहर में ई-रिक्शा ने लोगों के आवागमन को आसान तो बनाया है, लेकिन यातायात व्यवस्था में दुश्वारियां भी बढ़ा दी हैं। सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ रहे ई-रिक्शा के लिए यातायात नियमों का कोई मायने नहीं है। स्टैंड न होने से सड़क पर कहीं पर भी ई-रिक्शा खड़े करके चालक सवारी बैठा रहे हैं। शहर में लगने वाले जाम के लिए 50 प्रतिशत इन्हें जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, ई-रिक्शा चालकों से ऑटो स्टैंड के ठेकेदार स्टैंड के नाम पर वसूली तो कर रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें स्टैंड में जगह नहीं दी जा रही है।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि मजबूरी में वह सड़क पर ई-रिक्शा खड़े करते हैं। अगर स्टैंड की व्यवस्था कर दी जाए तो वह भी नियमानुसार सवारी लेकर गंतव्य को जाएंगे। शहर में मौजूदा समय में करीब 400 ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शहर के सुभाष चौक, रामकोला रोड, धर्मशाला रोड, कोतवाली रोड, तिलक चौक, जटहा रोड और कठकुइयां मोड़ पर तो ई-रिक्शा चालकों की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से वाहन चलाने लगते हैं। शहर की मुख्य सड़क पर इनके चलने के लिए कोई लेन नहीं है, इसलिए यह कहीं भी चलते हैं। रुक-रुक कर शहर में लग रहे जाम का जिम्मेदार भी इन्हें ही माना जाता है।
ऐसे में ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि उनके लिए कहीं कोई स्टैंड की व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को एक तरफ बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। स्टैंड के नाम पर ऑटो स्टैंड के ठेकेदार अपने लोगों से वसूली भी कराते हैं, लेकिन जब ऑटो स्टैंड में ईरिक्शा खड़े किए जाते हैं तो ठेकेदार और वहां काम करने वाले लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। मजबूरी में उन्हें सड़क की पटरियों पर सवारी बैठानी पड़ती है।
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जल्द ही ई-रिक्शा चालकों के रूट निर्धारित कर उनके स्टैंड की व्यवस्था की जाएगी।
-संतराम सरोज, ईओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। शहर में ई-रिक्शा ने लोगों के आवागमन को आसान तो बनाया है, लेकिन यातायात व्यवस्था में दुश्वारियां भी बढ़ा दी हैं। सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ रहे ई-रिक्शा के लिए यातायात नियमों का कोई मायने नहीं है। स्टैंड न होने से सड़क पर कहीं पर भी ई-रिक्शा खड़े करके चालक सवारी बैठा रहे हैं। शहर में लगने वाले जाम के लिए 50 प्रतिशत इन्हें जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, ई-रिक्शा चालकों से ऑटो स्टैंड के ठेकेदार स्टैंड के नाम पर वसूली तो कर रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें स्टैंड में जगह नहीं दी जा रही है।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि मजबूरी में वह सड़क पर ई-रिक्शा खड़े करते हैं। अगर स्टैंड की व्यवस्था कर दी जाए तो वह भी नियमानुसार सवारी लेकर गंतव्य को जाएंगे। शहर में मौजूदा समय में करीब 400 ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शहर के सुभाष चौक, रामकोला रोड, धर्मशाला रोड, कोतवाली रोड, तिलक चौक, जटहा रोड और कठकुइयां मोड़ पर तो ई-रिक्शा चालकों की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से वाहन चलाने लगते हैं। शहर की मुख्य सड़क पर इनके चलने के लिए कोई लेन नहीं है, इसलिए यह कहीं भी चलते हैं। रुक-रुक कर शहर में लग रहे जाम का जिम्मेदार भी इन्हें ही माना जाता है।
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ऐसे में ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि उनके लिए कहीं कोई स्टैंड की व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को एक तरफ बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। स्टैंड के नाम पर ऑटो स्टैंड के ठेकेदार अपने लोगों से वसूली भी कराते हैं, लेकिन जब ऑटो स्टैंड में ईरिक्शा खड़े किए जाते हैं तो ठेकेदार और वहां काम करने वाले लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। मजबूरी में उन्हें सड़क की पटरियों पर सवारी बैठानी पड़ती है।
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जल्द ही ई-रिक्शा चालकों के रूट निर्धारित कर उनके स्टैंड की व्यवस्था की जाएगी।
-संतराम सरोज, ईओ