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सोमालिया में फंसे सुुग्रीव समेत सभी छह लोग पहुंचे घर
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बसंतपुर में परिवार के साथ मौजूद सुग्रीव कुशवाहा।
- फोटो : KUSHINAGAR
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सोमालिया में फंसे सुुग्रीव समेत सभी छह लोग पहुंचे घर
पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। सोमालिया में फंसे नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के ग्राम सभा बसंतपुर निवासी सुग्रीव कुशवाहा पांच अन्य मित्रों के साथ रविवार की शाम घर लौट आए। खड्डा विधायक के प्रयास से ये सभी लोग दिसंबर में वहां से मुक्त हुए थे। 33 में से 27 लोग दिसंबर में घर आ गए थे। रविवार को लौटे छह लोगों में सुग्रीव के अलावा एक-एक महराजगंज और संतकबीरनगर। जबकि एक गोरखपुर का निवासी है। दो लोग बिहार के रहने वाले हैं।
ग्राम सभा बसंतपुर के नेवाज छपरा निवासी सुग्रीव कुशवाहा ने बताया कि घर की माली हालत को सुधारने के लिए 30 जनवरी-2020 को सोमालिया की राजधानी मोगादिश स्थित एक स्टील कंपनी में कामगार के रूप में गए थे। दो माह तक कार्य चला। मार्च में लॉकडाउन के कारण कंपनी बंद हो गई। वहां सुग्रीव समेत कुल 33 भारतीय फंस गए। मार्च से अक्तूबर तक कामगारों के पास कोई काम नहीं था। सुग्रीव का कहना है कि घर भेजने की बात पर कंपनी के अधिकारी धमकी देते थे। बाहर निकलने पर मारपीट की जाती थी। ऐसा लग रहा था की अब वतन नहीं जा पाएंगे। एक मौका भी आया, लेकिन यह सोचा कर वहां से नहीं भगे कि अगर अकेले लौटे तो बाकी साथी कभी वतन नहीं लौट पाएंगे। क्योंकि वे सभी कम पढ़े लिखे थे। संकट की इस घड़ी में सुग्रीव ने किसी तरह से खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी से फोन पर संपर्क कर अपनी व्यथा सुनाई। विधायक ने मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि का मोबाइल फोन नंबर दिया। उनके जरिए 22 अक्तूबर को विदेश मंत्री जयशंकर को ट्वीट किया गया। इसके अलावा केन्या स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क कर अपनी बात कही गई। दूतावास के अधिकारी कंपनी पहुंचे और सभी 33 भारतीयों की वापसी के लिए वार्ता हुई। वहां फंसे लोगों को शिफ्टों में भेजने की बात हुई। सुग्रीव ने पहले शिफ्ट में खुद स्वदेश लौटने की बजाय अन्य साथियों की वापसी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद तीन शिफ्ट में गोरखपुर मंडल के 21 कामगारों सहित कुल 27 भारतीयों को दिसंबर में स्वदेश वापसी मौका मिला। अपने पांच साथियों महराजगंज के दिलीप, संतकबीरनगर के लालता प्रसाद, गोरखपुर के लल्लन बेलदार और बिहार के सुग्रीव सिंह व अरविंद कुमार के साथ सुग्रीव 14 जनवरी को सोमालिया से देश के लिए चले। 16 जनवरी को दिल्ली पहुंचे और वहां से 17 जनवरी की शाम को घर पहुंचे। एक वर्ष बाद अपनों के बीच पहुंचकर सुग्रीव बेहद खुश नजर आए।
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पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। सोमालिया में फंसे नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के ग्राम सभा बसंतपुर निवासी सुग्रीव कुशवाहा पांच अन्य मित्रों के साथ रविवार की शाम घर लौट आए। खड्डा विधायक के प्रयास से ये सभी लोग दिसंबर में वहां से मुक्त हुए थे। 33 में से 27 लोग दिसंबर में घर आ गए थे। रविवार को लौटे छह लोगों में सुग्रीव के अलावा एक-एक महराजगंज और संतकबीरनगर। जबकि एक गोरखपुर का निवासी है। दो लोग बिहार के रहने वाले हैं।
ग्राम सभा बसंतपुर के नेवाज छपरा निवासी सुग्रीव कुशवाहा ने बताया कि घर की माली हालत को सुधारने के लिए 30 जनवरी-2020 को सोमालिया की राजधानी मोगादिश स्थित एक स्टील कंपनी में कामगार के रूप में गए थे। दो माह तक कार्य चला। मार्च में लॉकडाउन के कारण कंपनी बंद हो गई। वहां सुग्रीव समेत कुल 33 भारतीय फंस गए। मार्च से अक्तूबर तक कामगारों के पास कोई काम नहीं था। सुग्रीव का कहना है कि घर भेजने की बात पर कंपनी के अधिकारी धमकी देते थे। बाहर निकलने पर मारपीट की जाती थी। ऐसा लग रहा था की अब वतन नहीं जा पाएंगे। एक मौका भी आया, लेकिन यह सोचा कर वहां से नहीं भगे कि अगर अकेले लौटे तो बाकी साथी कभी वतन नहीं लौट पाएंगे। क्योंकि वे सभी कम पढ़े लिखे थे। संकट की इस घड़ी में सुग्रीव ने किसी तरह से खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी से फोन पर संपर्क कर अपनी व्यथा सुनाई। विधायक ने मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि का मोबाइल फोन नंबर दिया। उनके जरिए 22 अक्तूबर को विदेश मंत्री जयशंकर को ट्वीट किया गया। इसके अलावा केन्या स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क कर अपनी बात कही गई। दूतावास के अधिकारी कंपनी पहुंचे और सभी 33 भारतीयों की वापसी के लिए वार्ता हुई। वहां फंसे लोगों को शिफ्टों में भेजने की बात हुई। सुग्रीव ने पहले शिफ्ट में खुद स्वदेश लौटने की बजाय अन्य साथियों की वापसी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद तीन शिफ्ट में गोरखपुर मंडल के 21 कामगारों सहित कुल 27 भारतीयों को दिसंबर में स्वदेश वापसी मौका मिला। अपने पांच साथियों महराजगंज के दिलीप, संतकबीरनगर के लालता प्रसाद, गोरखपुर के लल्लन बेलदार और बिहार के सुग्रीव सिंह व अरविंद कुमार के साथ सुग्रीव 14 जनवरी को सोमालिया से देश के लिए चले। 16 जनवरी को दिल्ली पहुंचे और वहां से 17 जनवरी की शाम को घर पहुंचे। एक वर्ष बाद अपनों के बीच पहुंचकर सुग्रीव बेहद खुश नजर आए।
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