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Kushinagar News: मेडिकल कॉलेज की पांचों लिफ्ट खराब, रैंप के सहारे चार मंजिल चढ़ रहे मरीज
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रैंप से मरीज को ले जाते परिजन।
पानी भरने के कारण खराब हो गए थे लिफ्ट, टीम ने किया सर्वे, ठीक होने में लग सकते हैं पांच दिन
बेसमेंट से निकाला जा रहा पानी, मरीजों व तीमारदारों को रैंप से चढ़ना पड़ रहा है चार मंजिल
पडरौना। मेडिकल कॉलेज के आठ मंजिल की नई बिल्डिंग में बनाए गए वार्डों में मरीजों, तीमारदारों को आने-जाने में पसीने छूट रहे हैं। तीमारदारों व डॉक्टरों के लिए लगाए गए पांचों लिफ्ट बेसमेंट में पानी भरने के कारण खराब हो गए हैं। शुक्रवार को इंजीनियरों की टीम पहुंची और सर्वे कर पांच दिन के अंदर ठीक करने का आश्वासन दिया है।
मेडिकल कॉलेज के बिल्डिंग में छत लीक करने के कारण बेसमेंट में पानी भर गया है। इससे मच्छरों का प्रकोप तो बढ़ा ही है लिफ्ट भी खराब हो गए हैं। ऐसे में ओपीडी या वार्डों में भर्ती मरीजों तक पहुंचने में तीमारदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को मोटर की मदद से बेसमेंट में भरे पानी निकालने का कार्य शुरू हो गया है।
मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में प्रथम तल पर ओपीडी, तृतीय तल पर आईसीयू व पांचवीं मंजिल सर्जरी व हड्डी वार्ड संचालित है। इन वार्डों तक पहुंचने के लिए सीढ़ी, रैंप व लिफ्ट की व्यवस्था है। लिफ्ट बंद होने के कारण मौजूदा समय सिर्फ रैंप व सीढ़ी ही सहारा है। ऐसे में खासकर हड्डी (ऑर्थोपेडिक्स) के मरीजों और उनके तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
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इनमें से जो फ्रैक्चर, गंभीर चोटों व ऑपरेशन के कारण चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों को ऊपरी मंजिलों स्थित वार्डों तक ले जाने में उनके परिजन के पसीने छूट रहे हैं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाए जाने वाले मरीजों को सिर्फ रैंप के सहारे ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी लिफ्ट लगाए हैं, वे भी खराब पड़े हुए हैं।
स्पीकअप
मेरे पिता शिव मोहन के पैर में फ्रैक्चर है। उन्हें एक्सरे के लिए ले नीचे ले जाना है लेकिन लिफ्ट बंद होने के कारण हमें रैंप से धक्का देकर स्ट्रेचर ले जाना पड़ेगा और फिर एक्सरे कराकर स्ट्रेचर से ही वार्ड में लाकर भर्ती करना है। लिफ्ट चालू होता तो कम दिक्कत होती।
-पंकज कुमार, टेकुआटार
पैर में फ्रैक्चर है। हड्डी रोग विभाग में प्लास्टर के बाद जब स्ट्रेचर व व्हील चेयर नहीं मिला और लिफ्ट भी खराब है। ऐसे में मजबूर होकर सीढ़ी के रास्ते ही धीरे-धीरे उतरना पड़ रहा है। लिफ्ट खराब होने से गंभीर चोट, फ्रैक्चर व अन्य चलने में असमर्थ मरीजों को परेशानी हो रही है।
-शिवशंकर प्रसाद, गौरी जगदीश
भाई मोहन कुशवाहा का ऑपरेशन कराने के लिए ईसीजी जांच कराने की डॉक्टर ने सलाह दी है। मेडिकल कॉलेज के पांचवीं मंजिल से स्ट्रेचर पर लेकर नीचे उतर रहा हूं। स्ट्रेचर को रैंप पर संतुलित तरीके से उतारने में दिक्कत हो रही है। जांच के बाद फिर उन्हें पांचवीं मंजिल पर ले जाना होगा। लिफ्ट होता तो यह परेशानी नहीं होती।
-अनिल कुशवाहा, खैरटिया
मेरे पिता के कमर में फ्रैक्चर है। इलाज के लिए कॉलेज के पांचवीं मंजिल पर संचालित सर्जरी व हड्डी वार्ड में भर्ती थे। उन्हें छुट्टी मिलने के बाद पांचवीं मंजिल से घर ले जाने के लिए रैंप से उतारने के दौरान स्ट्रेचर संभालने में सांस फूल गई।
सुदामा यादव, मिश्रौली,सेवरही
कोट:-
बेसमेंट में पानी भरने से पांचों लिफ्ट खराब हो गए हैं। इंजीनियरों की टीम आज सर्वे कर गई है। पांच दिन के अंदर लिफ्ट चालू होने की संभावना है। बेसमेंट में भरे पानी को निकलवाया जा रहा है। पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर उपलब्ध कराया गया है, रैंप से वार्डों में मरीजों को लाने-ले जाने की व्यवस्था है, स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी इसके लिए लगाई गई है।
-डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
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बेसमेंट से निकाला जा रहा पानी, मरीजों व तीमारदारों को रैंप से चढ़ना पड़ रहा है चार मंजिल
पडरौना। मेडिकल कॉलेज के आठ मंजिल की नई बिल्डिंग में बनाए गए वार्डों में मरीजों, तीमारदारों को आने-जाने में पसीने छूट रहे हैं। तीमारदारों व डॉक्टरों के लिए लगाए गए पांचों लिफ्ट बेसमेंट में पानी भरने के कारण खराब हो गए हैं। शुक्रवार को इंजीनियरों की टीम पहुंची और सर्वे कर पांच दिन के अंदर ठीक करने का आश्वासन दिया है।
मेडिकल कॉलेज के बिल्डिंग में छत लीक करने के कारण बेसमेंट में पानी भर गया है। इससे मच्छरों का प्रकोप तो बढ़ा ही है लिफ्ट भी खराब हो गए हैं। ऐसे में ओपीडी या वार्डों में भर्ती मरीजों तक पहुंचने में तीमारदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को मोटर की मदद से बेसमेंट में भरे पानी निकालने का कार्य शुरू हो गया है।
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मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में प्रथम तल पर ओपीडी, तृतीय तल पर आईसीयू व पांचवीं मंजिल सर्जरी व हड्डी वार्ड संचालित है। इन वार्डों तक पहुंचने के लिए सीढ़ी, रैंप व लिफ्ट की व्यवस्था है। लिफ्ट बंद होने के कारण मौजूदा समय सिर्फ रैंप व सीढ़ी ही सहारा है। ऐसे में खासकर हड्डी (ऑर्थोपेडिक्स) के मरीजों और उनके तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
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इनमें से जो फ्रैक्चर, गंभीर चोटों व ऑपरेशन के कारण चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों को ऊपरी मंजिलों स्थित वार्डों तक ले जाने में उनके परिजन के पसीने छूट रहे हैं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाए जाने वाले मरीजों को सिर्फ रैंप के सहारे ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी लिफ्ट लगाए हैं, वे भी खराब पड़े हुए हैं।
स्पीकअप
मेरे पिता शिव मोहन के पैर में फ्रैक्चर है। उन्हें एक्सरे के लिए ले नीचे ले जाना है लेकिन लिफ्ट बंद होने के कारण हमें रैंप से धक्का देकर स्ट्रेचर ले जाना पड़ेगा और फिर एक्सरे कराकर स्ट्रेचर से ही वार्ड में लाकर भर्ती करना है। लिफ्ट चालू होता तो कम दिक्कत होती।
-पंकज कुमार, टेकुआटार
पैर में फ्रैक्चर है। हड्डी रोग विभाग में प्लास्टर के बाद जब स्ट्रेचर व व्हील चेयर नहीं मिला और लिफ्ट भी खराब है। ऐसे में मजबूर होकर सीढ़ी के रास्ते ही धीरे-धीरे उतरना पड़ रहा है। लिफ्ट खराब होने से गंभीर चोट, फ्रैक्चर व अन्य चलने में असमर्थ मरीजों को परेशानी हो रही है।
-शिवशंकर प्रसाद, गौरी जगदीश
भाई मोहन कुशवाहा का ऑपरेशन कराने के लिए ईसीजी जांच कराने की डॉक्टर ने सलाह दी है। मेडिकल कॉलेज के पांचवीं मंजिल से स्ट्रेचर पर लेकर नीचे उतर रहा हूं। स्ट्रेचर को रैंप पर संतुलित तरीके से उतारने में दिक्कत हो रही है। जांच के बाद फिर उन्हें पांचवीं मंजिल पर ले जाना होगा। लिफ्ट होता तो यह परेशानी नहीं होती।
-अनिल कुशवाहा, खैरटिया
मेरे पिता के कमर में फ्रैक्चर है। इलाज के लिए कॉलेज के पांचवीं मंजिल पर संचालित सर्जरी व हड्डी वार्ड में भर्ती थे। उन्हें छुट्टी मिलने के बाद पांचवीं मंजिल से घर ले जाने के लिए रैंप से उतारने के दौरान स्ट्रेचर संभालने में सांस फूल गई।
सुदामा यादव, मिश्रौली,सेवरही
कोट:-
बेसमेंट में पानी भरने से पांचों लिफ्ट खराब हो गए हैं। इंजीनियरों की टीम आज सर्वे कर गई है। पांच दिन के अंदर लिफ्ट चालू होने की संभावना है। बेसमेंट में भरे पानी को निकलवाया जा रहा है। पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर उपलब्ध कराया गया है, रैंप से वार्डों में मरीजों को लाने-ले जाने की व्यवस्था है, स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी इसके लिए लगाई गई है।
-डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर