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हैं...खानाबदोश, अब नागरिक बनने का दबाव
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खानाबदोश की जिंदगी जीने वालों की तरफ से सरदारनगर ट्रांबे लाइन की जमीन पर डाली गईं झोपड़ियां।संव?
- फोटो : KUSHINAGAR
हैं...खानाबदोश, अब नागरिक बनाने का दबाव
ट्रांबे लाइन की जमीन पर टेंट डाल कर रह रहे हैं खानाबदोश
ग्राम प्रधान पर डाला जा रहा है निवास प्रमाणित करने का दबाव
हाटा(कुशीनगर)। सरदार नगर चीनी मिल के ट्रांबे लाइन की खाली जमीन पर बंचरा मठ के पास 100 से अधिक ऐसे लोग टेंट डालकर रह रहे हैं, जिनका स्थायी पता ही नहीं है। ये कहां से आए और कैसे यहां आए हैं, इस बारे में खुद भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। खानाबदोश की तरह जीवन यापन करने वाले ये लोग अपना पहचान पत्र बनवाने के लिए परेशान हैं। जबकि ग्राम प्रधान का कहना है कि ये लोग अपना निवास प्रमाणित करने के लिए तरह-तरह से दबाव बना रहे हैं।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के कई जगहों से होकर सरदार नगर चीनी मिल की ट्रांबे लाइन गुजरी है। इसके दोनों तरफ कई एकड़ खाली जमीन है। बंचरा मठ के पास ट्रांबे लाइन की करीब दस एकड़ जमीन पर दस वर्षों से टेंट डालकर तीस से अधिक परिवार रह रहे हैं। इनमें 100 से अधिक सदस्य हैं। कुछ लोग ईंट-भट्ठे पर तो कुछ दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
ग्राम प्रधान सुभाष चौहान ने बताया कि इनमें कई लोग उनके पास अपना निवास प्रमाणित कराने आ चुके हैं, लेकिन उनके ग्राम सभा के मूल निवासी नहीं हैं। ये कहां से आए हैं, इसकी भी पुष्ट जानकारी ये लोग नहीं देते हैं। इसलिए निवास प्रमाणित करने से मना कर दिया है।
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सबसे पास है मोबाइल फोन
खानाबदोश लोगों में से अधिकांश के पास मोबाइल फोन हैं। अब सवाल यह है कि जब इन लोगों के पास पहचान पत्र नहीं है तो सिम कार्ड कैसे मिल जा रहा है। इस मुद्दे पर स्थानीय खुफिया एजेंसियां भी ध्यान नहीं दे रही हैं।
...
कोट
ये लोग कहां से आए हैं, यह पता लगाया जाएगा। रोहिंग्या हैं या कोई और, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।
पीयूष कांत राय, सीओ कसया
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ट्रांबे लाइन की जमीन पर टेंट डाल कर रह रहे हैं खानाबदोश
ग्राम प्रधान पर डाला जा रहा है निवास प्रमाणित करने का दबाव
हाटा(कुशीनगर)। सरदार नगर चीनी मिल के ट्रांबे लाइन की खाली जमीन पर बंचरा मठ के पास 100 से अधिक ऐसे लोग टेंट डालकर रह रहे हैं, जिनका स्थायी पता ही नहीं है। ये कहां से आए और कैसे यहां आए हैं, इस बारे में खुद भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। खानाबदोश की तरह जीवन यापन करने वाले ये लोग अपना पहचान पत्र बनवाने के लिए परेशान हैं। जबकि ग्राम प्रधान का कहना है कि ये लोग अपना निवास प्रमाणित करने के लिए तरह-तरह से दबाव बना रहे हैं।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के कई जगहों से होकर सरदार नगर चीनी मिल की ट्रांबे लाइन गुजरी है। इसके दोनों तरफ कई एकड़ खाली जमीन है। बंचरा मठ के पास ट्रांबे लाइन की करीब दस एकड़ जमीन पर दस वर्षों से टेंट डालकर तीस से अधिक परिवार रह रहे हैं। इनमें 100 से अधिक सदस्य हैं। कुछ लोग ईंट-भट्ठे पर तो कुछ दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
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ग्राम प्रधान सुभाष चौहान ने बताया कि इनमें कई लोग उनके पास अपना निवास प्रमाणित कराने आ चुके हैं, लेकिन उनके ग्राम सभा के मूल निवासी नहीं हैं। ये कहां से आए हैं, इसकी भी पुष्ट जानकारी ये लोग नहीं देते हैं। इसलिए निवास प्रमाणित करने से मना कर दिया है।
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सबसे पास है मोबाइल फोन
खानाबदोश लोगों में से अधिकांश के पास मोबाइल फोन हैं। अब सवाल यह है कि जब इन लोगों के पास पहचान पत्र नहीं है तो सिम कार्ड कैसे मिल जा रहा है। इस मुद्दे पर स्थानीय खुफिया एजेंसियां भी ध्यान नहीं दे रही हैं।
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कोट
ये लोग कहां से आए हैं, यह पता लगाया जाएगा। रोहिंग्या हैं या कोई और, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।
पीयूष कांत राय, सीओ कसया