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Kushinagar News: भीषण गर्मी के मद्देनजर किसानों के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी जारी
Thu, 23 Apr 2026 02:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:40 AM IST
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पडरौना। जिले में बढ़ते तापमान और संभावित लू (हीट वेव) को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि अधिकारी ने फसलों की सुरक्षा और भूमि में नमी बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष न जलाएं। इसके बजाय मल्चिंग तकनीक अपनाएं और फसल अवशेषों व जैव उत्पादों का उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और नमी संरक्षण में मदद मिलती है। सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप पद्धति अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों को नियमित अंतराल पर शाम के समय हल्की सिंचाई करने को कहा गया है, जिससे नमी बनी रहे और पानी की बचत हो। साथ ही, खेतों में अंतःकर्षण क्रियाओं से तैयार मल्च वाष्पीकरण को कम करने में सहायक होता है।
जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें और रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद को प्राथमिकता दें, क्योंकि अधिक तापमान में रासायनिक उर्वरक फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि बुवाई पंक्तियों में करें और सिंचाई के बेहतर वितरण के लिए खेतों को समतल रखें। धान की नर्सरी में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय सिंचाई करें और कहीं पानी जमा हो तो उसकी तत्काल निकासी सुनिश्चित करें।
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कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इन सुझावों का पालन कर लू के प्रभाव से फसलों की सुरक्षा करें और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।
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कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष न जलाएं। इसके बजाय मल्चिंग तकनीक अपनाएं और फसल अवशेषों व जैव उत्पादों का उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और नमी संरक्षण में मदद मिलती है। सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप पद्धति अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों को नियमित अंतराल पर शाम के समय हल्की सिंचाई करने को कहा गया है, जिससे नमी बनी रहे और पानी की बचत हो। साथ ही, खेतों में अंतःकर्षण क्रियाओं से तैयार मल्च वाष्पीकरण को कम करने में सहायक होता है।
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जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें और रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद को प्राथमिकता दें, क्योंकि अधिक तापमान में रासायनिक उर्वरक फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि बुवाई पंक्तियों में करें और सिंचाई के बेहतर वितरण के लिए खेतों को समतल रखें। धान की नर्सरी में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय सिंचाई करें और कहीं पानी जमा हो तो उसकी तत्काल निकासी सुनिश्चित करें।
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कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इन सुझावों का पालन कर लू के प्रभाव से फसलों की सुरक्षा करें और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।