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Kushinagar News: सब्र करने वालों पर बरसती है अल्लाह की रहमत
Thu, 13 Mar 2025 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 13 Mar 2025 12:42 AM IST
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जानकीनगर। रमजान उल मुबारक का दूसरा अशरा इंसानों के लिए मगफिरत है। इस अशरे में अल्लाह सब्र करने वाले बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। रमजानुल मुबारक का पहला अशरा रहमत व बरकत का महीना है। दूसरे अशरे में मगफिरत की शुरूआत हो गई है। वैसे तो सभी दिन अल्लाह के हैं। रात भी उसी का है, लेकिन उसकी रहमत अपने बंदों को नवाजने के लिए बहाने ढूंढती रहती है। इसलिए उसने इसी महीने में किसी रात को लैलतुल कदर बनाया और किसी को मुबारक बना दिया।
ये बातें परसौना गांव के ईमाम हाफिज अब्दुल बासित रजवी ने कही। उन्होंने कहा कि रवायत है कि रमजानुल मुबारक का पहला हिस्सा रहमत का है, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से आजादी का है। अब यह इंसान की अपनी कोशिश है, कि वह इस माहे मुबारक से कितना फायदा उठाता है। अपने आप को किस तरह रहमत व मगफिरत के लिए ढालता है। इसमें इबादत का सवाब बढ़ा दिया जाता है, फर्ज का सवाब 70 गुना हो जाता है। जबकि नफिल का सवाब फर्ज के बराबर हो जाता है। यही मामला सदका व जकात यानि की दान भी है। इनका भी सवाब बढ़ जाता है। इसलिए दुनिया के मुसलमान से अपील है कि इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा नमाज पढ़े, रोजा रखें, जकात व सदका दें। इसके अलावा गरीबों व फकीरों से शालिनता के साथ पेश आएं, ताकि उनकी दुआ रहमी से हमारा दीने इस्लाम बचा रहे। खास तौर से मदरसे व मस्जिद को आबाद करने की कोशिश करें। उन्हीं के जरिए हमारा इस्लाम और इस्लाम के निगहबान बचे हुए हैं और बचाए जा सकते हैं।
00000
13 मार्च
सुन्नी -इफ्तार-06:05 शाम
शिया -इफ्तार -06:13 शाम
14 मार्च
सुन्नी - सेहरी -4:45 सुबह
शिया -सेहरी -4:37 सुबह
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ये बातें परसौना गांव के ईमाम हाफिज अब्दुल बासित रजवी ने कही। उन्होंने कहा कि रवायत है कि रमजानुल मुबारक का पहला हिस्सा रहमत का है, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से आजादी का है। अब यह इंसान की अपनी कोशिश है, कि वह इस माहे मुबारक से कितना फायदा उठाता है। अपने आप को किस तरह रहमत व मगफिरत के लिए ढालता है। इसमें इबादत का सवाब बढ़ा दिया जाता है, फर्ज का सवाब 70 गुना हो जाता है। जबकि नफिल का सवाब फर्ज के बराबर हो जाता है। यही मामला सदका व जकात यानि की दान भी है। इनका भी सवाब बढ़ जाता है। इसलिए दुनिया के मुसलमान से अपील है कि इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा नमाज पढ़े, रोजा रखें, जकात व सदका दें। इसके अलावा गरीबों व फकीरों से शालिनता के साथ पेश आएं, ताकि उनकी दुआ रहमी से हमारा दीने इस्लाम बचा रहे। खास तौर से मदरसे व मस्जिद को आबाद करने की कोशिश करें। उन्हीं के जरिए हमारा इस्लाम और इस्लाम के निगहबान बचे हुए हैं और बचाए जा सकते हैं।
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13 मार्च
सुन्नी -इफ्तार-06:05 शाम
शिया -इफ्तार -06:13 शाम
14 मार्च
सुन्नी - सेहरी -4:45 सुबह
शिया -सेहरी -4:37 सुबह