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पुरातन अवशेषों के संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है प्रशासन

Sat, 10 Oct 2020 11:34 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 11:34 PM IST
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administration is not serious about the remains
पुरातन अवशेषों के संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है प्रशासन
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पंपिग सेट लगाकर छोड़ दिया, अब तक नहीं निकाला गया पानी
बरसात के चार महीने पानी में डूबे रहते हैं कुशीनगर में खुदाई में मिले अवशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया (कुशीनगर)। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर के पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को लेकर न तो पुरातत्व विभाग गंभीर है और न ही स्थानीय प्रशासन। बरसात के पानी में मुख्य मंदिर, माथा कुंवर मंदिर व रामाभार स्तूप के पास मिले अवशेष अब तक डूबे हुए हैं। माथा कुंवर के पास पानी निकालने के लिए पंपिग सेट भी लगा है, लेकिन पानी निकालने का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
कुशीनगर में महापरिनिर्वाण मंदिर, माथा कुंवर मंदिर व रामाभार स्तूप परिसर में तमाम प्राचीन अवशेष हैं जो खुदाई में मिले थे। देश-विदेश में मौजूद बौद्ध धर्मानुयायी इन धरोहरों को देखने आते हैं। अब इन्हीं धरोहरों को दिखाने के लिए यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बन रहा है, लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी से ये धरोहरें नष्ट होती जा रही हैं। दरअसल गहराई में स्थित इन स्थलों पर बरसात के चार महीने पानी भरा रहता है, जिसके चलते पुरावशेषों का स्वरूप बदल रहा है। समय रहते इन पुरातत्विक धरोहरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो ऐतिहासिक पहचान मिट जाएगी।
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भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार के प्रबंधक भंते महेंद्र, श्रीलंका बुद्ध बिहार के प्रबंधक भंते नंदरतन, बिड़ला धर्मशाला के प्रबंधक वीरेंद्र कुमार तिवारी समेत अन्य लोगों ने शासन-प्रशासन से इन बौद्ध धरोहरों को जलभराव से मुक्ति दिलाने एवं इनके संरक्षण की मांग की है।
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जबकि अधीक्षण पुरातत्वविद सारनाथ मंडल के नीरज कुमार सिन्हा का कहना है कि पुरातात्विक महत्व के ये अवशेष बारिश के पानी में डूबे रहने से नष्ट नहीं होंगे। बरसात बाद हर साल इनके संरक्षण का काम कराया जाता है। इस बार भी जल्दी ही जलनिकासी व मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
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