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Kushinagar News: एक को छोड़ सभी ऑक्सीजन प्लांट तत्काल करेंगे काम
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छितौनी नगर पंचायत में बंद पड़ा कोविड अस्पताल।
- फोटो : KUSHINAGAR
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एक को छोड़ सभी ऑक्सीजन प्लांट तत्काल करेंगे काम
कोविड से बचाव की तैयारियां तेज हुईं
- कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद विभाग और जनप्रतिनिधियों की तरफ से लगाए गए प्लांट हैं दुरुस्त
- जिला अस्पताल में उपलब्ध हैं 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
- आरटीपीसीआर लैब में अब भी होती है 30-40 लोगों की प्रतिदिन कोविड जांच
पडरौना। चीन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण से खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। इसे लेकर प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार ने इससे बचाव की तैयारी तेज कर दी है। दूसरे देशों से आने वाले लोगों की कोविड जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे देखते हुए कोरोना महामारी की दूसरी लहर में लोगों की ऑक्सीजन की कमी से मौत को देखते हुए जनप्रतिनिधियों की तरफ से जनपद के अस्पतालों में स्थापित कराए गए ऑक्सीजन प्लांटों के बारे में बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई। जिसमें एक को छोड़कर अन्य सभी ठीक स्थिति में पाए गए। बताया गया कि आवश्यकता के अनुरूप इनके ऑक्सीजन का प्रयोग भी किया जाता है। इसके अलावा सीएमओ ने अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने वाले यात्रियों की कोविड जांच के निर्देश दिए हैं।
पहली लहर में ही कोरोना महामारी को लेकर जनपद के लोगों में काफी भय रहा। शासन-प्रशासन की तरफ से काफी सख्ती बरती गई। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से बहुत से लोगों की जान गई, जिनमें से सौ से ही ज्यादा मौतें सरकारी रिकार्ड में ही दर्ज हैं। ऑक्सीजन की कमी से हर तरफ हाहाकार मचा था। स्थिति कुछ सामान्य हुई तो सरकारी विभाग, विधायक, नगरपालिका अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी निधि से ऑक्सीजन प्लांट और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगवाए। अकेले जिला अस्पताल में चार, पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में एक, छितौनी में एक और सेवरही व सपहां में एक-एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगवाए गए थे। जिला अस्पताल में एमएलए कोटे से लगे एक ऑक्सीजन प्लांट में पिछले साल आग लग गई थी, जो अब तक नहीं बन सका है। बाकी तीनों ऑक्सीजन प्लांट से 1,300 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है। इस अस्पताल में इन प्लांटों से पाइपलाइन के जरिए आवश्यकता के अनुरूप वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। इसके अलावा यहां 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रखे हुए हैं। जनपद के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए 30-40 नमूनों की प्रतिदिन जांच आरटीपीसीआर लैब में होती है। हालांकि, सभी रिपोर्ट निगेटिव आती है।
पडरौना में मशीन है, लेकिन जेनरेटर नहीं
पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में ऑक्सीजन प्लांट नगरपालिका प्रशासन की तरफ से लगवाया गया है। बिजली रहते आवश्यकता पड़ने पर इससे ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, लेकिन बिजली कट जाने पर आपूर्ति बंद हो जाती है। इसके प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने सीएमओ से वार्ता की थी। सीएमओ की तरफ से जेनरेटर उपलब्ध कराने का प्रयास करने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने नगरपालिका प्रशासन को भी अवगत कराया है। उन्हें बताया गया कि इसमें बड़ा जेनरेटर लगता है। यदि लग भी जाए तो डीजल का फंड नहीं आता।
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330 लीटर प्रति मिनट की क्षमता का सेवरही में है प्लांट
सेवरही सीएचसी में 330 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगा है, जो चालू हालत में है। इसे पिछले साल सेवरही चीनी मिल की तरफ से लगवाया गया था। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अमित जायसवाल ने बताया कि फिलहाल कोरोना का कोई मरीज नहीं है। जब आवश्यकता होगी, इसे चालू कर ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाएगा।
डीआरडीए से छितौनी में लगा है प्लांट
अगस्त 2021 में छितौनी पीएचसी परिसर में डीआरडीए की तरफ से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। यहां 100 बेड के कोविड अस्पताल का निर्माण कराया गया था। इसमें वेंटीलेटर से लेकर ऑक्सीजन तक हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। इस अस्पताल के संचालन के लिए तत्कालीन विधायक जटाशंकर त्रिपाठी के पत्र पर तत्कालीन डीएम एस. राजलिंगम ने डॉक्टरों सहित 55 स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कर्मियों की उपलब्धता न होंने के कारण अस्पताल चालू नहीं हो सका।
जनपद में नौ ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। एक को छोड़कर सभी चालू हालत में हैं। फिलहाल अभी इनकी जरूरत नहीं है, लेकिन इन्हें तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। कुशीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले यात्रियों की शुक्रवार से कोविड जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए निर्देश दे दिया गया है।
डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
जिला अस्पताल में चार ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। इनमें एमएलए कोटे से लगा एक प्लांट पिछले साल जल गया था, जो अब तक ठीक नहीं हो पाया है। अन्य तीन प्लांटों से 1,300 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट उत्पादन की क्षमता है। तीनों चालू हालत में हैं। अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब सक्रिय है। प्रतिदिन 30-40 जांच होती है। हालांकि अभी कोई पॉजीटिव केस नहीं मिल रहा है। इसके अलावा 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध हैं।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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कोविड से बचाव की तैयारियां तेज हुईं
- कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद विभाग और जनप्रतिनिधियों की तरफ से लगाए गए प्लांट हैं दुरुस्त
- जिला अस्पताल में उपलब्ध हैं 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
- आरटीपीसीआर लैब में अब भी होती है 30-40 लोगों की प्रतिदिन कोविड जांच
पडरौना। चीन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण से खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। इसे लेकर प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार ने इससे बचाव की तैयारी तेज कर दी है। दूसरे देशों से आने वाले लोगों की कोविड जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे देखते हुए कोरोना महामारी की दूसरी लहर में लोगों की ऑक्सीजन की कमी से मौत को देखते हुए जनप्रतिनिधियों की तरफ से जनपद के अस्पतालों में स्थापित कराए गए ऑक्सीजन प्लांटों के बारे में बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई। जिसमें एक को छोड़कर अन्य सभी ठीक स्थिति में पाए गए। बताया गया कि आवश्यकता के अनुरूप इनके ऑक्सीजन का प्रयोग भी किया जाता है। इसके अलावा सीएमओ ने अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने वाले यात्रियों की कोविड जांच के निर्देश दिए हैं।
पहली लहर में ही कोरोना महामारी को लेकर जनपद के लोगों में काफी भय रहा। शासन-प्रशासन की तरफ से काफी सख्ती बरती गई। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से बहुत से लोगों की जान गई, जिनमें से सौ से ही ज्यादा मौतें सरकारी रिकार्ड में ही दर्ज हैं। ऑक्सीजन की कमी से हर तरफ हाहाकार मचा था। स्थिति कुछ सामान्य हुई तो सरकारी विभाग, विधायक, नगरपालिका अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी निधि से ऑक्सीजन प्लांट और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगवाए। अकेले जिला अस्पताल में चार, पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में एक, छितौनी में एक और सेवरही व सपहां में एक-एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगवाए गए थे। जिला अस्पताल में एमएलए कोटे से लगे एक ऑक्सीजन प्लांट में पिछले साल आग लग गई थी, जो अब तक नहीं बन सका है। बाकी तीनों ऑक्सीजन प्लांट से 1,300 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है। इस अस्पताल में इन प्लांटों से पाइपलाइन के जरिए आवश्यकता के अनुरूप वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। इसके अलावा यहां 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रखे हुए हैं। जनपद के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए 30-40 नमूनों की प्रतिदिन जांच आरटीपीसीआर लैब में होती है। हालांकि, सभी रिपोर्ट निगेटिव आती है।
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पडरौना में मशीन है, लेकिन जेनरेटर नहीं
पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में ऑक्सीजन प्लांट नगरपालिका प्रशासन की तरफ से लगवाया गया है। बिजली रहते आवश्यकता पड़ने पर इससे ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, लेकिन बिजली कट जाने पर आपूर्ति बंद हो जाती है। इसके प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने सीएमओ से वार्ता की थी। सीएमओ की तरफ से जेनरेटर उपलब्ध कराने का प्रयास करने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने नगरपालिका प्रशासन को भी अवगत कराया है। उन्हें बताया गया कि इसमें बड़ा जेनरेटर लगता है। यदि लग भी जाए तो डीजल का फंड नहीं आता।
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330 लीटर प्रति मिनट की क्षमता का सेवरही में है प्लांट
सेवरही सीएचसी में 330 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगा है, जो चालू हालत में है। इसे पिछले साल सेवरही चीनी मिल की तरफ से लगवाया गया था। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अमित जायसवाल ने बताया कि फिलहाल कोरोना का कोई मरीज नहीं है। जब आवश्यकता होगी, इसे चालू कर ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाएगा।
डीआरडीए से छितौनी में लगा है प्लांट
अगस्त 2021 में छितौनी पीएचसी परिसर में डीआरडीए की तरफ से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। यहां 100 बेड के कोविड अस्पताल का निर्माण कराया गया था। इसमें वेंटीलेटर से लेकर ऑक्सीजन तक हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। इस अस्पताल के संचालन के लिए तत्कालीन विधायक जटाशंकर त्रिपाठी के पत्र पर तत्कालीन डीएम एस. राजलिंगम ने डॉक्टरों सहित 55 स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कर्मियों की उपलब्धता न होंने के कारण अस्पताल चालू नहीं हो सका।
जनपद में नौ ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। एक को छोड़कर सभी चालू हालत में हैं। फिलहाल अभी इनकी जरूरत नहीं है, लेकिन इन्हें तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। कुशीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले यात्रियों की शुक्रवार से कोविड जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए निर्देश दे दिया गया है।
डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
जिला अस्पताल में चार ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। इनमें एमएलए कोटे से लगा एक प्लांट पिछले साल जल गया था, जो अब तक ठीक नहीं हो पाया है। अन्य तीन प्लांटों से 1,300 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट उत्पादन की क्षमता है। तीनों चालू हालत में हैं। अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब सक्रिय है। प्रतिदिन 30-40 जांच होती है। हालांकि अभी कोई पॉजीटिव केस नहीं मिल रहा है। इसके अलावा 134 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध हैं।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल