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Kushinagar News: नाराज छात्रों ने नदी घाट पर किया प्रदर्शन तब आई नाव

Tue, 12 Sep 2023 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 12 Sep 2023 12:49 AM IST
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Angry students protested at the river ghat, then the boat came
गोलाघाट से नाव हटाए जाने पर हंगामा करते छात्र
कुशीनगर/तमकुहीरोड। घर से स्कूल जाने के लिए सोमवार को निकले छात्र नदी घाट पर पहुंचे तो नाव नहीं थी। एक घंटे इंतजार के बाद भी नाव नहीं आई। इससे नाराज छात्र और गांववालों ने प्रदर्शन कर प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया। एसडीएम तक मामला पहुंचने के बाद जिम्मेदर हरकत में आए और तीन घंटे बाद नाव घाट भेजी गई। इसके बाद नाराज छात्रों का गुस्सा शांत हुआ। देर होने की वजह से कुछ छात्र घर लौट गए। नाव हटने की वजह नाविक का भुगतान नहीं होना बताया जा रहा है।
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पिपराघाट गांव के गोलाघाट स्थित बांसी नदी के उस तार दस से अधिक गांव हैं। पीपा का पुल हटने के बाद गांववालों को आने-जाने का साधन छोटी नाव है, जो प्रशासन की ओर से मुहैया कराई गई है। एक माह से नाविक का भुगतान नहीं हुआ है। इससे नाराज होकर नाविक ने नाव हटा दी थी। सोमवार को सुबह छह बजे से नदी घाट पर लोग पहुंचने लगे। सात बजे स्कूल जाने के लिए 30 से अधिक छात्र नदी घाट पर पहुंचे। इंतजार के बाद भी नाव नहीं आई तो प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। एसडीएम तक मामला पहुंचने के बाद कानूनगो जयंत गुप्ता और लेखपाल रविकांत को प्रधान रामजी निषाद ने फोन कर जानकारी दी। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने नाविक गौरीशंकर निषाद से वार्ता कर अविलंब बकाया भुगतान का आश्वासन दिया। इसके बाद नाव लेकर नाविक पहुंचा और आवागमन शुरू हो सका।
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स्थायी समाधान के लिए पक्के पुल का निर्माण जरूरी
नदी उस पार बसे जोगनी, इमिलिया टोला, बुटन टोला, प्रभुनाथ चौराहा, नौका टोला, मोतीराय टोला समेत दस से अधिक गांवों के लोगों को स्कूल, बाजार, अस्पताल आने-जाने के लिए एकमात्र साधन नाव है। क्योंकि वर्ष 2012 में यहां पर पीपा का पुल लगा था। बरसात में 15 जून के बाद पुल को खोल दिया जाता है। इस वर्ष बांसी नदी में देर से उफान आने के कारण 11 अगस्त को पुल खोला गया। गांववालों को आने-जाने के लिए सरकारी नाव लगा दी गई। इन गांवों के छात्र-छात्राएं सेवरही के विभिन्न स्कूलों में पढ़ते हैं और कोचिंग करते हैं। सुबह अचानक नाव हटने के कारण घाट पर भीड़ लग गई। राजकिशोर, निरंकारी, सुदामा यादव, चंद्रिका मुखिया, पवहारी यादव, नंदलाल निषाद, नवमी साह, विवेक यादव, विश्वनाथ चौधरी और मोहन यादव का कहना है कि करीब दस हजार की आबादी के आवागमन का एक मात्र साधन पीपा का पुल और नाव है। जब तक गोलाघाट के बांसी नदी पर पक्के पुल का निर्माण नही होगा, तक तक लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ेंगी।
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पुल बनना तो दूर, अब तक पहल भी नहीं हुई
गोलाघाट पर बने पीपा पुल की जगह पक्के पुल के निर्माण की मांग को लेकर पिछले विधान सभा चुनाव मेें तीन मार्च को होने वाले मतदान का विरोध जोगनी गांव के लोगों ने किया था। गोलाघाट में पुल नहीं तो वोट नहीं का बैनर लोगों ने लगाया था। तीन घंटे तक मतदान का बहिष्कार चला था। चुनाव आयोग ने इसका संज्ञान लिया था और तहसील प्रशासन पहुंच गया था। तत्कालीन एसडीएम ने चुनाव बाद गोलाघाट के बांसी नदी पर पक्का पुल निर्माण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन डेढ़ साल बाद भी पुल निर्माण के लिए कोई पहल प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुई। जान जोखिम में डालकर नाव से आना-जाना लोगों की मजबूरी है।
- नदी के उस पार दस हजार की आबादी गांवों में है। आनेे-जाने के लिए पीपा का पुल और बरसात में नाव ही सहारा है। इसके चलते लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छोटे बच्चों को चाहकर भी स्कूल नहीं भेजा जाता है।-रामाजी निषाद, प्रधान, पिपराघाट एहतमाली
-बरसात में इस पीपे के पुल को खोल दिया जाता है। खेती किसानी से आवागमन में दिक्कतें होती हैं। रात को इमरजेंसी में खुद नाव खेनी पड़ती है। इसे लेकर जनप्रतिनिधि और अफसर गंभीर नहीं हैं। पक्का पुल निर्माण जरूरी है। -सरल शर्मा, बीडीसी सदस्य
- पीपा का पुल हटा दिए जाने के बाद सर्वाधिक दिक्कत छात्र-छात्राओं की होती है। सेवरही पढ़ने के लिए जाने वाले छात्र सुबह ही घर से निकलते हैं। एक घंटे सभी छात्रों को नदी पार करने में लग जाते हैं। जनहित में पुल का निर्माण होना चाहिए।-ध्रुव निषाद, राजपुर खास

बीच भंवर में फंस गई थी नाव, पलटने से जान गंवा चुके हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। गंडक और बांसी नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों में खेती करने वाले लोगों को जान जोखिम में डालकर नाव से आना जाना पड़ता है। पूर्व में कई बार ऐसा हुआ कि नाव नदी के बीच भंवर में फंस गई। कुछ मामलों में नाव के पलटने से लोगों की जान भी चुकी है। नाव में 100 से अधिक लोग फंस गए थे। डीएम-एसपी ने कैंप कर लोगों को सुरक्षित निकलवाया था। बता दें गंडक नदी के उस पार दर्जनों गांवों के लोग अपना डेरा बनाकर रहते हैं। वहां ट्रैक्टर-ट्राली, मवेशी रखे हैं। खेती करते हैं। जबकि दुदही, कोकिलपट्टी, बैकुंठपुर कोठी, तिलकपट्टी समेत दर्जनों गांव के सैकड़ों की संख्या में मजदूरों एवं स्वयं खेती करने वाले लोग आते जाते हैं, लेकिन कई बार घटना घट चुकी है। 12 अक्तूबर 2021 में नाव में काफी संख्या में लोग सवार थे। नाव का पंप फट जाने से फंस गए थे। रेस्क्यू कर निकाला गया था।उसी साल 15 जून को 200 से अधिक लोग नदी के बीच में नाव में फंस गए थे। डीएम-एसपी पूरी रात बंधे पर गुजारे। रेस्क्यू कर लोगों को बाहर निकलवाए थे। 27 दिसंबर 2021 को नाव से ट्रैक्टर ट्राली नदी में गिर गई थी। उस साल दो सप्ताह के अंदर नदी में डूबने से छह लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा कई अन्य हादसे हो चुुके हैं।
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