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Kushinagar News: एक पल में उजड़ गई दुनिया, बच्चे हो गए अनाथ
Sun, 10 May 2026 02:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 10 May 2026 02:03 AM IST
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मृतक प्रियंका की फाइल फोटो।
सड़क हादसे ने छीन लिया मां-बाप का साया, अब अनिश्चित भविष्य की चिंता
पडरौना/मंसाछापर। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित एफसीआई गोदाम के सामने हुए हादसे ने केवल एक दंपती की जान ही नहीं ली, बल्कि तीन मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए मां-बाप का साया भी छीन लिया। हादसे में बृजेश और उनकी पत्नी प्रियंका देवी की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हर किसी की जुबान पर अब एक ही सवाल है कि आखिर इन मासूम बच्चों का भविष्य अब किसके सहारे संवरेगा।
नेबुआ रायगंज निवासी बृजेश और प्रियंका दोपहर में बच्चों के परिवार के सदस्यों के पास छोड़कर कुछ देर में वापस लौटने की बात कहकर घर से निकले। बच्चे व परिजन माता-पिता के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनकी मौत की खबर आने से दहाड़े मारने लगे। दंपती अपने पीछे दस वर्षीय अंजली, सात वर्षीय मटरु और पांच वर्षीय भोला को छोड़ गए हैं। हादसे की खबर घर पहुंचते ही बच्चों की दुनिया मानो उजड़ गई। गांव में जहां भी इस हादसे की चर्चा हो रही है, लोगों की आंखें नम हो जा रही हैं।
दस साल की अंजली अभी ठीक से यह भी नहीं समझ पा रही कि आखिर उसके माता-पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। वहीं सात वर्षीय मटरु और पांच वर्षीय भोला बार-बार अपनों से मां-बाप के बारे में पूछ रहे हैं। बच्चों की मासूमियत और बेबसी देखकर गांव के लोग भी खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बृजेश मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। किसी तरह बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चल रहा था, लेकिन एक हादसे ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। अब सबसे बड़ी चिंता इन तीनों मासूमों की परवरिश और शिक्षा को लेकर है। घटना के बाद मृतक के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। गांव की महिलाएं बच्चों को सीने से लगाकर रो पड़ रही हैं। हर किसी की आंखों में दर्द और चिंता साफ दिखाई दे रही है।
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पडरौना/मंसाछापर। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित एफसीआई गोदाम के सामने हुए हादसे ने केवल एक दंपती की जान ही नहीं ली, बल्कि तीन मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए मां-बाप का साया भी छीन लिया। हादसे में बृजेश और उनकी पत्नी प्रियंका देवी की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हर किसी की जुबान पर अब एक ही सवाल है कि आखिर इन मासूम बच्चों का भविष्य अब किसके सहारे संवरेगा।
नेबुआ रायगंज निवासी बृजेश और प्रियंका दोपहर में बच्चों के परिवार के सदस्यों के पास छोड़कर कुछ देर में वापस लौटने की बात कहकर घर से निकले। बच्चे व परिजन माता-पिता के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनकी मौत की खबर आने से दहाड़े मारने लगे। दंपती अपने पीछे दस वर्षीय अंजली, सात वर्षीय मटरु और पांच वर्षीय भोला को छोड़ गए हैं। हादसे की खबर घर पहुंचते ही बच्चों की दुनिया मानो उजड़ गई। गांव में जहां भी इस हादसे की चर्चा हो रही है, लोगों की आंखें नम हो जा रही हैं।
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दस साल की अंजली अभी ठीक से यह भी नहीं समझ पा रही कि आखिर उसके माता-पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। वहीं सात वर्षीय मटरु और पांच वर्षीय भोला बार-बार अपनों से मां-बाप के बारे में पूछ रहे हैं। बच्चों की मासूमियत और बेबसी देखकर गांव के लोग भी खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बृजेश मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। किसी तरह बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चल रहा था, लेकिन एक हादसे ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। अब सबसे बड़ी चिंता इन तीनों मासूमों की परवरिश और शिक्षा को लेकर है। घटना के बाद मृतक के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। गांव की महिलाएं बच्चों को सीने से लगाकर रो पड़ रही हैं। हर किसी की आंखों में दर्द और चिंता साफ दिखाई दे रही है।

मृतक प्रियंका की फाइल फोटो।

मृतक प्रियंका की फाइल फोटो।
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