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दो वर्षों में भी नहीं बना क्रें द्रीय विद्यालय भवन
kushinagar
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:05 PM IST
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लापरवाही
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। जिले में केंद्रीय विद्यालय खुले दो वर्ष हो गया, लेकिन इसे खुद का भवन अब तक मयस्सर नहीं हुआ। आज भी यह विद्यालय नगर के उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में ही संचालित किया जा रहा है। क्योंकि इसके भवन के लिए शासन से बजट ही नहीं मिला।
वर्ष 2014 में जनपद के लिए केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत हुआ था। विद्यालय संचालित करने के लिए पडरौना तहसील क्षेत्र के गांगरानी गांव में 6.63 एकड़ क्षेत्रफल में भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। चूंकि प्रस्तावित जमीन गड्ढायुक्त है, इसलिए जब तक भवन बनकर तैयार न हो जाए, तब तक के लिए पडरौना नगर के उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में केंद्रीय विद्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया था।
केंद्रीय विद्यालय संगठन के उपायुक्त पीवी साईं रंगाराव ने एक जुलाई 2014 को तत्कालीन डीएम को जारी पत्र में बताया था कि उन्होंने नायब तहसीलदार पवन कुमार जायसवाल, केंद्रीय विद्यालय नंबर-दो गोरखपुर के प्राचार्य आरए सिंह और पीडब्ल्यूडी के जेई व तकनीकी सदस्य सुनील श्रीवास्तव के साथ प्रस्तावित स्थल पर पहुंचकर भूमि का अवलोकन किया था। निचली भूमि होने के कारण जमीन समतल करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को नि:शुल्क कराने के लिए सौंपी गई थी, ताकि वहां भवन निर्माण कराया जा सके।
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लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी केंद्रीय विद्यालय का भवन नहीं बन सका। बताया जा रहा है कि इसके लिए शासन से बजट ही अवमुक्त नहीं हुआ। यह विद्यालय अब भी उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में संचालित हो रहा है।
कांग्रेस के जिला मीडिया प्रभारी समशेर मल्ल कहते हैं कि जिले को केंद्रीय विद्यालय की सौगात तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के प्रयास से मिली थी। इसके लिए भवन उपलब्ध न होने के कारण उन्होंने अपने विद्यालय उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में पठन-पाठन शुरू कराया था। केंद्र में सत्ता बदल जाने के बाद से ही यह विद्यालय उपेक्षित है। प्रतिवर्ष कक्षाएं बढ़ाने का दबाव केंद्रीय विद्यालय की ओर से बनाया जा रहा है, लेकिन इंटर कॉलेज में इसके लिए पहले से ही जगह कम है।
इस संबंध में आरसी मिश्र, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय ने कहा कि विद्यालय भवन के लिए टेंडर हो गया है, लेकिन बजट नहीं आया है। निरीक्षण में आए अधिकारियों से इस समस्या के बारे में अवगत कराया जा चुका है।
डीएम, शम्भु कुमार ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय भारत सरकार की ओर से संचालित किए जाते हैं। इसलिए इसमें कोई भी पहल केंद्र सरकार ही कर सकती है। विद्यालय भवन बनवाने में आ रही अड़चनें दूर कराने के लिए पत्राचार किया जाएगा।
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वर्ष 2014 में जनपद के लिए केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत हुआ था। विद्यालय संचालित करने के लिए पडरौना तहसील क्षेत्र के गांगरानी गांव में 6.63 एकड़ क्षेत्रफल में भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। चूंकि प्रस्तावित जमीन गड्ढायुक्त है, इसलिए जब तक भवन बनकर तैयार न हो जाए, तब तक के लिए पडरौना नगर के उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में केंद्रीय विद्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया था।
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केंद्रीय विद्यालय संगठन के उपायुक्त पीवी साईं रंगाराव ने एक जुलाई 2014 को तत्कालीन डीएम को जारी पत्र में बताया था कि उन्होंने नायब तहसीलदार पवन कुमार जायसवाल, केंद्रीय विद्यालय नंबर-दो गोरखपुर के प्राचार्य आरए सिंह और पीडब्ल्यूडी के जेई व तकनीकी सदस्य सुनील श्रीवास्तव के साथ प्रस्तावित स्थल पर पहुंचकर भूमि का अवलोकन किया था। निचली भूमि होने के कारण जमीन समतल करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को नि:शुल्क कराने के लिए सौंपी गई थी, ताकि वहां भवन निर्माण कराया जा सके।
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लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी केंद्रीय विद्यालय का भवन नहीं बन सका। बताया जा रहा है कि इसके लिए शासन से बजट ही अवमुक्त नहीं हुआ। यह विद्यालय अब भी उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में संचालित हो रहा है।
कांग्रेस के जिला मीडिया प्रभारी समशेर मल्ल कहते हैं कि जिले को केंद्रीय विद्यालय की सौगात तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के प्रयास से मिली थी। इसके लिए भवन उपलब्ध न होने के कारण उन्होंने अपने विद्यालय उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में पठन-पाठन शुरू कराया था। केंद्र में सत्ता बदल जाने के बाद से ही यह विद्यालय उपेक्षित है। प्रतिवर्ष कक्षाएं बढ़ाने का दबाव केंद्रीय विद्यालय की ओर से बनाया जा रहा है, लेकिन इंटर कॉलेज में इसके लिए पहले से ही जगह कम है।
इस संबंध में आरसी मिश्र, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय ने कहा कि विद्यालय भवन के लिए टेंडर हो गया है, लेकिन बजट नहीं आया है। निरीक्षण में आए अधिकारियों से इस समस्या के बारे में अवगत कराया जा चुका है।
डीएम, शम्भु कुमार ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय भारत सरकार की ओर से संचालित किए जाते हैं। इसलिए इसमें कोई भी पहल केंद्र सरकार ही कर सकती है। विद्यालय भवन बनवाने में आ रही अड़चनें दूर कराने के लिए पत्राचार किया जाएगा।