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Kushinagar News: पंडालों के पास मौत का जाल, लोहे के ढांचों से सटकर लटक रहे बिजली के तार
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पडरौना शहर के शिवबाला मंदिर के पास बिजली तार के नीचे बन रहा दुर्गा पूजा के लिए पांडाल।
लोहे के ढांचों के पास झूल रहे बिजली के तार, कभी भी हो सकता है हादसा
नवरात्र में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ेंगे श्रद्धालु, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी
पडरौना। नवरात्र शुरू होते ही शहर के देवी पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पंचमी से पंडालों में प्रतिमाएं भी रखना शुरू कर दिया जाएगा। यहां शाम होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगेगी लेकिन सुरक्षा इंतजामों को लेकर जिम्मेदारों की तैयारी सवालों के घेरे में है। शहर के कई प्रमुख पंडालों के पास बिजली के तार लटक रहे हैं। कहीं तार लोहे के ढांचे के करीब हैं तो कहीं पंडाल के आसपास से गुजर रहे हैं। कुछ जगह तो खुले में रखे ट्रांसफार्मर के पास तक पंडाल सजाए जा रहे हैं।
शहर के छुछिया गेट, आलू मंडी, सुभाष चौक, कसेरा टोला और भारतीय शिवाला मंदिर के पंडालों के आसपास बिजली के तारों की स्थिति ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बेलवा चंगी चौराहे पर मंदिर के पास खुले में एक ही जगह कई ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसके पास तक दुर्गा पंडाल सजाने के लिए लोहे के पाइप लगा दिए गए हैं। नवरात्र में पंडालों की सजावट, रोशनी और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम किए जाते हैं। इसके बावजूद बिजली के तारों को सुरक्षित करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है।
लोहे के ढांचे के पास लटक रहे तार किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। बारिश या नमी की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। पंडालों के आसपास बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भी आवाजाही रहती है। भीड़ बढ़ने पर किसी का तार या लोहे के ढांचे के संपर्क में आना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। बेलवा चुंगी स्थित मंदिर के पास स्थापित पंडाल में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है।
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पंडाल निर्माण में इन मानकों का रखें ध्यान
पडरौना। पंडाल की ऊंचाई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए। इसके निर्माण में सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक या नायलॉन की रस्सियों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर अग्निरोधी घोल से उपचारित सूती कपड़ों का प्रयोग करना चाहिए। पंडाल रेलवे लाइन, हाईटेंशन बिजली तार, विद्युत सब स्टेशन, चिमनी और ईंट-भट्ठों से कम से कम 15 मीटर दूर बनाया जाना चाहिए। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पंडाल के चारों ओर चार से पांच मीटर तक खुली जगह छोड़ना भी जरूरी है।
पंडाल में कम से कम तीन चौड़े प्रवेश और निकास द्वार होने चाहिए
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुपात्र शंखधर ने बताया कि आग लगने की स्थिति में तत्काल बचाव के लिए प्रत्येक 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर कम से कम नौ लीटर क्षमता का एक अग्निशमन यंत्र रखना होगा। पंडाल के क्षेत्रफल के हिसाब से प्रति वर्ग मीटर 0.75 लीटर पानी ड्रम या बाल्टियों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसमें आधा पानी पंडाल के अंदर और आधा बाहर रखा जाना चाहिए। प्रत्येक 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में दो बाल्टी पानी भी उपलब्ध होना चाहिए। मुख्य विद्युत स्विच, बिजली मीटर और मंच के पास कार्बन डाइऑक्साइड (सीओटू) या ड्राई केमिकल पाउडर (डीसीपी) अग्निशमन यंत्र रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पंडाल में कम से कम तीन चौड़े प्रवेश और निकास द्वार होने चाहिए। हवन, दीप प्रज्वलन और आरती के लिए सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाए। इन स्थानों के आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए।
बिना कनेक्शन बिजली जलाई तो होगी कार्रवाई
कसया। दुर्गा पूजा पंडालों में बिजली आपूर्ति के मामले में लापरवाही आयोजकों के साथ श्रद्धालुओं पर भी भारी पड़ सकती है। करंट लगने, शॉर्ट सर्किट और आग लगने की आशंका को देखते हुए बिजली निगम ने सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के विद्युत वितरण खंड कसया ने पूजा समितियों और पंडाल आयोजकों के लिए सुरक्षा चेतावनी एवं निरीक्षण नोटिस जारी किया है। इसमें बिना वैध अस्थायी कनेक्शन बिजली जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साथ ही पंडालों में सुरक्षित वायरिंग, अर्थिंग और बिजली से बचाव के जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है।
