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Kushinagar News: रामलीला के मंच से भाईचारे का संदेश, हिंदू-मुस्लिम मिलकर सहेज रहे साझी विरासत
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- रावण का पुतला बनाने में मुस्लिम कलाकारों की भागीदारी, हल्दी भेजकर राम-सीता विवाह का न्योता
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। मठिया माधोपुर की रामलीला करीब दो शताब्दियों से सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश कर रही है। यहां रामलीला के आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर भागीदारी करते हैं। मुस्लिम कलाकार रावण का पुतला तैयार करने में सहयोग करते हैं तो राम-सीता विवाह के आयोजन में हल्दी भेजकर न्योता देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
माधोपुर की रामलीला की खासियत केवल इसके ऐतिहासिक मंचन और कलाकारों की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। करीब दो शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा धर्म और जाति से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे का संदेश दे रही है। आयोजन में अलग-अलग समुदायों की भागीदारी इसे विशिष्ट बनाती है। रावण के पुतले को तैयार करने के लिए बांसफोड़ समाज के लोग बत्तियां बनाते हैं, जबकि मुस्लिम कलाकार पुतले को आकार देने में सहयोग करते हैं।
इस तरह रामलीला की तैयारियों में विभिन्न समुदायों के लोग अपनी भूमिका निभाते हैं। राम-सीता विवाह के आयोजन में भी आपसी मेल-जोल की यह परंपरा दिखाई देती है। भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हल्दी भेजकर लोगों को विवाह का न्योता देने की रस्म निभाई जाती है। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रहती है। मठिया माधोपुर की रामलीला इस बात की मिसाल है कि लोक परंपराएं लोगों को जोड़ने का काम करती हैं।
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गांव के सब्बल अंसारी, इशू अंसारी, हमीद अंसारी रावण का पुतला बनाते हैं जबकि विभांशु वैभव मिश्र राम, विकास दुबे, माता सीता का पात्र निभाते हैं। इस परंपरा को संजोने में युवाओं की महती भूमिका है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव भी रचा-बसा है। यही वजह है कि यहां की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बनी हुई है।
स्पीकअप
नवरात्र में गांव का उल्लास देखने लायक रहता है। लोग जाति-धर्म की परवाह किए बगैर साथ में त्योहार मनाते हैं। होश संभालने के बाद से रामलीला में सहयोग कर रहा हूं और रावण का पुतला बनाने का कार्य करता हूं। मेरे पूर्वज भी यही काम करते थे।
-सब्बल अंसारी, मठिया माधोपुर
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मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता हूं लेकिन नवरात्र में काम पर नहीं जाता हूं। रावण का पुतला तैयार करने के अलावा रामलीला के दौरान की व्यवस्था को संभालता हूं। इसके पहले हमारे पिता व दादा रावण का पुतला तैयार करते थे।
- हमीद अंसारी, मठिया माधोपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। मठिया माधोपुर की रामलीला करीब दो शताब्दियों से सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश कर रही है। यहां रामलीला के आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर भागीदारी करते हैं। मुस्लिम कलाकार रावण का पुतला तैयार करने में सहयोग करते हैं तो राम-सीता विवाह के आयोजन में हल्दी भेजकर न्योता देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
माधोपुर की रामलीला की खासियत केवल इसके ऐतिहासिक मंचन और कलाकारों की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। करीब दो शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा धर्म और जाति से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे का संदेश दे रही है। आयोजन में अलग-अलग समुदायों की भागीदारी इसे विशिष्ट बनाती है। रावण के पुतले को तैयार करने के लिए बांसफोड़ समाज के लोग बत्तियां बनाते हैं, जबकि मुस्लिम कलाकार पुतले को आकार देने में सहयोग करते हैं।
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इस तरह रामलीला की तैयारियों में विभिन्न समुदायों के लोग अपनी भूमिका निभाते हैं। राम-सीता विवाह के आयोजन में भी आपसी मेल-जोल की यह परंपरा दिखाई देती है। भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हल्दी भेजकर लोगों को विवाह का न्योता देने की रस्म निभाई जाती है। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रहती है। मठिया माधोपुर की रामलीला इस बात की मिसाल है कि लोक परंपराएं लोगों को जोड़ने का काम करती हैं।
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गांव के सब्बल अंसारी, इशू अंसारी, हमीद अंसारी रावण का पुतला बनाते हैं जबकि विभांशु वैभव मिश्र राम, विकास दुबे, माता सीता का पात्र निभाते हैं। इस परंपरा को संजोने में युवाओं की महती भूमिका है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव भी रचा-बसा है। यही वजह है कि यहां की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बनी हुई है।
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नवरात्र में गांव का उल्लास देखने लायक रहता है। लोग जाति-धर्म की परवाह किए बगैर साथ में त्योहार मनाते हैं। होश संभालने के बाद से रामलीला में सहयोग कर रहा हूं और रावण का पुतला बनाने का कार्य करता हूं। मेरे पूर्वज भी यही काम करते थे।
-सब्बल अंसारी, मठिया माधोपुर
मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता हूं लेकिन नवरात्र में काम पर नहीं जाता हूं। रावण का पुतला तैयार करने के अलावा रामलीला के दौरान की व्यवस्था को संभालता हूं। इसके पहले हमारे पिता व दादा रावण का पुतला तैयार करते थे।
- हमीद अंसारी, मठिया माधोपुर