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Kushinagar News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री से नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का होगा सत्यापन
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बीएसए ने सभी बीईओ से एक सप्ताह में मांगा शैक्षिक विवरण और प्रमाणपत्रों की छायाप्रति
पडरौना। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की डिग्री के आधार पर नियुक्त कुशीनगर में तैनात शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर संबंधित शिक्षकों का ब्योरा एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू), उत्तर प्रदेश, लखनऊ की ओर से यह जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में सामने आई अनियमितताओं की जांच चल रही है। इस मामले में लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी के तहत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विवेचना की जा रही है।
विवेचना के सिलसिले में ऐसे चयनित अध्यापकों और अध्यापिकाओं का विवरण मांगा गया है, जिनकी नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से सत्यापन कराया गया था। इसके लिए निर्धारित प्रारूप में संबंधित शिक्षकों की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें शिक्षक का नाम, पिता का नाम, वर्तमान में कार्यरत विद्यालय और विकास खंड, पूरा पता व मोबाइल नंबर के साथ विश्वविद्यालय में चयन की तिथि, परीक्षा का नाम, परीक्षा वर्ष और अनुक्रमांक सहित अन्य जरूरी विवरण शामिल हैं। साथ ही शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता से संबंधित प्रमाणपत्रों की छायाप्रति भी उपलब्ध करानी होगी। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विकास खंड में कार्यरत संबंधित शिक्षकों से निर्धारित प्रारूप में सूचनाएं एकत्र कर समय सीमा के भीतर कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
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पडरौना। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की डिग्री के आधार पर नियुक्त कुशीनगर में तैनात शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर संबंधित शिक्षकों का ब्योरा एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू), उत्तर प्रदेश, लखनऊ की ओर से यह जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में सामने आई अनियमितताओं की जांच चल रही है। इस मामले में लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी के तहत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विवेचना की जा रही है।
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विवेचना के सिलसिले में ऐसे चयनित अध्यापकों और अध्यापिकाओं का विवरण मांगा गया है, जिनकी नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से सत्यापन कराया गया था। इसके लिए निर्धारित प्रारूप में संबंधित शिक्षकों की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें शिक्षक का नाम, पिता का नाम, वर्तमान में कार्यरत विद्यालय और विकास खंड, पूरा पता व मोबाइल नंबर के साथ विश्वविद्यालय में चयन की तिथि, परीक्षा का नाम, परीक्षा वर्ष और अनुक्रमांक सहित अन्य जरूरी विवरण शामिल हैं। साथ ही शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता से संबंधित प्रमाणपत्रों की छायाप्रति भी उपलब्ध करानी होगी। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विकास खंड में कार्यरत संबंधित शिक्षकों से निर्धारित प्रारूप में सूचनाएं एकत्र कर समय सीमा के भीतर कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
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