हाईटेंशन तार से नीचे हों स्वागत द्वार
पंडाल निर्माण के दौरान बिजली की लाइनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 11 केवी और 33 केवी की हाईटेंशन लाइनों के साथ एलटी ओवरहेड लाइन के नीचे पंडाल, स्वागत द्वार, होर्डिंग या झंडे लगाने से बचने को कहा गया है। बिजली के तारों के संपर्क में आने से जानलेवा हादसा हो सकता है। ऐसे में पंडाल की जगह तय करते समय आसपास से गुजर रही बिजली की लाइनों की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। निगम ने पंडालों में अच्छी गुणवत्ता वाले आईएसआई मार्क के डबल इंसुलेटेड तारों का इस्तेमाल करने की हिदायत दी है। कटे-फटे और खुले तारों का इस्तेमाल पूरी तरह रोकने के साथ सभी जोड़ पर उचित इंसुलेशन करने को कहा गया है। तारों को लोहे की रॉड, पाइप या बांस पर सीधे बांधने से भी मना किया गया है। विद्युत व्यवस्था किसी जानकार व्यक्ति से ही कराने और उपयोग से पहले वायरिंग की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। करंट लीकेज और शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए मुख्य विद्युत बोर्ड पर उपयुक्त क्षमता की एमसीबी और ईएलसीबी लगाना जरूरी है। इसके साथ पंडाल की उचित अर्थिंग भी करानी होगी। निगम ने स्वीकृत विद्युत भार से अधिक बिजली का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी है। मुख्य बिजली आपूर्ति बंद करने वाला स्विच ऐसी जगह होना चाहिए, जहां आपात स्थिति में आसानी से पहुंचकर बिजली बंद की जा सके।
लापरवाही से बचें, हेल्पलाइन पर करें संपर्क
पडरौना विद्युत वितरण खंड के एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने बताया कि विद्युत निगम ने पूजा समितियों को बिजली की व्यवस्था की नियमित जांच कराने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। सुरक्षा निर्देशों के पालन की वचनबद्धता भी आयोजकों से मांगी गई है। बिजली संबंधी समस्या या सहायता के लिए निगम की हेल्पलाइन 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।
वर्जन
सभी पंडाल आयोजकों को अस्थायी कनेक्शन लेने और सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईटेंशन विद्युत तारों के नीचे पंडाल नहीं लगाने की अपील की गई है। किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को भी कहा गया है।
- वाईपी सिंह, विद्युत अधीक्षण अभियंता, कुशीनगर।
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नवरात्र में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ेंगे श्रद्धालु, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी
पडरौना। नवरात्र शुरू होते ही शहर के देवी पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पंचमी से पंडालों में प्रतिमाएं भी रखना शुरू कर दिया जाएगा। यहां शाम होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगेगी लेकिन सुरक्षा इंतजामों को लेकर जिम्मेदारों की तैयारी सवालों के घेरे में है। शहर के कई प्रमुख पंडालों के पास बिजली के तार लटक रहे हैं। कहीं तार लोहे के ढांचे के करीब हैं तो कहीं पंडाल के आसपास से गुजर रहे हैं। कुछ जगह तो खुले में रखे ट्रांसफार्मर के पास तक पंडाल सजाए जा रहे हैं।
शहर के छुछिया गेट, आलू मंडी, सुभाष चौक, कसेरा टोला और भारतीय शिवाला मंदिर के पंडालों के आसपास बिजली के तारों की स्थिति ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बेलवा चंगी चौराहे पर मंदिर के पास खुले में एक ही जगह कई ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसके पास तक दुर्गा पंडाल सजाने के लिए लोहे के पाइप लगा दिए गए हैं। नवरात्र में पंडालों की सजावट, रोशनी और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम किए जाते हैं। इसके बावजूद बिजली के तारों को सुरक्षित करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है।
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लोहे के ढांचे के पास लटक रहे तार किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। बारिश या नमी की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। पंडालों के आसपास बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भी आवाजाही रहती है। भीड़ बढ़ने पर किसी का तार या लोहे के ढांचे के संपर्क में आना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। बेलवा चुंगी स्थित मंदिर के पास स्थापित पंडाल में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है।
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पंडाल निर्माण में इन मानकों का रखें ध्यान
पडरौना। पंडाल की ऊंचाई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए। इसके निर्माण में सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक या नायलॉन की रस्सियों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर अग्निरोधी घोल से उपचारित सूती कपड़ों का प्रयोग करना चाहिए। पंडाल रेलवे लाइन, हाईटेंशन बिजली तार, विद्युत सब स्टेशन, चिमनी और ईंट-भट्ठों से कम से कम 15 मीटर दूर बनाया जाना चाहिए। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पंडाल के चारों ओर चार से पांच मीटर तक खुली जगह छोड़ना भी जरूरी है।
पंडाल में कम से कम तीन चौड़े प्रवेश और निकास द्वार होने चाहिए
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुपात्र शंखधर ने बताया कि आग लगने की स्थिति में तत्काल बचाव के लिए प्रत्येक 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर कम से कम नौ लीटर क्षमता का एक अग्निशमन यंत्र रखना होगा। पंडाल के क्षेत्रफल के हिसाब से प्रति वर्ग मीटर 0.75 लीटर पानी ड्रम या बाल्टियों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसमें आधा पानी पंडाल के अंदर और आधा बाहर रखा जाना चाहिए। प्रत्येक 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में दो बाल्टी पानी भी उपलब्ध होना चाहिए। मुख्य विद्युत स्विच, बिजली मीटर और मंच के पास कार्बन डाइऑक्साइड (सीओटू) या ड्राई केमिकल पाउडर (डीसीपी) अग्निशमन यंत्र रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पंडाल में कम से कम तीन चौड़े प्रवेश और निकास द्वार होने चाहिए। हवन, दीप प्रज्वलन और आरती के लिए सुरक्षित स्थान निर्धारित किया जाए। इन स्थानों के आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए।
बिना कनेक्शन बिजली जलाई तो होगी कार्रवाई
कसया। दुर्गा पूजा पंडालों में बिजली आपूर्ति के मामले में लापरवाही आयोजकों के साथ श्रद्धालुओं पर भी भारी पड़ सकती है। करंट लगने, शॉर्ट सर्किट और आग लगने की आशंका को देखते हुए बिजली निगम ने सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के विद्युत वितरण खंड कसया ने पूजा समितियों और पंडाल आयोजकों के लिए सुरक्षा चेतावनी एवं निरीक्षण नोटिस जारी किया है। इसमें बिना वैध अस्थायी कनेक्शन बिजली जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साथ ही पंडालों में सुरक्षित वायरिंग, अर्थिंग और बिजली से बचाव के जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है।
हाईटेंशन तार से नीचे हों स्वागत द्वार
पंडाल निर्माण के दौरान बिजली की लाइनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 11 केवी और 33 केवी की हाईटेंशन लाइनों के साथ एलटी ओवरहेड लाइन के नीचे पंडाल, स्वागत द्वार, होर्डिंग या झंडे लगाने से बचने को कहा गया है। बिजली के तारों के संपर्क में आने से जानलेवा हादसा हो सकता है। ऐसे में पंडाल की जगह तय करते समय आसपास से गुजर रही बिजली की लाइनों की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। निगम ने पंडालों में अच्छी गुणवत्ता वाले आईएसआई मार्क के डबल इंसुलेटेड तारों का इस्तेमाल करने की हिदायत दी है। कटे-फटे और खुले तारों का इस्तेमाल पूरी तरह रोकने के साथ सभी जोड़ पर उचित इंसुलेशन करने को कहा गया है। तारों को लोहे की रॉड, पाइप या बांस पर सीधे बांधने से भी मना किया गया है। विद्युत व्यवस्था किसी जानकार व्यक्ति से ही कराने और उपयोग से पहले वायरिंग की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। करंट लीकेज और शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए मुख्य विद्युत बोर्ड पर उपयुक्त क्षमता की एमसीबी और ईएलसीबी लगाना जरूरी है। इसके साथ पंडाल की उचित अर्थिंग भी करानी होगी। निगम ने स्वीकृत विद्युत भार से अधिक बिजली का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी है। मुख्य बिजली आपूर्ति बंद करने वाला स्विच ऐसी जगह होना चाहिए, जहां आपात स्थिति में आसानी से पहुंचकर बिजली बंद की जा सके।
लापरवाही से बचें, हेल्पलाइन पर करें संपर्क
पडरौना विद्युत वितरण खंड के एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने बताया कि विद्युत निगम ने पूजा समितियों को बिजली की व्यवस्था की नियमित जांच कराने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। सुरक्षा निर्देशों के पालन की वचनबद्धता भी आयोजकों से मांगी गई है। बिजली संबंधी समस्या या सहायता के लिए निगम की हेल्पलाइन 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।
वर्जन
सभी पंडाल आयोजकों को अस्थायी कनेक्शन लेने और सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईटेंशन विद्युत तारों के नीचे पंडाल नहीं लगाने की अपील की गई है। किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को भी कहा गया है।
- वाईपी सिंह, विद्युत अधीक्षण अभियंता, कुशीनगर।