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Kushinagar News: बाढ़ के बीच राहत का बोझ फिर भी चेहरे पर मुस्कान, मां के साथ कदम मिलाता बचपन
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बाढ़ क्षेत्र तमकुही के चैन पट्टी में बाढ़ राहत सामग्री मिलने के बाद मुस्कुराते हुए 50 किलोग्राम
गुरवलिया बाजार। एपी बांध टूटने के बाद बाढ़ के पानी ने घरों तक तबाही मचाई। जरूरत के सारे सामान छिन गए और घर डूब गए हैं। चैन पट्टी में शनिवार को दोपहर करीब ढाई बजे ट्रक से बाढ़ राहत सामग्री बंट रही थी।
इसी बीच एक बच्चे की मुस्कान शायद बाढ़ भी नहीं छीन सकी थी। इसके अलावा मां और बेटे कदमताल कर रहे थे। राहत सामग्री लेकर लौटती मां के साथ कदम मिलाता एक मासूम खुद भी सामान का बोझ संभाले दिखा।
एक तस्वीर में सिर पर भारी बोरी उठाए बच्चा कैमरे की ओर मुस्कुराता नजर आया तो दूसरी तस्वीर में मां-बेटा राहत सामग्री लेकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। कोई साइकिल के कॅरिअर पर बोरियां बांध कर ले जा रहा था। मां आगे-आगे, बेटा पीछे नहीं बल्कि उसके साथ जैसे बाढ़ के इस मुश्किल वक्त में दोनों एक-दूसरे का सहारा हों। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचने के बाद लोगों के लिए उसे सुरक्षित ठिकाने तक ले जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। बड़े लोगों के साथ बच्चे भी अपनी क्षमता के अनुसार परिवार का हाथ बंटा रहे हैं।
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शनिवार को चैन पट्टी, रकबा जंगल पट्टी आदि जगहों पर कई तस्वीर बाढ़ के व्यथा और विकराल माहौल में देखे गए। भीड़ में एक मासूम दिखा। उसके लिए शायद बोरी का वजन उतना मायने नहीं रखता, जितना मां के साथ कदम मिलाकर चलने का उत्साह। चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि मुश्किल हालात के बीच भी बचपन ने अपनी मासूमियत बचाकर रखी है। मां-बेटे की यह तस्वीर बाढ़ की एक अलग कहानी कहती है। संवाद
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इसी बीच एक बच्चे की मुस्कान शायद बाढ़ भी नहीं छीन सकी थी। इसके अलावा मां और बेटे कदमताल कर रहे थे। राहत सामग्री लेकर लौटती मां के साथ कदम मिलाता एक मासूम खुद भी सामान का बोझ संभाले दिखा।
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एक तस्वीर में सिर पर भारी बोरी उठाए बच्चा कैमरे की ओर मुस्कुराता नजर आया तो दूसरी तस्वीर में मां-बेटा राहत सामग्री लेकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। कोई साइकिल के कॅरिअर पर बोरियां बांध कर ले जा रहा था। मां आगे-आगे, बेटा पीछे नहीं बल्कि उसके साथ जैसे बाढ़ के इस मुश्किल वक्त में दोनों एक-दूसरे का सहारा हों। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचने के बाद लोगों के लिए उसे सुरक्षित ठिकाने तक ले जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। बड़े लोगों के साथ बच्चे भी अपनी क्षमता के अनुसार परिवार का हाथ बंटा रहे हैं।
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शनिवार को चैन पट्टी, रकबा जंगल पट्टी आदि जगहों पर कई तस्वीर बाढ़ के व्यथा और विकराल माहौल में देखे गए। भीड़ में एक मासूम दिखा। उसके लिए शायद बोरी का वजन उतना मायने नहीं रखता, जितना मां के साथ कदम मिलाकर चलने का उत्साह। चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि मुश्किल हालात के बीच भी बचपन ने अपनी मासूमियत बचाकर रखी है। मां-बेटे की यह तस्वीर बाढ़ की एक अलग कहानी कहती है। संवाद